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नवभारत टाइम्स ने असग़र वजाहत को पाकिस्तानी लेखक बना दिया, देखें स्क्रीनशॉट

Older man with a gray beard and bald head, wearing round sunglasses and a brown plaid shirt, outdoors (backpack strap over his shoulder).

असग़र वजाहत-

मुझे पाकिस्तानी लेखक बना दिया गया…

एक सज्जन ने मुझे यह जानकारी दी कि एक हिंदी समाचारपत्र ने मुझे पाकिस्तानी लेखक लिखा है. उन्होंने एक स्क्रीनशॉट भी भेजा था. इस संबंध में मुझे कुछ अधिक जानकारी मिली जो साझा कर रहा हूँ…

यह अंश Navbharat Times के फिल्म समीक्षा अनुभाग (Film Review Section) में फिल्म बंटवारा (या ‘जिस लाहौर नै देख्या ओ जम्या ए नई’ नाटक आधारित रूपांतरण) की समीक्षा के अंतर्गत यह लेख 14 अगस्त 2026 को प्रकाशित हुआ था।

यह एक बहुत गंभीर आरोप है. किसी को पाकिस्ता बना देने के क्या गंभीर नतीजे निकल सकते हैं इसको हम सब जानते है.

दिए गए स्क्रीनशॉट के अनुसार पूरे लेख का पाठ इस प्रकार है:

लेख का विवरण (तस्वीर के अनुसार):

“पड़ोसी देशों के बीच मेलजोल के संबंध होने चाहिए, लेकिन इसका पैगाम अतीत की क्रूरतम यादों के साथ जोड़कर देना नाइंसाफी लगता है। मरहम लगाने के लिए पुराने जख्मों को दोबारा कुरेदना ठीक नहीं। बंटवारा मूवी पाकिस्तानी लेखक असगर वजाहत के 1989 में लिखे गए नाटक ‘जिस लाहौर नै देख्या, ओ जम्या ए नई’ (जिसने लाहौर नहीं देखा, वो जन्मा ही नहीं) पर आधारित है। यह नाटक पाकिस्तान में ही यह कहकर बैन कर दिया गया था कि इसने इंसानियत को रूमानी बनाने के लिए क्रूर जमीनी हकीकतों को नजरअंदाज कर दिया।….”

इस संबंध में सबसे पहले तो नवभारत टाइम्स को जवाब देना होगा कि किस आधार पर मुझे पाकिस्तानी लेखक लिखा गया? उसके बाद आगे की कार्यवाही तय की जाएगी.

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