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‘हिंदुस्थान समाचार’ न्यूज एजेंसी की हालत खराब, आरके सिन्हा कोपभवन में, रंजीत सिन्हा हुए अलग!

साल 1948 में स्थापित संवाद समिति “हिन्दुस्थान समाचार” कहने को तो सत्ता में बैठे लोगों की आँख का तारा है पर इसके मुलाजिम दाने-दाने को मोहताज हैं. इस समिति के चेयरमैन आर के सिन्हा (रविंद्र किशोर सिन्हा) ने तीन माह से किसी को वेतन नहीं दिया है। ये भी कहा जा रहा है कि देश में जितने ब्यूरो हैं उन्हें पैसा कमाने-खाने के लिए छोड़ दिया गया. इनसे उम्मीद की जा रही है कि ये संवाद समिति को भी पैसे दें और अपने अपने राज्य के स्टाफ के वेतन की व्यवस्था भी करें.

राम बहादुर राय इस संवाद समिति के सिर्फ नाम के समूह संपादक रह गए हैं. उनकी बात भी अब नहीं सुनी जा रही है. आरके सिन्हा ने डी 160, सेक्टर 63, नोएडा से धीरे-धीरे बोरिया बिस्तर समेटना शुरू कर दिया है. ग्राउंड फ्लोर, सेकंड फ्लोर, टाप फ्लोर (किचन, भोजन कक्ष) को खाली कर दिया गया है. अब सिर्फ एक फ्लोर से काम संचालित हो रहा है. सिन्हा दोबारा राज्यसभा में न जा पाने से कोपभवन में हैं. अपने किचन कैबिनेट और अपने करीबियों से गुस्से का इजहार कर चुके हैं.

ज्ञात हो कि वर्ष 2014 में बिहार के उद्योगपति आर के सिन्हा को आरएसएस ने अपनी इस संवाद समिति की बागडोर सौंपी थी. कहते तो यहाँ तक हैं कि संघ प्रमुख मोहन भागवत और भैया जी जोशी के कहने पर ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने आर के सिन्हा को राज्यसभा पहुँचाया था. हुमायूं रोड में मनमाफिक कोठी अलाट कराई. तब आर के सिन्हा कहा करते थे कि “हिन्दुस्थान समाचार” भारत की ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी संवाद समिति होगी. चपरासी से लेकर संपादक तक उसका परिवार है. कभी धन की कमी नहीं आएगी.

इस दौरान अनाप शनाप पैसा भी खर्च किया. “हिन्दुस्थान समाचार” को समूह बनाकर उस पर देश प्राण, यथावत, युगवार्ता, नवोत्थान, वार्षिकी, भोजपुरी पत्रिका (पत्र-पत्रिकाएं), यू ट्यूब चैनल एचएस न्यूज थोप दिए गए.

कारवां बढ़ता रहा. आर के सिन्हा तबियत से तिजोरी लुटाते रहे. सत्ता के गलियारों की चकाचौंध का नशा इस कदर तारी हुआ कि लोकसभा चुनाव में पटना से टिकट मांग बैठे. कायस्थ समाज के अपने जेबी संगठनों से आंदोलन कराया. मगर वहाँ से टिकट रविशंकर प्रसाद को मिला.

रविशंकर प्रसाद और सिन्हा के बीच छत्तीस का आंकड़ा है. कहा तो यहाँ तक गया कि सिन्हा ने प्रसाद को हराने के लिए सारे घोड़े खोल दिए. रविशंकर प्रसाद कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं. इसका नतीजा यह हुआ कि आर के सिन्हा को भाजपा ने राज्यसभा में दोबारा नहीं भेजा. जबकि वह तिजोरी खोलकर बैठे थे. अब वह फिर मोलतोल कर रहे हैं.

इस बीच चर्चा है कि बहुभाषी संवाद समिति “हिन्दुस्थान समाचार” से चेयरमैन आर के सिन्हा का चहेता रंजीत सिन्हा खुद ही अलग हो गए हैं. सिन्हा की नाक का बाल समझे जाने वाले रंजीत ने आनलाइन मीटिंग में अपने त्यागपत्र देने की घोषणा कर सबको चौंका दिया. इस मीटिंग में आर के सिन्हा भी अमूनन होते हैं. मगर वह नहीं शामिल हुए.

रंजीत सिन्हा ही चेयरमैन के ट्वीट या यूँ कहें कि सोशल मीडिया को संचालित करते रहे हैं. वह आर के सिन्हा के साथ राज्यसभा भी जाते रहे हैं. पूर्व राज्यसभा सदस्य आर के सिन्हा के साथ रंजीत छाया की तरह रहे. हालांकि यह बात उनके पुराने चहेतों को खलती रही है.

पत्रकार गोपाल गोयल की रिपोर्ट.

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