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भारत में एआई : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में गौतम अडानी का डेटा सेंटर कारोबार दिलचस्प है, भारती एयरटेल समेत रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा ग्रुप भी मैदान में!

Four suited men stand behind signs for Adani Data Centers, Airtel, Reliance Industries, and Tata Group in an AI-themed, high-tech backdrop.

मनोज अभिज्ञान-

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में गौतम अडानी का डेटा सेंटर कारोबार दिलचस्प है। 2021 में इस क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद अडानी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) ने एजकनेक्‍स (EdgeConneX) के साथ बने अडानीकनेक्‍स (AdaniConneX) में लगभग ₹8,379 करोड़ लगा दिए हैं। यह रकम भारती एयरटेल (Bharti Airtel), रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और टाटा ग्रुप (Tata Group) की संबंधित डेटा सेंटर कंपनियों में अब तक किए गए कम-से-कम ₹4,673 करोड़ के संयुक्त निवेश से भी लगभग दोगुनी है। यानी सिर्फ एक कारोबारी समूह का निवेश बाकी तीन बड़े समूहों के संयुक्त निवेश से करीब ₹3,700 करोड़ ज्यादा है।

टाटा ग्रुप ने अब तक लगभग ₹1,447 करोड़ लगाए हैं। टाटा कम्युनिकेशंस ने एसटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स (STT Global Data Centres) में करीब ₹1,247 करोड़ और टीसीएस (TCS) ने अपने नए हाइपरवॉल्ट डेटा सेंटर्स (HyperVault Data Centres) में कम-से-कम ₹200 करोड़ लगाए हैं। एसटीटी के पास पहले ही 400 मेगावाट से अधिक ऑपरेशनल डेटा सेंटर क्षमता है।

भारती एयरटेल का नक्स्ट्रा (Nxtra) 2013 से इस कारोबार में है। रिलायंस ने डिजिटल कनेक्शन (Digital Connexion) को 2023 में बनाया और टीसीएस (TCS) ने टीपीजी (TPG) के साथ 2025 में हाइपरवॉल्ट शुरू किया। इसलिए केवल क्यूम्युलेटिव इन्वेस्टमेंट देखकर यह निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होगा कि कौन सबसे आगे है।

अडानीकनेक्‍स (AdaniConneX) ने 2035 तक लगभग 5 गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता का लक्ष्य रखा है। टीसीएस (TCS) का लक्ष्य 2028 तक 1 गीगावाट है, जबकि एयरटेल नक्स्ट्रा (Airtel Nxtra) आने वाले वर्षों में 1 गीगावाट क्षमता तक पहुंचने की तैयारी में है।

आधुनिक हाइपरस्केल डेटा सेंटर में बिजली की खपत किसी सामान्य ऑफिस बिल्डिंग से हजारों गुना अधिक हो सकती है। एआई के लिए इस्तेमाल होने वाले हाई-परफॉर्मेंस जीपीयू सामान्य सर्वरों की तुलना में कहीं ज्यादा बिजली और कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मांगते हैं। इसलिए भविष्य में एआई की प्रतिस्पर्धा में जीत इस बात से तय होती है कि किसके पास पर्याप्त बिजली, जमीन, फाइबर-ऑप्टिक कनेक्टिविटी, कूलिंग, ट्रांसमिशन नेटवर्क और कैपिटल है।

अडानी के पास लैंड, पोर्ट्स, पावर जेनरेशन, ट्रांसमिशन, रिन्यूएबल एनर्जी और कंस्ट्रक्शन इकोसिस्टम है। रिलायंस के पास टेलीकॉम नेटवर्क, फाइबर, क्लाउड और विशाल डिजिटल इकोसिस्टम है। एयरटेल के पास टेलीकॉम नेटवर्क और एंटरप्राइज कनेक्टिविटी है। टाटा ग्रुप के पास टेक्नोलॉजी, टेलीकॉम, आईटी सर्विसेज और ग्लोबल एंटरप्राइज रिलेशनशिप हैं।

अगर 1 गीगावाट क्षमता तैयार कर दी गई लेकिन हाइपरस्केलर्स और एआई कंपनियों ने पर्याप्त कंप्यूटिंग क्षमता लीज नहीं की, तो अरबों रुपये की पूंजी कम रिटर्न देने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर में फंस सकती है।

