सुजीत सिंह प्रिंस-
कभी ट्विटर कहलाने वाला एक्स आज अवनीश अवस्थी को ट्रेंड कर रहा। मामला जब पता किया गया तो टोंटी चोरी का फ़र्ज़ी जुमला प्लांट करने वाले पूर्व आईएएस अवनीश अवस्थी पर सपा मुखिया अखिलेश यादव की नाराज़गी सामने आई है जिसके बाद अवनीश अवस्थी जी ट्रेंड करने लगे। अखिलेश यादव पहले भी कह चुके हैं कि अवनीश अवस्थी को छोड़ूँगा नहीं, आज दुबारा बोल दिए हैं। सवाल उठता है कि कौन हैं अवनीश अवस्थी। क्या क्या काम और कारनामे किए हैं उन्होंने।


उस IAS को मैं छोडूंगा नहीं…
अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे खास IAS अधिकारी अवनीश अवस्थी को सीधी चेतावनी दी है और कहा कि उसे कभी माफ नहीं करूंगा।
दिल्ली और लखनऊ के बीच दूरी बढ़ने की चर्चाओं के पीछे भी बहुत से लोग इन्हीं अवनीश अवस्थी का हाथ मानते हैं. उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए गोरखपुर और कानपुर के कई जनप्रतिनिधियों ने अपने अपने स्तर पर आपत्ति भी जताई!
कौन हैं अवनीश अवस्थी, जिन पर अखिलेश यादव ने लगाया बदनाम करने की साज़िश का आरोप?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी के पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अवनीश अवस्थी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अखिलेश का कहना है कि अवस्थी के जरिए उन्हें बदनाम करने की साज़िश रची जा रही है। लेकिन सवाल उठता है—आख़िर कौन हैं अवनीश अवस्थी और क्यों उनका नाम बार-बार विवादों में घिरता रहा है?
1987 बैच के आईएएस रहे अवनीश अवस्थी योगी आदित्यनाथ सरकार में वर्षों तक सबसे ताक़तवर नौकरशाहों में गिने जाते रहे। गृह, सूचना, पर्यटन, संस्कृति, धर्मार्थ कार्य, सीईओ यूपीडा और उपसा जैसे कई अहम विभाग उनके पास रहे। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाया गया।
विवादों और आरोपों से भरा करियर
अवनीश अवस्थी पर सत्ता से निकटता का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और सौदेबाज़ी करने के आरोप लगते रहे हैं।
पावर कॉरपोरेशन मामला: तैनाती के दौरान एक बिजली कंपनी से उनकी महिला रिश्तेदार के खाते में करोड़ों की रकम आने की चर्चा रही।
नैनीताल कोठी कांड: नैनीताल स्थित एक कोठी से 50 करोड़ की चोरी का मामला आज तक अनसुलझा है। इसमें भी अवस्थी का नाम जोड़ा गया।
पत्नी मालिनी अवस्थी को भुगतान: अवस्थी जब पर्यटन और संस्कृति विभाग के प्रमुख थे, उसी दौरान लोकगायिका पत्नी मालिनी अवस्थी को यूपी सरकार और जिलों के सरकारी खज़ानों से करोड़ों रुपये दिए गए। सवाल यह भी है कि उनके स्तर के अन्य कलाकारों को उतना भुगतान क्यों नहीं मिला।
मेगा प्रोजेक्ट्स में गड़बड़ियों के आरोप
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे: 535 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे। शिकायत प्रधानमंत्री तक पहुँची। इसमें 10.4 करोड़ रुपये का अनुचित भुगतान और 438.8 करोड़ रुपये की संदिग्ध अदायगी शामिल है।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे: डीपीआर से लेकर निर्माण तक गड़बड़ियों का ठीकरा अवस्थी पर फोड़ा गया।
फिल्म सिटी प्रोजेक्ट: योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट निजी स्वार्थों के चलते ठप हो गया। कहा जाता है कि अवस्थी की अतिरिक्त “मांगों की लिस्ट” ने फिल्म निर्माताओं को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
हाथरस कांड: प्रशासनिक विफलता की वजह से सूचना विभाग से हटाए गए।
इतने गंभीर आरोपों और विवादों के बावजूद अवनीश अवस्थी सत्ता के बेहद करीबी बने रहे। यही वजह है कि अब जनता पूछ रही है—क्या सत्ता के नज़दीक होना भ्रष्टाचार का लाइसेंस है?




