जी मीडिया समूह के चैयरमैन सुभाष चंद्रा का 22 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्जा माफ कर दिया गया है। इसी के साथ भारत से फरार होकर यूके में बस चुके आर्थिक अपराधी विजय माल्या ने चंद्रा को ट्वीट कर बधाई भेजी है। माल्या ने लिखा है कि- यदि यह सच तो मेरे दोस्त चंद्रा को बधाई… नीचे पढ़ें
ZEE टीवी के मालिक सुभाष चंद्रा में ‘सुरख़ाब के पर’ लगे हैं क्या भाई?
कर्ज था 22006 करोड़ का, चुकाया 6.5 करोड़ और कर्जमुक्त हो गए?
यानि कुल कर्ज का सिर्फ 0.03 फ़ीसदी चुकाकर फ्री हो गए?
इसी देश में लाख – दो लाख के बकाये पर बैंक वाले रिकवरी एजेंट भेज देते हैं. कुर्की का ऑर्डर ले आते हैं और लाला जी पर ऐसी मेहरबानी?
NCLT में बैठे लोगों ने किसके कहने पर ये किया?
-अजीत अंजुम
सुरेंद्र राजपूत-
इस देश का सबसे बड़ा दुश्मन गोदी मीडिया है!
उनके कारनामे से देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जा रही है। आपका पैसा बैंक और LIC में अब सेफ़ नहीं।
आपको क्या लगता है गोदी मीडिया दिन रात पापा का गुणगान और विपक्ष को गालियां क्यों देता है? ये खबर पढ़िए।
Zee TV वाले सुभाष चंद्रा का 22 हजार करोड़ का लोन सेटल हो गया सिर्फ 6.5 करोड़ में। आम आदमी की एक EMI मिस हो जाए तो बैंक वाले खून निकाल लेते हैं और यहां खेल देखिए और खेल की धार देखिये।
बाकी आपके लिए जी टीवी दिन रात सुबह शाम नफरत की खबर का प्रसारण करेगा!
भारत समाचार का ट्वीट-
नई दिल्ली | हैरान करने वाला मामला। 22 हजार करोड़ का लोन। सेटलमेंट सिर्फ़ 6.5 करोड़ में। ₹22,006 करोड़ का दावा… भुगतान सिर्फ ₹6.5 करोड़! सुभाष चंद्रा के मामले में 99.97% का ‘हेयरकट’। देश की insolvency व्यवस्था से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। Zee Group के संस्थापक सुभाष चंद्रा के खिलाफ लेनदारों के करीब ₹22,006.57 करोड़ के admitted claims हैं, लेकिन मंजूर repayment plan में कुल भुगतान महज ₹6.5 करोड़ का है।
यानी लेनदारों की रिकवरी करीब 0.03% और कथित तौर पर 99.97% का haircut।
NCLT के Judicial Member नीलेश शर्मा ने IBC की धारा 114 के तहत repayment plan को मंजूरी दी। प्रस्ताव में ₹6.25 करोड़ creditors के लिए और ₹25 लाख process cost के लिए रखे गए हैं।
मामले की गंभीरता का अंदाजा LIC Housing Finance के आंकड़े से लगाया जा सकता है। उसका admitted claim करीब ₹1,322.39 करोड़ है, जबकि repayment plan में उसे लगभग ₹38.09 लाख मिलने की बात है। यानी करीब 0.028% की recovery।
कुछ बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस repayment plan का विरोध किया था। लेकिन योजना को creditors के 80.81% voting share का समर्थन मिला। NCLT ने कहा कि वह creditors की commercial wisdom की जगह अपना फैसला नहीं रख सकता।
₹22,006 करोड़ → ₹6.5 करोड़
यही इस पूरी कहानी का सबसे हैरान करने वाला आंकड़ा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि ₹22 हजार करोड़ से अधिक के admitted claims वाले मामले में सिर्फ ₹6.5 करोड़ की repayment तक स्थिति आखिर पहुंची कैसे? और 99.97% haircut का वास्तविक आर्थिक बोझ कौन उठाएगा।
अगर यह सच है तो मेरे दोस्त सुभाष को बहुत-बहुत बधाई : विजय माल्या
बैंकों और सरकार ने माना है कि उन्होंने मुझसे 6203 करोड़ रुपये के जजमेंट डेट के बदले 14,100 करोड़ रुपये वसूले हैं। कई और कर्जदारों ने कुछ हिस्से पर सेटलमेंट कर लिया है। मुझे लगता है कि यह इंडियन डेट रेजोल्यूशन जस्टिस है।
मीडिया से कोई सवाल नहीं। विजय माल्या ने X पर पोस्ट किया और कहा….अगर यह सच है तो मेरे दोस्त सुभाष को बहुत-बहुत बधाई। बैंकों और सरकार ने माना है कि उन्होंने मुझसे 6203 करोड़ रुपये के जजमेंट डेट के बदले 14,100 करोड़ रुपये वसूले हैं। कई और कर्जदारों ने कुछ हिस्से पर सेटलमेंट कर लिया है। मुझे लगता है कि यह इंडियन डेट रेजोल्यूशन जस्टिस है। मीडिया से कोई सवाल नहीं।

विजय माल्या का ट्वीट-
If True many congratulations to my friend Subhash.Banks and Government have admitted having recovered Rs 14,100 crores from me against a Judgement debt of Rs 6203 crores. Many more borrowers have settled at a fraction. Indian Debt Resolution Justice I presume. No media questions.
मूल खबर…


