दिल्ली की खबर कलकत्ता के अखबार में
संजय कुमार सिंह
भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में है इसलिए उसकी जीत खबर नहीं है। हो भी तो ऐसी खबर से ज्यादा महत्वपूर्ण है जनहित के मामले। लेकिन आज ज्यादातर अखबारों में भाजपा का प्रचार है रांची में छात्रों की जीत भी बड़ी खबर है लेकिन द हिन्दू की लीड के अनुसार, जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के नेता रविन्द्र पासवान ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बावजूद आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच कराने की उनकी प्रमुख मांग को अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है। उन्होंने मांग दोहराते हुए कहा, “हमारी मांगें पूरी कर दीजिए, और हम घर जाकर पढ़ाई करेंगे”। उन्होंने यह भी कहा था कि आंदोलन की शुरुआत में कांग्रेस नेताओं (राहुल गांधी) ने आश्वासन दिया था कि यदि सरकार कदम नहीं उठाती है तो वे समर्थन वापस लेंगे, लेकिन समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मुझे लगता है कि यह राजनीति है और सीबीआई जांच की मांग जांच को केंद्र सरकार यानी भाजपा के नियंत्रण में ले जाएगी। इसी तरह, झारखंड सरकार से कांग्रेस का समर्थन वापस लेना राज्य में भाजपा की सरकार बनाने की संभावनाएं तैयार करेगा। संभव है भाजपा अपनी रणनीति के तहत काम कर रही हो लेकिन कांग्रेस या राहुल गांधी भी कमजोर नहीं हैं। उन्होंने पहले तो आंदोलन को समर्थन दिया लेकिन आंदोलनकारियों के दबाव में नहीं आए। फिर हेमंत सोरेन को चिट्ठी लिखी और 14 अगस्त 2026 की उनकी चिट्ठी को साझा करते हुए सरकारी प्रचारक और पूर्व पत्रकार दिलीप मंडल ने 17 अगस्त को लिखा, राहुल गांधी का पत्र झारखंड में कांग्रेस-झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन को तोड़ देगा। राहुल गांधी का पत्र हेमंत सोरेन को शायद ही पसंद आएगा। द्रमुक के बाद, अब कांग्रेस जेएमएम का साथ भी खो सकती है। कोई भी चुना हुआ सीएम यह पसंद नहीं करेगा कि कोई छोटा सहयोगी सार्वजनिक रूप से उसे कामकाज के बारे में सीख दे। राहुल गांधी अपना मोबाइल उठा सकते थे। इसके बजाय, उन्होंने सार्वजनिक पत्र का रास्ता चुना। इससे यह संदेश गया कि वही बॉस हैं।
मैं इस चिट्ठी या टिप्पणी पर अपनी ओर से कुछ नहीं कह रहा हूं। जो कहना था ऊपर कह चुका हूं, इस पोस्ट के बाद हुआ यह कि रात में झारखंड सरकार ने मांगें मान ली और आज इंडियन एक्सप्रेस की खबर का शीर्षक है, विरोध प्रदर्शनों के बीच हेमंत सोरेन ने प्रमुख परीक्षा रद्द की, आउटसोर्स (और ब्लैकलिस्ट की जा चुकी एजेंसी) से कराई सभी परीक्षाएं रद्द कीं। कल ही टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड थी, एनटीए ने गलतियां मानीं, 3 एनईटी परीक्षाएं फिर से होंगी। इस पर मैंने लिखा था, परीक्षा कराने वाली एजेंसी गलती करे और कोई विकल्प नहीं है, स्वीकार करना पड़े। इससे ज्यादा बुरी स्थिति क्या होगी? पर्चे लीक होते रहे हैं और इससे परेशान होकर 22 बच्चों ने आत्महत्या कर ली। सरकार ने उनके लिए दो शब्द नहीं कहे। मुआवजा देने की मांग पर गोल-मोल समझौता किया और पूरी व्यवस्था ऐसी रही कि यह मांग पीछे रह गई। मुआवजा देने में यह सरकार वैसे भी कमजोर रही है। इसके मुकाबले झारखंड सरकार का रुख और रवैया देखिए। मुझे लगता है कि कांग्रेस और झामुमो भी राजनीति कर रहे हैं, भाजपा का मुकाबला कर रहे हैं और हर बार की तरह इस बार भी भाजपा अपनी ही जाल में फंस रही है। पता तब चलेगा जब घिर जाएगी। तब तक हेडलाइन मैनेजमेंट चलता रहेगा, मीडिया राजनीति करता रहेगा और राजनीति की निष्पक्ष रिपोर्टिंग नहीं होगी।
