आज भी शेयर बाज़ार में बड़ी गिरावट! ऐतिहासिक गिरावट और क्रैश के दौर में शेयर बाजार! और इसके बीच यह भी इतिहास में दर्ज होगा की देश के वित्त्त मंत्री का ऐसे संकट के बीच न कोई बयान आया है न सरकार ने 15 करोड़ डायरेक्ट/इनडायरेक्ट निवेशकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है वे उनकी चिंताओं के साथ हैं!
पहले छोटे मोटे क्रैश पर भी मीडिया वित्त्त मंत्री से सवाल करती थी और मंत्री को भी जवाब देना होता था! यह मार्किट क्रैश अब बहुत गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है और सरकार का यह पुराना ट्रेंड रहा है की वह तब तक मुद्दों को गंभीरता से नहीं लेती है जब तक वह बड़ा नासूर नहीं बन जाता है!
-नरेंद्र नाथ मिश्रा
नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026। दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली और तेज हुई। गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स इंट्राडे में 780 से 890 अंक तक टूटा और 71,700 के आसपास आया। एनएसई निफ्टी 1.2–1.4 प्रतिशत गिरकर 22,270–22,350 के दायरे में चला गया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स इससे भी ज्यादा नीचे थे। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण दोपहर तक करीब 7–7.7 लाख करोड़ रुपये घट चुका था।
यह अकेली गिरावट नहीं है। पिछले शुक्रवार को सूचकांक आठ हफ्तों की लगातार गिरावट के साथ बंद हुए थे। 2026 में निफ्टी अब तक लगभग 13 प्रतिशत नीचे है। सितंबर के आखिर में आर्थिक टाइम्स ने लिखा था कि साल के अंत तक यही रुख रहा तो यह 2011 के बाद का सबसे कमजोर कैलेंडर वर्ष होगा। विदेशी निवेशक लगातार बेच रहे हैं। बुधवार को एफआईआई ने 6,100 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। नौ सत्रों में उनकी बिकवाली करीब 57,000 करोड़ रुपये पहुँच चुकी है। साल भर की विदेशी निकासी रिकॉर्ड स्तर पर है।
दबाव के तात्कालिक कारण साफ हैं। आरबीआई ने बुधवार को रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी है। रुख “न्यूट्रल” से “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” हो गया। ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत चढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। बॉन्ड यील्ड ऊँची हैं, रुपया कमजोर है, और तिमाही नतीजों का मौसम टीसीएस के नतीजों के साथ शुरू हो रहा है।
इसी बीच एक सवाल और तेज हो रहा है। करीब 15 करोड़ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष निवेशक—डीमैट खाते, म्यूचुअल फंड और कर्मचारी भविष्य निधि के जरिए बाजार से जुड़े लोग—इस गिरावट के बीच खड़े हैं। आज तक वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण या सरकार की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया है जो इन निवेशकों को यह भरोसा दिलाए कि संकट में सरकार उनकी चिंता के साथ है। खोज में 8 अक्टूबर को बाजार की इस गिरावट पर मंत्रालय का कोई आश्वासन नहीं मिला। मंत्री का ताजा सार्वजनिक बयान 5 अक्टूबर का था, जब उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत “पठार” पर पहुँच गई है और आगे रियायत देना दोनों पक्षों के लिए बहुत मुश्किल है। उसी दिन सेंसेक्स दिन के ऊँचे स्तर से करीब 550 अंक फिसल गया था।
पहले छोटे सुधारों पर भी मीडिया वित्त मंत्री से सवाल करती थी और जवाब आता था। इस बार गिरावट हफ्तों से चल रही है, विदेशी पैसा रिकॉर्ड रफ्तार से निकल रहा है, और एक दिन में लाखों करोड़ मिट रहे हैं। फिर भी राजनीतिक प्रतिक्रिया लगभग शून्य है। आलोचकों का कहना है कि यह सरकार का पुराना तरीका है। मुद्दा तब तक गंभीर नहीं माना जाता जब तक वह बड़ा नासूर न बन जाए। समर्थक कह सकते हैं कि मौद्रिक नीति आरबीआई का क्षेत्र है और बाजार को रोजाना बयानों से नहीं चलाया जाता। लेकिन सवाल बना हुआ है। जब करोड़ों परिवारों की बचत सूचकांक के साथ नीचे जा रही हो, तो चुप्पी भी एक संदेश बन जाती है।
अभी बाजार नतीजों, कच्चे तेल और विदेशी प्रवाह पर टिका है। भरोसे का सवाल अलग है, और वह आज की लाल स्क्रीन से बड़ा होता जा रहा है।


