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सुख-दुख

जब मैं बीबीसी हिंदी से रोते हुए बाहर आया था!

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इफ्तेखार अली-

क्या बीबीसी हिंदी ने मेरे साथ ग़लत किया?

मेरी कहानी शुरू होती है 21 अक्टूबर 2024 से. यह बीबीसी हिंदी में मेरा पहला दिन था. यह मेरे लिए एक सपने के सच होने जैसा था. मैंने इस मौके को पूरी मेहनत और ईमानदारी से निभाने की कोशिश की. धीरे-धीरे मैंने अपनी जिम्मेदारियां संभालीं और टीम का भरोसा जीतने की कोशिश की.

दरअसल, जब मुझे बीबीसी हिंदी से ऑफर मिला था तब मुझे स्पष्ट रूप से बताया गया था कि मेरी नियुक्ति एक साल के कॉन्ट्रैक्ट पर होगी. यह नियुक्ति एक कर्मचारी की जगह पर थी, जो अपनी पढ़ाई के लिए देश से बाहर गए थे. इसी वजह से उनकी जगह मुझे काम करने का मौका दिया गया था.

मेरी तरह ही एक अन्य महिला कर्मचारी को भी कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किया गया था. दोनों नियुक्तियां अलग-अलग कर्मचारियों की जगह पर रिप्लेसमेंट के तौर पर हुई थीं. कुछ महीनों बाद जिस कर्मचारी की जगह मैं काम कर रहा था, उनकी स्थिति बदल गई और उन्होंने संस्थान छोड़ दिया और उनकी जगह स्थायी रूप से उपलब्ध हो गई. ऐसी स्थिति में मुझे उम्मीद थी कि उस पद पर मुझे आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उस पद पर दूसरे कर्मचारी को नियुक्त कर दिया गया और उनकी जगह जो रिप्लेसमेंट थी, उसे मेरी जगह से जोड़ दिया गया.

इसके बाद मुझे बताया गया कि जब मेरी मूल रिप्लेसमेंट वापस आएंगी, तब मुझे अपना पद छोड़ना होगा. मैं इस व्यवस्था के लिए तैयार था, क्योंकि शुरुआत से ही मेरी नियुक्ति एक साल के कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर हुई थी और मुझे इसकी जानकारी थी.

हालांकि, मेरी रिप्लेसमेंट के आने में देरी हुई, जिसके कारण मेरा कॉन्ट्रैक्ट पहले तीन महीने के लिए बढ़ाया गया. उस समय मुझे लगा कि शायद मेरे लिए आगे स्थायी अवसर बन सकता है. इसके बाद जब मेरी रिप्लेसमेंट के आने में और देरी हुई, तो मेरा कॉन्ट्रैक्ट दोबारा तीन महीने के लिए बढ़ा दिया गया. लेकिन आखिरकार जब मेरी रिप्लेसमेंट वापस आईं, तो मुझे बताया गया कि मैं फ्रीलांस के तौर पर काम जारी रख सकता हूं. मैं इस विकल्प के लिए भी तैयार था, क्योंकि दिल्ली जैसे बड़े शहर में अपने खर्चों को संभालने के लिए काम का जारी रहना मेरे लिए जरूरी था.

अब असली कहानी यहां से शुरू होती है.

बीबीसी हिंदी में काम करने के दौरान ही एक नई वैकेंसी निकली थी. मैंने उस पद के लिए आवेदन किया और इंटरव्यू भी दिया. इंटरव्यू के बाद मुझे बताया गया कि असिस्टेंट प्रोड्यूसर पद के लिए मेरा नाम एचआर को भेज दिया गया है.

हालांकि, इसके बाद मुझे बताया गया कि एचआर की तरफ से जानकारी दी गई है कि फिलहाल केवल प्रोड्यूसर पद की वैकेंसी उपलब्ध है. साथ ही मुझे भरोसा दिलाया गया कि जब भी संस्थान में असिस्टेंट प्रोड्यूसर की वैकेंसी आएगी, तो मुझे प्राथमिकता दी जाएगी और मेरी नियुक्ति की प्रक्रिया आसान होगी.

मैंने इस बात को लेकर एचआर से भी बातचीत की थी. वहां से भी मुझे सकारात्मक जवाब मिला और मुझे भरोसा दिलाया गया कि मुझे भविष्य के अवसरों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. लेकिन जब मेरा कॉन्ट्रैक्ट पूरा हुआ, तो परिस्थितियां बदल गईं. जिन बातों और उम्मीदों के आधार पर मैंने आगे की योजना बनाई थी, वे पूरी नहीं हो सकीं.

मैंने इस विषय पर अपने सीनियर्स से सलाह ली. उन्होंने मुझे सुझाव दिया कि केवल फ्रीलांस के भरोसे रहने के बजाय मुझे आगे नए अवसर तलाशने चाहिए. मैंने उनकी सलाह को स्वीकार किया और बीबीसी हिंदी से आगे बढ़ने का फैसला किया.

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