क्रांति कुमार-
अभिनव पांडेय के एक सवाल पर मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह कहते हैं, मर्डर दुनिया में कोई सरकार नहीं रोक पाती है. आप पत्रकार हैं, अभी हम आपका मर्डर कर दें तो सरकार का कर लेगी.
अभिनव पांडेय हाथ जोड़कर खिखिया के हंसते हुए कहता है, आप तो छोटे सरकार है, आपके सामने सरकार क्या लेगी. अनंत सिंह के इस बयान को सोशल मीडिया पर सवर्ण जाति के पत्रकार, महिमामंडित कर रहे हैं.
किसी ने भी अनंत सिंह के इस बयान की आलोचना नहीं की. अनंत सिंह का यह बयान बताता है कुछ लोगों में कानून और संविधान का डर नहीं है.
अगर यही बयान किसी अब्दुल अंसारी या अनंत यादव या अनंत जाटव या मौर्य पटेल कुशवाहा ने दिया होता तो मीडिया भूचाल मचा देता. सवाल यह भी इस आदमी को मीडिया इतना तवज्जो क्यों देता है, मैं जानता हूँ लेकिन कल बताऊंगा.
शीतल पी सिंह-
बिहार और देश : कोई पिछड़ा मुसलमान दलित आदिवासी यदि अपराधी हो तो हमारा विमर्श जिसे सवर्ण मीडिया और सवर्ण प्रशासन रचता रंगता है उसकी बखिया उधेड़ देता है और अधिकतर मामलों में ऐसे अपराधियों को जीवनहीन कर देने के बावजूद उन्हें कोसा जाता रहता है ! उनके परिजनों तक का पीछा किया जाता है और वे सदा अभिशप्त बने रहते हैं ।
लेकिन सवर्ण हिंदू समुदाय के अपराधियों को यही विमर्श celebrate करता हुआ मिलता है । इन्हें बाहुबली की सम्मानजनक संज्ञा दी जाती है जबकि उन्हें माफिया कहा जाता है । मीडिया सोशल मीडिया जो जंगलराज की स्मृतियों पर आज बाइस बरस बाद भी बिलखता रहता है वह इस अनपढ़ और क्रूर अपराधी को स्टार बनाये हुए है!
मिलिये अनंत कुमार सिंह, जिन्हें ‘छोटे सरकार’ के नाम से जाना जाता है, बिहार के मोकामा क्षेत्र के भूमिहार जाति के प्रमुख बाहुबली नेता हैं। वे कई बार के विधायक हैं और RJD तथा JDU से जुड़े रहे हैं।
उनका आपराधिक रिकॉर्ड चार दशकों से ज़्यादा पुराना है, जिसमें हत्या, अपहरण, रंगदारी, बलात्कार, डकैती जैसे अनेक संगीन अपराध शामिल हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले दायर हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ कुल 52 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से कुछ में बरी भी हो चुके हैं।
प्रमुख अपराधों की फ़ेहरिस्त
- 1979 (आयु: लगभग 9 वर्ष): मोकामा क्षेत्र में अन्य लोगों के साथ हत्या का पहला मामला दर्ज। यह उनका प्रारंभिक आपराधिक रिकॉर्ड था, जो पारिवारिक रंजिश से जुड़ा था। उनके भाई बिरंची सिंह की हत्या के बाद वे अपराध की दुनिया में सक्रिय हुए।
- 1980-1990 के दशक: पारिवारिक और जातीय रंजिशों (भूमिहार-राजपूत संघर्ष) के कारण हत्या, अपहरण और रंगदारी के कई मामले। कुल 39 मामले (हत्या की कोशिश के 11, जान से मारने की धमकी के 9) बाढ़ थाने समेत विभिन्न थानों में दर्ज।
- 2004: बिहार STF ने मोकामा स्थित उनके आवास पर छापेमारी की, जहां से खतरनाक अवैध हथियारों का ज़ख़ीरा मिला ।
- 2019 (जुलाई-अगस्त): उनके बराविमोड़ स्थित फार्महाउस पर छापेमारी में AK-47 राइफल, मैगजीन, हैंड ग्रेनेड और अन्य विस्फोटक बरामद हुए । आर्म्स एक्ट और UAPA (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत गिरफ्तारी। दिल्ली की साकेत कोर्ट में उन्होंने सरेंडर किया। 23 अगस्त 2019 से न्यायिक हिरासत में रहे ।
- 2020: हलफनामे में 52 मामले का खुलासा। इनमें कत्ल, डकैती, अपहरण, रेप, फिरौती जैसे अपराध शामिल। एक मामले में दुष्कर्म के आरोप लगे, तो उन्होंने एक पत्रकार को पीटा।
- 2022 (जून): AK-47 और ग्रेनेड मामले में विशेष MP-MLA कोर्ट ने 10 वर्ष की सजा सुनाई । वे पटना की बेऊर जेल में बंद रहे।
- 2024 (मई): लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए 15 दिनों की पैरोल पर रिहा, जहां JDU के ललन सिंह के लिए प्रचार किया।
- 2024 (अगस्त): पटना हाईकोर्ट ने AK-47 मामले में बरी कर दिया, जिसके बाद जेल से स्थायी रिहाई।
- 2025 (जनवरी): मोकामा के नौरंगा जलालपुर में सोनू-मोनू गैंग और उनके बीच गोलीबारी हुई । इस घटना में वे भी अभियुक्त बने ।



Ganesh
October 28, 2025 at 10:12 pm
पत्रकार जी!
इसमें आप स्वर्ण, अवर्ण दलित का पुट देने में क्यों तुले हैं?
क्या दिवंगत शहाबुद्दीन के पुत्र ओसामा,सुरजभान से भी इस तरह के बेबाक प्रश्न करने की किसी पत्रकार में हिम्मत भी है क्या?
अगर है,तो कहीं भी इसी कोटि का कहीं कोई विवरण तो उपलब्ध कराएं!
अन्यथा ऐसी बकवास बंद करें।