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उत्तर प्रदेश

अखिलेश दुबे के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर अमर उजाला का सवाल, पत्रकार का खुलासा – कमिश्नरेट पुलिस तक विषकन्याओं का जाल

जमानत याचिका खारिज

कानपुर। एबीसी न्यूज़ चैनल का मालिक और अधिवक्ता अखिलेश दुबे को लेकर नित नए राज उजागर हो रहे हैं। हाल ही में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए पत्रकार विपिन गुप्ता ने एक के बाद एक कई रहस्यों से पर्दा उठाया है। गुप्ता ने पुलिस को बताया कि वह अनजान नंबर से “ब्रह्मास्त्र” नामक व्हाट्सएप ग्रुप चलाता था, जिसके जरिए वह दुबे के विरोधियों को बदनाम करता था। साथ ही अमीर घरानों के बच्चों को सिगरेट शराब पीते तस्वीरें खींचकर ब्लैकमेल भी करता था।

इतना ही नहीं गुप्ता ने यह बताया है कि दुबे की टीम में शामिल एक युवती के कमिश्नरेट में तैनात एक सिपाही से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इस बात की शिकायत सिपाही की पत्नी ने पुलिस से की थी।

उधर हिंदी पट्टी के बड़े अख़बार अमर उजाला ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। दुबे और उसके साथियों पर शिकंजा कसने में पुलिस की भूमिका को लेकर अमर उजाला ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि दुबे के खिलाफ 25 से ज्यादा शिकायतें आ चुकी हैं, लेकिन एफआईआर सिर्फ 9 पर ही दर्ज की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 दिन पहले अखिलेश दुबे का मामला सुर्खियों में आया, लेकिन अभी तक पुलिस की कार्रवाई ढीली-ढाली ही नजर आ रही है। यही नहीं, अखिलेश के रसूखात और दबाव को लेकर भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

अखबार ने यह भी रेखांकित किया कि भाजपा नेता से जुड़े गैंगस्टर मामलों में जहां तेजी से कार्रवाई होती है, वहीं अखिलेश दुबे पर कानून की धाराएं शिथिल होती दिख रही हैं। पुलिस ने अभी तक 30 से ज्यादा संपत्तियों की पहचान की है, लेकिन कब्जा और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

रिपोर्ट में पुलिस के कामकाज पर तंज कसते हुए कहा गया है कि “क्या पुलिस की यह सुस्ती है या सोची-समझी चाल?”

“वही क़ातिल वही मुंसिफ़ अदालत उस की वो शाहिद बहुत से फ़ैसलों में अब तरफ़-दारी भी होती है”…कानपुर के नामी वकील अखिलेश दुबे की जमानत याचिका ख़ारिज – ममता त्रिपाठी

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