दैनिक भास्कर के लखनऊ ऑफिस में पिछले 6–7 महीनों से सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। न्यूज़ रूम में लगातार उठापटक देखने को मिल रही है और सब-एडिटर से लेकर न्यूज़ एडिटर स्तर तक कई लोग संस्थान छोड़ चुके हैं। वीडियो टीम, लोकल डेस्क, लखनऊ डेस्क, बिग सिटी से करीब 8-9 से अधिक लोग संस्थान छोड़ चुके हैं. इसमें एक न्यूज़ एडिटर, दो डीएनई, सब एडिटर, सीनियर रिपोर्टर सहित कई पदों के लोग हैं. छोड़ने वालों में प्रवीन सिंह, सतीश शुक्ला, सरिता तिवारी, मनोज द्विवेदी, आशीष कुमार, सचिन, प्रांजल, आकाश द्विवेदी, निखिल साहू सहित कुछ नाम प्रमुख हैं.
लगातार हो रहे इस पलायन ने न्यूज़ रूम के कामकाज और अंदरूनी माहौल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अभी भी कुछ कर्मचारी संस्थान छोड़ने की तैयारी में हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर क्यों अनुभवी और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग लगातार बाहर का रास्ता चुन रहे हैं? न्यूज़ रूम में वर्षों से एक ही जगह जमे कुछ लीड्स की कार्यशैली और निर्णय लेने के तरीके को इसकी एक वजह माना जा रहा है, जबकि अंदरखाने गुटबाजी और आपसी खींचतान की चर्चा भी है। हालांकि, असली वजह क्या है, यह अपने आप में जांच का विषय है।
फिलहाल यहां के स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के हेड राजेश दुबे भी नोटिस दे चुके हैं। बताया जा रहा है कि वह जल्द ही किसी बड़े मीडिया संस्थान की टीम का हिस्सा बनने जा रहे हैं। वहीं मेन फ्रंट डेस्क EOD से जुड़े से भी एक विकेट गिरने जा रहा।यहां भी एक के संस्थान छोड़ने की तैयारी में होने की चर्चा है। जॉइन करने के बाद से ही साइडलाइन होने की वजह से वह अवसर की तलाश में थे. उनको एक प्रमुख अखबार के स्टेट ब्यूरो में पोलिटिकल टीम लीड करने की जिम्मेदारी मिल सकती है. बातचीत करीब-करीब फाइनल दौर में है। आने वाले दिनों में अगर कुछ और अनुभवी चेहरे संस्थान छोड़ते हैं तो निश्चित तौर पर यह स्थिति प्रबंधन के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
भड़ास को भेजे गए इनपुट पर आधारित