2020 में भारत की डेटा सेंटर क्षमता लगभग 375 मेगावाट थी। 2025 तक यह करीब 1,500 मेगावाट हो गई। यानी पांच वर्षों में लगभग चार गुना वृद्धि। 2026 के मध्य तक परिचालन क्षमता करीब 1.75 गीगावाट पहुंच चुकी थी। और अब असली छलांग आने वाली है। जोन्स लैंग लासाल (Jones Lang LaSalle) वैश्विक स्तर की रियल एस्टेट और निवेश प्रबंधन कंपनी है, जो कमर्शियल रियल एस्टेट, डेटा सेंटर, ऑफिस, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों पर रिसर्च करती है। जेएलएल के अनुमान के अनुसार भारत की डेटा सेंटर क्षमता 2026 के लगभग 1.6 गीगावाट से बढ़कर 2029 तक 6 गीगावाट हो सकती है। यानी सिर्फ तीन वर्षों में लगभग चार गुना। इसके लिए करीब 110 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत बताई गई है। यानी आज जो हमें डेटा सेंटर की छोटी-सी इंडस्ट्री दिखाई देती है, वह कुछ वर्षों में भारत के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में शामिल हो सकती है।


प्रकाश हिंदुस्तानी-

कॉर्पोरेट जंग : अडानी और अंबानी ग्रुप भी भिड़ेंगे, देख लेना !

आनेवाले कुछ समय में अडानी और अंबानी समूह के कारोबारी हितों का टकराव तय है। आज हर क्षेत्र में सीधी टक्कर नहीं है, लेकिन दोनों एक-दूसरे के इलाके में घुस रहे हैं। जहाँ विस्तार एक साथ हो रहा है, वहाँ प्रतिस्पर्धा तेज होगी। लड़ाई दुकान की नहीं है। लड़ाई इस बात की है कि कल की बिजली कौन बनाएगा, डेटा सेंटर कौन चलाएगा, और हवाई अड्डे पर नेटवर्क किस शर्त पर चलेगा। रिलायंस की पकड़ उपभोक्ता बाजार में मजबूत है। अडानी की पकड़ इंफ्रास्ट्रक्चर में।

रिलायंस का पुराना आधार तेल और पेट्रोकेमिकल्स है। उसी समूह का जियो मोबाइल सेक्टर में है और रिलायंस रिटेल किराना से लेकर मॉल तक फैला है। FY2024-25 में रिलायंस रिटेल का सकल कारोबार 3,30,870 करोड़ रुपये रहा। 31 मार्च 2025 को उसके 19,340 स्टोर थे। जियो के मोबाइल उपभोक्ता मार्च 2025 के अंत में करीब 47 करोड़ थे। अब वही समूह सौर ऊर्जा, बैटरी और ग्रीन पावर से डेटा सेंटर चलाने की तैयारी कर रहा है।

अडानी का मजबूत आधार ऊर्जा, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, एयरपोर्ट, सीमेंट और ट्रांसमिशन में है। आवास में वह बड़े खिलाड़ियों में है।अडानी ग्रीन एजर्जी की परिचालन नवीकरणीय क्षमता FY2024-25 के अंत में 14,243 मेगावॉट यानी 14.2 गीगावॉट थी। कच्छ के खवड़ा में सौर और पवन का विस्तार नक्शा बदलने जितना बड़ा है। समूह का लक्ष्य 2030 तक नवीकरणीय क्षमता 50 गीगावॉट करने का है। यानी चार साल में तीन गुना से ज्यादा का लक्ष्य है।

नया मोर्चा डेटा सेंटर है। अडानीकनेक्स की शुरुआती योजना 1 गीगावॉट की थी। बाद में समूह ने इसे बहु-गीगावॉट रोडमैप तक बढ़ाया है, और 2035 तक अक्षय ऊर्जा से चलने वाले एआई डेटा सेंटरों में बड़े निवेश की बात कही है। रिलायंस अपने डिजिटल नेटवर्क, क्लाउड और एआई क्षमता के साथ इसी मैदान में उतरा है। सवाल अब सिर्फ तेल का नहीं रहा। सवाल यह भी है कि आगे बड़ा कौन होगा, ऊर्जा वाला या डेटा वाला।

मीडिया में भी दोनों मौजूद हैं। रिलायंस का जिओस्टार और नेटवर्क18 उपभोक्ता तक पहुँच रखते हैं। अडानी के पोर्टफोलियो में एनडीटीवी है। यह अभी खुली लड़ाई नहीं है, पर दोनों के पास आवाज का मंच है।

आम आदमी के लिए सवाल सीधा है। सस्ती बिजली और बेहतर सेवा आएगी, या सिर्फ दो और बड़े होंगे?

असली कहानी ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रा, उपभोक्ता बाजार और मीडिया में बदलती कारोबारी संरचना की है। जिन क्षेत्रों में दोनों का विस्तार हो रहा है, वहाँ आने वाले वर्षों में टकराव अधिक साफ दिखाई देगा।

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