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उत्तर प्रदेश

कानपुर जेल में सक्रिय अखिलेश दुबे सिंडिकेट, अंदर ही रची जा रही बड़ी साजिश

जिला कारागार में बंद अखिलेश दुबे भले ही ट्रांसफर की सुगबुगाहट के बीच बैरक नंबर-1 में हो, मगर उस का सिंडिकेट जेल के भीतर भी सक्रिय है। सूत्रों के मुताबिक करीब 18 सदस्य अलग-अलग बैरकों में रहते हुए भी जेल अस्पताल में जुटकर दुश्मनों और गद्दारों के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह “पंचायत” घंटों चलती है और जमानत से पहले ही विरोधियों को सबक सिखाने की साजिश रची जा रही है…

कानपुर। दीनू उपाध्याय को सोनभद्र जेल भेजे जाने के बावजूद, कानपुर जिला कारागार में अखिलेश दुबे सिंडिकेट का दबदबा कायम है। पुख्ता सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल करीब 18 ऐसे चेहरे जेल में मौजूद हैं जो सीधे या परोक्ष रूप से दुबे सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं। बताया जा रहा है कि जेल अस्पताल में बाकायदा बैठकों के जरिए दुश्मनों और गद्दारों को सबक सिखाने की योजना बनाई जा रही है। खास बात यह है कि यह साजिश जमानत से पहले ही अंजाम देने की तैयारी में है, ताकि खाकी को कार्रवाई से पहले कई बार सोचना पड़े।

जेल अस्पताल बना साजिश का अड्डा

सूत्रों का दावा है कि बंदीरक्षकों की मेहरबानी से कई आरोपी रोज बीमारी का बहाना बनाकर जेल अस्पताल पहुंच जाते हैं। यहां दुश्मनों को निबटाने की स्क्रिप्ट तैयार होती है। पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह लीवर सिरोसिस के चलते अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि अखिलेश दुबे को स्वास्थ्य कारणों से बैरक नंबर-1 में रखा गया है। उनके करीबियों में लवी मिश्रा भी इसी बैरक में मौजूद है। सिंडिकेट के अन्य सदस्य अलग-अलग बैरकों से रोज अस्पताल में जुटते हैं।

क्षेत्राधिकारी को मिली जिम्मेदारी

भास्कर डिजिटल की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, खबर यह भी है कि दुबे दरबार के लिए सबसे बड़ी चिंता एफआईआर नहीं, बल्कि खुफिया जानकारियों के लीक होने की है। नैनीताल-भीमताल से लेकर बिठूर-मालरोड तक की संपत्तियों की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने वाले पूर्व शागिर्द को सबक सिखाने के लिए एक क्षेत्राधिकारी को जिम्मेदारी सौंपने की चर्चा है। वहीं, मुलाकातियों और बाहर निकलने वाले चेलों के जरिए शूटर्स तक संदेश पहुंचाए जा रहे हैं।

जेल से बाहर सक्रिय शूटर

नई सड़क का अयाज टायसन, जाजमऊ का तनवीर बादशाह, चांद कुरैशी, हैदर, पिंकू माली और नवाबगंज का ढाबा गिरोह – सभी दुबे सिंडिकेट से जुड़े शूटर्स माने जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि ये लोग मौके मिलते ही वारदात को अंजाम दे सकते हैं।

कानून के शिकंजे से अब तक नवाबगंज के चर्चित पिता-पुत्र गैंगस्टर बचे हुए हैं।

ट्रांसफर की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था

जेल में गहराती साजिश की भनक लगते ही कमिश्नरेट पुलिस ने अखिलेश दुबे को प्रदेश के किसी दूरस्थ कारागार में शिफ्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी बीच, दुबे के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले भाजपा नेता रवि सतीजा और अश्लील साहित्य प्रकरण की पीड़िता प्रज्ञा त्रिवेदी को पुलिस ने सुरक्षा मुहैया कराई है। हालांकि, मनोहर शुक्ला और आरटीआई कार्यकर्ता सौरभ भदौरिया अब भी सुरक्षा की राह देख रहे हैं।

जेल में बंद सिंडिकेट सदस्य

अखिलेश दुबे, शैलेंद्र उर्फ टोनू यादव, लवी मिश्रा, संजय उपाध्याय, मनु उपाध्याय, रामखिलावन, रामभरोसे, नारायण सिंह भदौरिया, अनूप शुक्ला, विपिन गुप्ता, अरिदमन सिंह, दीपक जादौन, विकास सिंह उर्फ विक्की ठाकुर, गोपाल सिंह चौहान, शाहिद पिच्चा, युसूफ चटनी, सनी मौरंग और जीशान मौरंग।

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