प्रदीप राय (वरिष्ठ अधिवक्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष)
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026: सुप्रीम कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में अधिवक्ताओं को हिरासत में लिए जाने के ख़िलाफ़ कानून से जुड़े लोगों में तीखी प्रतिक्रिया हुई। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने इसे “बहुत परेशान करने वाला” बताया और मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष तत्काल उल्लेख करने की बात कही। बाद में CJI के हस्तक्षेप के बाद अधिवक्ताओं को रिहा कर दिया गया।
10 अक्टूबर को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर नई दिल्ली क्षेत्र में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। धारा 163 BNSS के तहत निषेधाज्ञा लागू थी और पुलिस बड़े पैमाने पर हिरासतें कर रही थी।
इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट के आसपास लगभग 50 से 100 अधिवक्ताओं (वरिष्ठ वकील, युवा अधिवक्ता और महिला वकील शामिल) को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, अधिवक्ता शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे या जंतर-मंतर की ओर मार्च करने का प्रयास कर रहे थे। प्रदीप राय ने अपने पोस्ट में कहा कि अधिवक्ताओं को उनके चैंबर्स से हिरासत में लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सुमिता हजारिका सहित कुछ वकीलों को वज्र वैन में ले जाया गया। दावा किया गया कि दो AOR सहित चार वकीलों को बिना नाम टैग वाले पुलिसकर्मियों द्वारा उठाया गया और उन्हें गंतव्य की जानकारी नहीं दी गई। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि हिरासत में लिए गए वकीलों को यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स ले जाया गया।
SCBA और अन्य संस्थाओं की प्रतिक्रिया
SCBA ने 10 अक्टूबर को प्रस्ताव पारित कर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं, विशेषकर महिलाओं, पर अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा की। एसोसिएशन ने CJI से आग्रह किया कि वे अधिकारियों से बात करें, हर हिरासत में लिए गए अधिवक्ता की लोकेशन और सुरक्षा सुनिश्चित करें, उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराएं और बिना कानूनी आधार वाले मामलों में तुरंत रिहाई हो। SCBA की मानद सचिव प्राज्ञा बाघेल ने भी CJI को पत्र लिखा।
प्रदीप राय ने सुबह करीब 11:30 बजे X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया:
“The detention of Supreme Court advocates from their chambers is deeply disturbing. We are mentioning this urgently before the Hon’ble Chief Justice of India. Arbitrary detention and intimidation of advocates will not be tolerated. I demand immediate release of the lawyers.”
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के अध्यक्ष एडवोकेट देवव्रत ने भी CJI को सूचित किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी मामले में हस्तक्षेप किया।
CJI का हस्तक्षेप और रिहाई
CJI सूर्यकांत ने अधिकारियों से बात की और अधिवक्ताओं की तत्काल रिहाई का निर्देश दिया।
प्रदीप राय ने बाद में अपडेट देते हुए CJI का आभार व्यक्त किया। उन्होंने न्यू दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा से भी बात की, जिन्होंने बताया कि उनके पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार कोई वकील हिरासत में नहीं था, लेकिन यदि कोई हो तो विवरण मिलते ही रिहा कर दिया जाएगा। राय ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि सभी वकीलों को रिहा कर दिया गया है। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और बार की गरिमा, सुरक्षा तथा पेशेवर स्वतंत्रता का सम्मान करने का आग्रह किया।



