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पत्रकारों के मौजूदा हालात और भविष्य की रणनीति को लेकर इस जर्नलिस्ट यूनियन की बैठक में हुई चर्चा

श्रमजीवी पत्रकार यूनियन उत्तर प्रदेश की बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक का नेतृत्व महासचिव शिव प्रकाश गौर ने किया. इस बैठक में पत्रकार के मौजूदा स्थिति और भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. जिसमें पत्रकारों के स्वास्थ्य पर ध्यान, पत्रकारों का रोजगार, नौकरी के बाद जीवन सुरक्षा, पेंशन, पत्रकारों और परिवार के लिए चिकित्सा देखभाल आदि मुद्दा शामिल था. इस दौरान शिव प्रकाश गौर (जनरल सेक्रेटरी, श्रमजीवी पत्रकार यूनियन उत्तर प्रदेश), गीतार्थ पाठक (अध्यक्ष,- इंडियन जौर्नालिस्ट यूनियन) सबीना इंद्रजीत (जनरल सेक्रेटरी, इंडियन जौर्नालिस्ट यूनियन और वाईस प्रेसीडेंट, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ जौर्नालिस्ट) आदि मौजूद थे.

इन मुद्दों पर हुई चर्चा –

पत्रकारों के स्वास्थ्य पर ध्यान –
पत्रकारों के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर बहस और उनका समाधान जरूरी है. विभिन्न स्तरों पर मीडियाकर्मियों को कई प्रकार के मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ता है। इस पर भी मीडिया संस्थानों को ध्यान देना चाहिए। विशेष कर कोविड जैसी विषम परिस्थितियों में तनाव के स्तर और अवसाद के संकेतों की पहचान की जानी चाहिए और उनके लिए आवश्यक चिकित्सा सलाह का प्रबंद किया जाना चाहिए। श्रमजीवी पत्रकार यूनियन उत्तर प्रदेश की बैठक में पत्रकारों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान सत्र में इस बात को रेखांकित किया गया। साथ ही मिडियाकर्मियों को केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना का भी लाभ मिल सके इसपर बात हुई।

डिजिटल पत्रकारों की मान्यता और सिफारिश –
कुछ समय पहले सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार निकट भविष्य में डिजिटल करेंट अफेयर्स और समाचार मीडिया संस्थाओं को अन्य पारंपरिक मीडिया संस्थानों की तरह ही लाभ प्रदान करने पर विचार कर रही है. इन लाभों के तहत डिजिटल मीडिया संस्थानों के पत्रकारों, कैमरामैन और वीडियोग्राफरों को पीआईबी मान्यता प्रदान की जाएगी, जिससे उन पत्रकारों और अन्य मिडियाकर्मियों को सरकार से अधिक विश्वसनीय सूचना प्राप्त करने और आधिकारिक कार्यक्रमों जैसे- प्रेस कॉन्फ्रेंस आदि में हिस्सा लेने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में स्व-विनियमन निकायों की तरह ही डिजिटल मीडिया की इकाइयाँ भी अपने हितों को आगे बढ़ाने और सरकार के साथ बातचीत के लिये स्वयं-विनियमन निकाय बना सकती हैं। बैठक में इस मुद्दों पर गंभीर रूप से चर्चा की गई.

पत्रकारों को रोजगार –
ये सुनिश्चित करना बहुत जरुरी है कि पत्रकारों को रोजगार का लाभ मिले. कई परिवार में पत्रकार इकलौते कमाने वाले होते है. जिससे उनका पूरा परिवार निर्भर रहता है।

पत्रकारों को नौकरी के बाद जीवन सुरक्षा, पेंशन –
पत्रकार का काम सरल नहीं होता. कई बार लोग पूरा जीवन इस पर न्योछावर कर देते है। लेकिन इस प्रोफेशन में कम वेतन की वजह से कई बार वह खुद की भी देख देखभाल नहीं कर पाते। इसलिए पत्रकार के नौकरी के बाद उनका जीवन सुरक्षा व पेंशन को लेकर सही कदम उठाये जाने की जरुरत है.