ऐसे में आज टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड भाजपा संगठन में फेलबदल नहीं है, झारखंड आंदोलन भी नहीं है। यहां यह बताया गया है कि दिल्ली के तीन पंजीकृत मतदाताओं में एक ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर हो जाएंगे। जाहिर है, यह संख्या बहुत ज्यादा है और सुप्रीम कोर्ट की जानकारी में, उसकी सहमति और मंजूरी से हो रहा है और लाखों लोग वोट नहीं दे पाएं फिर भी होने दिया जा रहा है। इस तरह नाम निकाल दिए जाने से फिर शामिल करवना भारी मुसीबत है और बहुत कम लोगों के पास इतना समय, संसाधन और इच्छाशक्ति होगी कि वे अपना नामांकन फिर से दर्ज करवा सकें। जाहिर है, यह अनुचित है और खबर है लेकिन सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया के लिए इतना महत्वपूर्ण है कि आज लीड बनाया है। आज खबर सावन के तीसरे सोमवार पर हादसे की भी है। अमर उजाला की लीड के अनुसार, अलग-अलग हादसों में 16 श्रद्धालुओं की मौत हुई है। एक हादसा करंट की अफवाह से भगदड़ का है। इसमें सात महिला श्रद्धालुओं की मौत की खबर है। दूसरा हादसा, डबल इंजन वाले बंगाल के तारापीठ स्थित एक होटल में आग लगने से नौ तीर्थयात्रियों के जिन्दा जलने का है। पहला हादसा भी डबल इंजन वाले बिहार के अशोकधाम स्थित इंद्रदमनेश्वर महादेव मंदिर का है। यहां करीब 50,000 श्रद्धालु पहुंचे थे। हादसे में 25 के घायल होने की भी खबर है। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, मनमाने हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट सख्त। नवोदय टाइम्स की लीड, सेकेंड लीड वही सब रूटीन खबरें है। एक खबर जो दूसरे अखबारों में नहीं है उसके अनुसार शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि एनटीए अपने 50 से अधिक कर्मियों को हटा दिया है। प्रमुख पदों के लिए पेशेवरों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड हिन्दुस्तान टाइम्स में सेकेंड लीड है। खबर तो एक जैसी है लेकिन यहां शीर्षक है, दिल्ली के एसआईआर में सबसे ज्यादा नामों की कटौती तुगलकाबाद में हो सकती है। दैनिक भास्कर में पहले पन्ने पर रूटीन खबरों के अलावा कोई विशेष खबर नहीं मिली। दूसरे पहले पन्ने पर लीड और सेकेंड लीड दोनों अमेरिका से जुड़ी खबरें हैं। लीड ईरान अमेरिका युद्ध से संबंधित है। इसमें कहा गया है कि दोनों देश 60 दिन में शांति की शर्तें तय करने में नाकाम रहे। खबर के अनुसार डेडलाइन खत्म हो चुकी है; होर्मुज में वसूली जारी है और 80 प्रतिशत अमेरिकी मिसाइलें नष्ट हो चुकी हैं। दि एशियन एज में लीड, सेकेंड लीड जैसी खबरें तो वही हैं लेकिन एक राजनीतिक खबर है जो नया खुलासा कहा जा सकता है। खबर के अनुसार, श्री शुखेन्दु राय जो तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद हैं और अब भाजपा समर्थक हो चुके हैं, ने कहा है कि ममता बनर्जी ओरिजनल ट्रेटर यानी गद्दार हैं। अखबार ने इसे चार कॉलम में छापा और फोटो ममता बनर्जी की नहीं, शुखेन्दु शेखर रॉय की है। द टेलीग्राफ में कोई राजनीतिक खबर तो अलग नहीं दिखी लेकिन लीड का शीर्षक भी खास है – स्मृति ईरानी और राम माधव की वापसी, छात्रों के ज़बरदस्त विरोध के बाद अमित मालवीय और तेजस्वी सूर्या को हटाया गया। मुख्य शीर्षक है, बीजेपी फेरबदल में वापसी और जेन जी के ‘शिकारों’ की छुट्टी। आज टेलीग्राफ के पहले पन्ने पर कल के टाइम्स ऑफ इंडिया जैसी कई महत्वपूर्ण खबरें हैं। कल टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर थी, एनटीए ने गलतियां मानीं, 3 एनईटी परीक्षाएं फिर से होंगी। यह बड़ा मामला है लेकिन आज के पहले पन्ने पर इसका कोई कायदे का फॉलो अप नहीं है। तथ्य यह है कि एनटीए ने इसे स्वीकार करने में जानबूझकर देरी की है वरना मामला तो तभी सामने आ गया था जब कॉक्रोच आंदोलन शिखर पर था। उस समय इस गलती को स्वीकार करने से ज्यादा भद्द पिटती, लेकिन छिपाई नहीं जा सकती थी इसलिए देर की गई। एनटीए ने अपनी इज्जत बची हो तो जरूर बचा ली होगी लेकिन छात्रों का ख्याल नहीं रखा। मीडिया ने आज उसका फॉलोअप नहीं दिया। द टेलीग्राफ ने तीन कॉलम में छापा है। बार-बार की गड़बड़ियों के लिए विपक्षी नेताओं ने एनटीए को भंग करने की मांग की है। एनटीए से संबंधित खबरें जरूर हैं पर वे की गई है कार्रवाई बताने वाली हैं, उसकी नालायकी या भंग करने की मांग इतनी प्रमुखता से मुझे तो सिर्फ टेलीग्राफ में दिखी।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


