पुष्प रंजन-
अंग्रेज़ी अख़बारों ने तो और घिना दिया!
आजकल अंग्रेज़ी में छपने का मानसिक रोग हो गया है. मोदीजी की देखा-देखी, लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर (LLPP) टाइप लंडूरों में यह मानसिक रोग सिर चढ़कर बोल रहा है. इन्हीं में से एक हैं, ‘पाकिस्तान स्पेशलिस्ट’ हमारे गिरिराज बाबू। जो शख़्स हिंदी, एक सेन्टेंस शुद्ध नहीं बोल सकता, वो देश के नामी-गिरामी अंग्रेज़ी अख़बारों के सम्पादकीय पेज पर आलेख लिख रहा है.
आप में से कुछ लोगों को अक्टूबर 2022 में टी-20 विश्व कप में जिम्बाब्वे से पाकिस्तान की हार पर ‘बिहार रत्न’, गिरिराज बाबू का एक ट्वीट तो याद होगा? क्या लिखा था मंत्री जी ने- “boys pled bell”! ये जैसा बोलते हैं, वही लिखा। छठी क्लास का कोई बच्चा भी लिखता, तो “boys played well” लिखता। सोशल मीडिया पर इस लवण भास्कर की भरपूर लिहाड़ी ली गई थी. लेकिन, अपने गिरिराज बाबू पर कोई असर नहीं हुआ. ऐसे लोग आदतन, कुकुर जैसा देह झाड़कर आगे बढ़ जाते हैं.
कल अचानक से कुछ अखबारों के सम्पादकीय पन्नों पर गिरिराज बाबू के आलेख देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. अख़बार भी कोई ऐसे-वैसे नहीं Hindu, Financial Express, Pioneer और इसे PM Modi को Tag किया था ‘निर्वस्त्र मंत्रालय’ के निर्लज्ज मंत्री जी ने, ताकि नंबर बने. आलेख में मोदी चालीसा के अलावा घंटा नहीं कुछ मिलेगा। मन तो करता है, इन अख़बारों के सम्पादकों को उनके दफ़्तर जाकर जूतियाऊँ।
कोई पत्रकार पूरे रिसर्च के साथ आलेख भेजे, तो ये सरवे छापने में सौ नखरे दिखाते हैं. अधिकांश भेजे अच्छे आलेखों को रद्दी के हवाले कर देते हैं. यही सूअर, पेड मनी मिलने पर किसी भी अंगूठा छाप का आलेख अपने सबसे प्रतिष्ठित सम्पादकीय पेज पर छाप देते हैं. ये ज़लील संपादक लोग किसी दिन “हाफीडेविट फेम ” सम्रटवा का आलेख भी छाप दें, तो आश्चर्य मत कीजियेगा।