पत्रकारों और परिवार के लिए चिकित्सा देखभाल –
पत्रकार की तरह उनके परिवार वालों पर भी हमे ध्यान देने की जरुरत है. कई बार पैसे की कमी के कारण चिकित्सा लाभ नहीं मिल पता है. इससे किस तरह दूर किया जाये. इस बारे में हम सकारात्मक कदम उठाने होंगे.

प्रेस काउंसिल के जरिए यूपी सरकार को ज्ञापन –
प्रेस काउंसिल के जरिए अब उत्तर प्रदेश सरकार को भी ज्ञापन सौपा जायेगा. राज्य सरकार को पत्रकार के मौजूदा हालात और भविष्य की जरुरी चीज़ों पर ध्यान केंद्रित करवाना है.

व्हाट्सएप ग्रुप –
सटीक और महत्पूर्ण जानकारी के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बेहद जरुरी है. आज के दौर में सोशल मीडिया को एक बड़े हथियार के रूप में देखा जा रहा है.

जेंडर काउंसिल –
जेंडर काउंसिल का लक्ष्य महिला सशक्तिकरण हासिल करना है. इस क्षेत्र में महिलाओं और पुरुषों के बीच की खाई को हटाना और महिलाओं को आगे बढ़ाना शामिल है.

श्रमजीवी पत्रकार यूनियन उत्तर प्रदेश द्वारा सदस्यों का चिकित्सा बीमा –
श्रमजीवी पत्रकार यूनियन उत्तर प्रदेश द्वारा सदस्यों का चिकित्सा बीमा होना बहुत जरुरी है. इससे पत्रकार की सुरक्षा और पुख्ता हो जाता है. सड़क हादसा या कोई बड़ा बीमारी में इस बीमा का लाभ पत्रकार को मिले.

इसके अलावा पत्रकारों के चिकित्सा व्यय के लिए कोष निधि, पत्रकारों की आपात स्थिति में सदस्यों को शामिल होना चाहिए, पत्रकारों द्वारा पत्रकारों के लिए कॉर्पस, स्थानीय अध्यक्षों द्वारा सदस्यों का सत्यापन, नए सत्र में सभी सदस्यों का पुलिस सत्यापन, जिला स्तर पर मीडिया में महिला समावेशन जागरूकता, स्थानीय संपर्कों को जिलेवार साझा किया जाना है, सदस्य डेटाबेस प्रकाशित किए जाने हैं और उद्देश्य को बनाए रखने के लिए नियंत्रित व्हाट्सएप मैसेजिंग के मुद्दों पर चर्चा की गयी.

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2 Comments

2 Comments

  1. Vimal Kothari

    October 14, 2022 at 7:15 pm

    सर, रेलवे की ओर से पत्रकारों को दी जाने वाली रियायत को फिर शुरू कराए जाने पर भी विचार करें। रेलवे एक तरफ तो अपने कर्मचारियों को 78 दिन का वेतन बोनस के रूप में दे रहा है, दूसरी ओर पत्रकारों को दी जाने वाली मामूली सी छूट पर खाली खजाने व कोरोना महामारी का रोना रो रहा है।

  2. Izhaar Ahmed Ansari

    October 17, 2022 at 9:20 am

    उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार ंं यूनिय कहां है इसके पदाधिकारी कौन हैं कुछ पता नहीं चलता जब तक एक यूनियन थी और एक एसोसिएशन थी तो यू पी डब्ल्यू जे और ए जे यू तो कोई किसी भी पाले में क्यों ना हो लेकिन पत्रकारों की हनक थी एक दूसरे का सहयोग करके दोनों पत्रकारों के काम आती थी आज जरूरत है यह दर्जनों मिलते-जुलते नामों की यूनियनों का बहिष्कार हो और दो कदीम यूनियनों का पुनर्गठन हो तभी पत्रकारों की बधाई संभव है

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