नई दिल्ली में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के बीच पुलिस की कार्रवाई और पत्रकारों को रोके जाने का मामला चर्चा में है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है। इस बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार लिडिया पोलग्रीन के नाम से दिल्ली की सड़कों से जुड़ा एक बयान सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। हालांकि, इस बयान की मूल रिकॉर्डिंग या आधिकारिक रिपोर्ट की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
10 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए जुट रहे युवाओं को पुलिस ने रोका। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों और आंदोलन से जुड़े नेताओं को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची से मृत, स्थानांतरित और अपात्र लोगों के नाम हटाना है।
प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा सख्त
प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई। रॉयटर्स के अनुसार, मध्य दिल्ली में कई मेट्रो स्टेशन और बाजार बंद रहे तथा मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गईं। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर आवाजाही नियंत्रित की। प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने में भी बाधाओं का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन कवर कर रहे पत्रकार भी हिरासत में
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन से पहले दिल्ली में कई लोगों को हिरासत में लेकर अस्थायी केंद्रों में रखा गया। इनमें प्रदर्शन कवर कर रहे 15 पत्रकार भी शामिल थे। इससे विरोध-प्रदर्शन की कवरेज और पत्रकारों की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठे हैं।
इससे पहले 3 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के कर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस ने बताया था कि इन पत्रकारों की शिकायतें आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दी गई हैं। ये आरोप हैं और इनकी जांच की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही इनके बारे में निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग और भाजपा ने मतदाता सूची में गड़बड़ी कर किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने के आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम में दो अहम सवाल हैं—क्या नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का पर्याप्त अवसर मिल रहा है और क्या प्रदर्शन कवर कर रहे पत्रकार अपना काम स्वतंत्र रूप से कर पा रहे हैं?
न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकार Lydia Polgreen दिल्ली की सड़कों पर:
“पत्रकारों को रोका जा रहा है. लाखों लोग सरकार के खिलाफ़ प्रोटेस्ट में हिस्सा लेना चाहते हैं लेकिन पुलिस उन्हें नहीं करने दे रही है.
ये सब उस देश में हो रहा है जो अपने आप को लोकतांत्रिक कहता है.”
डंका बज रहा है.
-प्रशांत टंडन, वरिष्ठ पत्रकार
ये भी पढें…


