नई दिल्ली। भारतीय प्रेस परिषद (Press Council of India) को लेकर लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी प्रशासनिक देरी आखिरकार खत्म हो गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 7 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी कर प्रेस काउंसिल में कार्यरत पत्रकारों की श्रेणी के 13 सदस्यों के नाम अधिसूचित कर दिए हैं। इनमें छह संपादक और सात ऐसे कार्यरत पत्रकार हैं जो संपादक की श्रेणी में नहीं आते।
यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 15वीं प्रेस काउंसिल का गठन होने के बाद भी लंबे समय तक परिषद में पत्रकारों का कोई प्रतिनिधित्व नहीं था। भारतीय प्रेस परिषद करीब एक साल तक अपनी स्वीकृत सदस्य संख्या की लगभग आधी ताकत के साथ काम करती रही। द इंडियन एक्सप्रेस ने 7 अक्टूबर को ही अपनी रिपोर्ट में बताया था कि परिषद में 28 सदस्यों में से 13 पत्रकार सदस्यों के नाम पहले ही नामित किए जा चुके थे, लेकिन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की औपचारिक अधिसूचना लंबित थी। अब मंत्रालय ने इन नामों को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है।
कौन-कौन बने प्रेस काउंसिल के सदस्य?
मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक ‘वर्किंग जर्नलिस्ट्स—एडिटर्स’ श्रेणी में छह नाम हैं—
प्रदीप कुमार जैन, सैयद रजा हुसैन रिजवी, अंकुर दुआ, अपर्णा शुक्ला, राज परवाना/नरेंद्र सिंह और विनोद बाजपेयी।
वहीं ‘वर्किंग जर्नलिस्ट्स—अदर दैन एडिटर्स’ यानी संपादकों के अलावा कार्यरत पत्रकारों की श्रेणी में विनोद कोहली, गीतार्थ पाठक, प्रज्ञानंद चौधरी, किंशुक प्रमाणिक, सी.के. नायक, प्रसन्न कुमार मोहंती और बिजॉय ककचिंगताबम को नामित किया गया है। केंद्र सरकार ने ये नाम भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 के प्रावधानों के तहत अधिसूचित किए हैं।
आखिर इतनी देर क्यों लगी?
प्रेस काउंसिल में इन 13 पत्रकार सदस्यों के नाम सरकार की अधिसूचना के लिए लंबे समय से लंबित थे। दस्तावेजों के मुताबिक प्रेस काउंसिल ने पत्रकार सदस्यों के नाम अलग-अलग चरणों में नामित किए थे।
छह संपादकों के नाम दिसंबर 2025 में नामित किए गए थे। इसके बाद छह कार्यरत पत्रकारों के नाम मई 2026 में और सातवें कार्यरत पत्रकार का नाम जुलाई 2026 में नामित किया गया। परिषद ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को 25 मई, 2 जुलाई और 9 सितंबर 2026 को अलग-अलग पत्र भेजकर इन नामों की गजट अधिसूचना जारी करने का अनुरोध भी किया था।
इसके बावजूद 7 अक्टूबर तक इन नामों की सरकारी अधिसूचना नहीं हुई थी।
इसी बीच द इंडियन एक्सप्रेस ने 7 अक्टूबर को ही यह सवाल उठाते हुए खबर प्रकाशित की कि देश की प्रमुख वैधानिक मीडिया निगरानी संस्था लगभग एक साल से आधी ताकत पर काम कर रही है और उसमें एक भी कार्यरत पत्रकार या संपादक सदस्य के रूप में मौजूद नहीं है। रिपोर्ट सामने आने के कुछ ही समय बाद सरकार ने 13 नामों की अधिसूचना जारी कर दी।
15वीं प्रेस काउंसिल का गणित
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया एक वैधानिक स्वायत्त संस्था है, जिसका गठन प्रेस काउंसिल एक्ट, 1978 के तहत किया गया है। इसका मूल उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता को संरक्षित करना तथा समाचारपत्रों और समाचार एजेंसियों के मानकों को बनाए रखना और उनमें सुधार करना है।
कानून के मुताबिक परिषद में अध्यक्ष के अलावा 28 सदस्य होते हैं। इनमें संसद के दोनों सदनों के सदस्य, समाचारपत्रों के प्रबंधन/स्वामित्व से जुड़े प्रतिनिधि, पत्रकार, समाचार एजेंसी से जुड़े प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
15वीं प्रेस काउंसिल के गठन की प्रक्रिया 2024 में शुरू हुई थी। 14वीं प्रेस काउंसिल का कार्यकाल अक्टूबर 2024 में पूरा हो गया था। इसके बाद नई परिषद के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन पत्रकारों की 13 सीटों पर नियुक्ति/अधिसूचना में लंबा अंतराल बना रहा।
अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को परिषद की अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्त किया गया था। वह करीब चार महीने तक अध्यक्ष का पद खाली रहने के बाद अप्रैल में वापस इस जिम्मेदारी पर आई थीं।
सरकार की अधिसूचना के बाद क्या बदला?
