नई दिल्ली। भारत में निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों की संख्या 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 919 हो गई है। खास बात यह है कि छह साल पहले यानी 2019-20 में देश में 918 निजी सैटेलाइट टीवी चैनल थे। यानी छह साल में इनकी कुल संख्या में सिर्फ एक चैनल का इजाफा हुआ है। यह आंकड़ा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के 2025-26 के मीडिया एंड एंटरटेनमेंट सेक्टर संबंधी आंकड़ों में सामने आया है।
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में निजी सैटेलाइट चैनलों की संख्या 918 थी। इसके बाद संख्या में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2020-21 में यह घटकर 914 और 2021-22 में 898 रह गई। इसके बाद 2022-23 में 905, 2023-24 में 912 और 2024-25 में 908 चैनल दर्ज किए गए।
2025-26 में चैनलों की संख्या में 11 का इजाफा हुआ और यह आंकड़ा 919 तक पहुंच गया। मंत्रालय की उपलब्ध श्रृंखला में यह अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।
नए चैनलों की अनुमति, फिर भी कुल संख्या लगभग स्थिर
आंकड़ों का दिलचस्प पहलू यह है कि सरकार की ओर से नए टीवी चैनलों को अनुमति दिए जाने के बावजूद देश में सक्रिय/पंजीकृत निजी सैटेलाइट चैनलों की कुल संख्या में कोई बड़ी वृद्धि नहीं हुई।
पिछले छह वर्षों में सरकार ने 170 नए चैनलों को अनुमति दी, लेकिन इसी अवधि में कई पुराने चैनल बंद हुए या उनकी अनुमति समाप्त हुई। इसलिए नए चैनलों की संख्या जुड़ने के बावजूद कुल चैनल संख्या लगभग उसी स्तर पर बनी रही। इसे टीवी उद्योग में लगातार चल रहे बदलाव और चैनलों के बंद होने-जुड़ने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा सकता है।
छह साल का आंकड़ा
मंत्रालय के अनुसार निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों की संख्या इस तरह रही—
2019-20 — 918
2020-21 — 914
2021-22 — 898
2022-23 — 905
2023-24 — 912
2024-25 — 908
2025-26 — 919
इस तरह 2021-22 में चैनलों की संख्या छह साल के दौरान सबसे निचले स्तर यानी 898 तक पहुंच गई थी। इसके बाद इसमें धीरे-धीरे सुधार हुआ और 2025-26 में यह 919 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
टीवी न्यूज चैनलों की भी बड़ी संख्या
सरकार ने जुलाई 2024 में राज्यसभा में बताया था कि देश में 393 निजी सैटेलाइट न्यूज टीवी चैनलों को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से अनुमति मिली हुई थी। इसका मतलब है कि कुल निजी सैटेलाइट चैनलों में न्यूज चैनलों की हिस्सेदारी भी काफी महत्वपूर्ण है।
हालांकि, 919 का आंकड़ा केवल न्यूज चैनलों का नहीं है। इसमें विभिन्न भाषाओं और अलग-अलग श्रेणियों के निजी सैटेलाइट टीवी चैनल शामिल हैं।
टीवी चैनल उद्योग में क्या हो रहा है?
इन आंकड़ों से एक तस्वीर साफ होती है। भारत में टीवी चैनलों की संख्या में अब वैसी तेज वृद्धि नहीं हो रही जैसी एक समय दिखाई देती थी। नए चैनल शुरू हो रहे हैं, लेकिन साथ ही पुराने चैनल बंद भी हो रहे हैं या बाजार से बाहर हो रहे हैं।
इसका एक कारण दर्शकों का डिजिटल प्लेटफॉर्म, ओटीटी और सोशल मीडिया की ओर बढ़ता रुझान भी माना जा सकता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के मीडिया सेक्टर के आंकड़ों में भी टेलीविजन और डिजिटल मीडिया के बीच बदलते आर्थिक परिदृश्य की तस्वीर दिखाई देती है।
फिलहाल 919 निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के साथ भारत दुनिया के सबसे बड़े टीवी बाजारों में से एक बना हुआ है, लेकिन पिछले छह वर्षों में कुल चैनलों की संख्या में महज एक चैनल की शुद्ध बढ़ोतरी यह बताती है कि टीवी चैनलों का दौर अब संख्या बढ़ाने के बजाय प्रतिस्पर्धा, दर्शकों और कारोबार को बनाए रखने की चुनौती का दौर बन चुका है।

