मनोज अभिज्ञान-
एलन मस्क ने आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली भारतीय कारोबारी स्टारलिंक की भारत में एंट्री रोक रहे हैं ताकि टेलीकॉम मार्केट पर उनकी मोनोपली बनी रहे। हालांकि मस्क ने किसी कारोबारी या कंपनी का नाम नहीं लिया।
उधर समाजवादी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार धनराज नथवानी, जो रिलायंस समूह से जुड़े हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर उनके नेतृत्व, प्रतिबद्धता और राष्ट्र निर्माण की तारीफ कर रहे हैं।
अब बेचारे अंदर की खबर रखने वालों की हालत समझिए। उन्हें अंदर की ख़बर से पता था कि अंबानी और अडानी में युद्ध छिड़ चुका है, अंबानी मोदी सरकार से नाराज़ हैं और अब सरकार बदलने की तैयारी चल रही है। वैसे हो सकता है अगली अंदर की खबर यह आए कि यह तारीफ भी मास्टरप्लान है।
अब कॉमन सेंस की बात ये है कि मोदी से अंबानी नाराज़ होंगे तो मोदी बच्चे तो हैं नहीं कि उन्हें इसका पता नहीं चलेगा। ऐसे में स्टारलिंक को बुलाकर अंबानी का जिओ का बिज़नेस ही चौपट कर सकते हैं। लेकिन यहाँ तो एलन मस्क कुछ और ही कह रहे हैं! हालांकि मुझे पता है कि स्टारलिंक का आना निश्चित है और ये भी अनुमान है कि कब आने वाला है।
कारोबार की दुनिया में जिन्हें मैं जानता हूँ, उनकी रगों में कारोबार दौड़ता है, नाराज़गी नहीं। वह विवाह वाले घर के फूफा थोड़ी न हैं कि मुँह फुला कर बैठ जाएंगे। अंबानी के गलियारों में चलने वाली कई बातें मुझ तक हवा से पहले पहुँच जाती हैं। लेकिन अडानी साहब को भी कम मत समझिए, जिस तेजी से उन्होंने बंदरगाह से लेकर पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर तक अपनी जगह बनाई है, बंदे में दम तो है।
अब रही बात अंदर की खबर की कि अंबानी मोदी सरकार से नाराज़ होकर अडानी के साथ मिलकर सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिख रहे हैं, तो भाई, रिलायंस से जुड़े धनराज नथवानी तो मोदी जी की तारीफ करते दिखाई दे रहे हैं। अब हमारे अंदर की खबर रखने वाले मित्रों की समस्या यह है कि उनकी खबरें इतनी अंदर की होती हैं कि बाहर निकलते-निकलते उलटी पड़ जाती हैं! इसमें उनका कोई दोष नहीं है! हिंदी साहित्य में भक्ति काल को सामान्यतः 14वीं शताब्दी से 17वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध तक माना जाता है। लेकिन यह बात साहित्य के लिए है, राजनीति के लिए नहीं!
दुनिया के सबसे बड़े ऑलिगार्कों में एक इलोन मस्क भारत के ऑलिगार्कों को कोस रहे हैं. स्टारलिंक जैसा उपकरण भारत के लिए निश्चित ही उपयोगी हो सकता है, लेकिन इस उपकरण का जैसा इस्तेमाल जियो-पॉलिटिक्स स्वार्थों को साधने और कुछ देशों के भीतर उथल-पुथल मचाने के लिए किया गया है, उसे देखते हुए इसे भारत में लाना ख़तरनाक हो सकता है.
-प्रकाश के रे