7 अक्टूबर की अधिसूचना के बाद प्रेस काउंसिल में पत्रकारों की वे 13 सीटें औपचारिक रूप से भर गई हैं, जो लंबे समय से खाली पड़ी थीं। PTI के मुताबिक इन 13 सदस्यों के आने से परिषद में छह संपादक और सात अन्य कार्यरत पत्रकार शामिल हो गए हैं।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इन नामों का चयन सीधे किसी सामान्य सरकारी भर्ती प्रक्रिया के तहत नहीं हुआ है। प्रेस काउंसिल एक्ट में अलग-अलग श्रेणियों के सदस्यों के नामांकन की व्यवस्था है। पत्रकारों की इन श्रेणियों में परिषद की ओर से नामांकन और उसके बाद केंद्र सरकार की अधिसूचना की प्रक्रिया होती है।
भारतीय प्रेस परिषद की अपनी वेबसाइट पर 15वीं प्रेस काउंसिल के पुनर्गठन से संबंधित दस्तावेजों में भी 16 दिसंबर 2025 और 25 मई 2026 के संपादक श्रेणी के नामांकन आदेश तथा 25 मई और 30 जुलाई 2026 के अन्य कार्यरत पत्रकारों के नामांकन आदेश दर्ज हैं।
पत्रकारिता के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
प्रेस काउंसिल देश में प्रिंट मीडिया से संबंधित शिकायतों, पत्रकारिता के मानकों और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण संस्थागत भूमिका निभाती है। ऐसे में परिषद में लंबे समय तक कार्यरत पत्रकारों और संपादकों का प्रतिनिधित्व न होना स्वाभाविक रूप से सवालों के घेरे में था।
खासकर ऐसे समय में जब मीडिया संस्थानों की स्वतंत्रता, पत्रकारों की सुरक्षा, सरकारी दबाव, डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और पत्रकारिता के मानकों को लेकर बहस लगातार तेज है, प्रेस काउंसिल में पेशेवर पत्रकारों की मौजूदगी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अब 13 पत्रकार सदस्यों की अधिसूचना के साथ 15वीं प्रेस काउंसिल को अपेक्षाकृत पूर्ण स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठ गया है। हालांकि परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध वर्तमान सदस्य सूची में इन पदों को अभी भी ‘Vacant’ दिखाया जा रहा है, जो वेबसाइट के अपडेट होने में संभावित समय-अंतर को दर्शाता है।
यानी जिस प्रेस काउंसिल में करीब एक साल से एक भी कार्यरत पत्रकार या संपादक सदस्य नहीं था, वहां अब सरकार ने 13 पत्रकारों के नाम औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिए हैं। सवाल अब यह रहेगा कि नई परिषद प्रेस की स्वतंत्रता, पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया संस्थानों की जवाबदेही से जुड़े मौजूदा संकटों पर कितनी प्रभावी भूमिका निभाती है।