NDTV का एक पूर्व कर्मचारी
September 8, 2025 at 5:15 am
NDTV का काला सच पार्ट 1: संतोष कुमार, संजय पुगलिया और पूर्वा मिश्रा ने गर्त में धकेला चैनल
यह खबरें आ रही हैं कि एनडीटीवी में कई बड़े दिग्गज आए और कई बड़े दिग्गज पत्रकारों ने एनडीटीवी को अलविदा कह दिया। सच यह है कि एनडीटीवी में ऐसे हालात पैदा कर दिए गए हैं कि मजबूर होकर लोग धड़ाधड़ इस्तीफा दे रहे हैं।
NDTV में राहुल कंवल के आने से पहले से ही यह हालत पैदा किए गए। सिर्फ एक व्यक्ति की व्यक्तिगत टीम ने पूरे संस्थान को बीते डेढ़ दो साल में गर्त में धकेल दिया। वह व्यक्ति है NDTV में सीनियर मैनेजिंग एडिटर संतोष कुमार, जिसने टीआरपी लाने के नाम पर ऐसे-ऐसे लोगों की भर्तियां कीं, जिनकी पत्रकारिता जगत में कोई खास पहचान तक नहीं है और ना ही वह टीआरपी के मास्टर हैं। करीब 10 से 15 लोगों को एनडीटीवी इंडिया में डेस्क पर संतोष कुमार लेकर आए, लेकिन यह सभी लोग मिलकर भी टीआरपी बटोरने में पूरी तरह फेल हो गए। टीआरपी के बड़े खिलाड़ी के रूप में Zee News से हटाए गए नीरज पांडे, Abp News से बाहर किये गए विचित्र सिंह राठौड़, आज तक से मनीष कपूर को लाया गया। रणविजय, विजय शर्मा, इकबाल फारुकी, सरोज साहित कई लोगों को लाया गया। TV9 से कमलेश तिवारी, आशीष गर्ग समेत आशुतोष और पल्लवी नाम की प्रोड्यूसर को संतोष कुमार लेकर आए। नई टीम दिन भर चीख-चिल्लाकर अपने अपनी प्रतिभा साबित करती है और NDTV की पुरानी टीम को निकम्मा बताती रहती है। यह सब मिलकर TRP लिस्ट में एनडीटीवी को पहले 5 चैनल में शामिल करेंगे, यही दावा किया गया था, लेकिन ये सभी नए कर्मचारी फिसड्डी साबित हुए। NDTV के कई कर्मचारी कहते हैं कि संतोष कुमार ने न्यूज़ रूम में ऐसे हालात पैदा कर दिए कि सभी पुराने कर्मचारी दहशत में आ गए और उन्हें बार-बार ये अहसास कराया जाता कि उन्हें कुछ नहीं आता है, यह भी ढिंढोरा पीटा जा रहा कि नई टीम सब कुछ जानती है और टीआरपी नंबर लाने में चैंपियन है, जो गलत साबित हुआ। संतोष कुमार और उनकी नई टीम के लोग बाकी चैनलों का आईडिया और नाम चुराकर भी NDTV की TRP नहीं बढ़ा पाये, मगर NDTV को मछली बाजार बना दिया। चैनल 12 नंबर से 11 नंबर पर भी नहीं आ पाया। इधर संतोष कुमार पुराने लोगों को चैनल छोड़ने पर मजबूर करते रहे। संतोष कुमार कई राज्य सरकारों का और केंद्र सरकार का खुलेआम एजेंडा चलाते रहे। सूत्रों के अनुसार संतोष कुमार ने अपने गृह राज्य झारखंड के अलावा बिहार दिल्ली की केजरीवाल सरकार, पंजाब, हिमाचल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरकार से साठगांठ कर भारी अवैध कमाई की है। एनडीटीवी के अंदर इसकी भी बहुत चर्चा है कि संतोष कुमार ने हाल में नोएडा की बड़ी सोसाइटी में एक आलीशान डुप्लेक्स कोठी ली है और फार्म हाउस के लिए हापुड़ के पिलखुआ में जमीन का बड़ा प्लॉट भी खरीद रहे हैं, जिसके लिए एक कर्मचारी पर बहुत दबाव भी बनाया हुआ है। संतोष कुमार ने हाल में एक लग्जरी गाड़ी भी खरीदी है, जिसके बाद से संतोष कुमार के इतने तेज आर्थिक विकास को लेकर कानाफूसी हो रही है। एनडीटीवी का नाम बेचकर भ्रष्टाचार, जमकर अवैध कमाई और 100 से अधिक कर्मचारियों को निकालने की साजिश संतोष कुमार ने की और मालामाल होता रहा, मगर अडानी कंपनी सब जानकर भी चुप है। संतोष कुमार ना तो किसी टीवी चैनल में बड़ी भूमिका में रहे और ना ही उन्हें बाजार और टीआरपी का कोई अनुभव है, फिर भी उन्हें अडानी ग्रुप के एनडीटीवी हिंदी चैनल और डिजिटल विंग का हेड बनाया गया। वह पुराने कर्मचारियों से बदतमीजी करते रहे और जब सालाना अप्रेजल किया तो पुराने कर्मचारियों को उन्होंने इतना हतोत्साहित किया कि पुराने कर्मचारी एनडीटीवी छोड़ने पर मजबूर हो गए। सूत्रों के अनुसार केवल डेस्क से कम से कम 8 से 10 पुराने कर्मचारियों ने एनडीटीवी छोड़ा और इसकी कानों कान किसी को भनक तक नहीं लगी। एनडीटीवी छोड़ने के लिये बाध्य करने के काम में संतोष कुमार का एचआर हेड पूर्वा मिश्रा ने भी भरपूर साथ दिया है। दो महीने तक अप्रेजल में सुधार के नाम पर संतोष कुमार और पूर्वा मिश्रा कर्मचारियों को बरगलाते रहे और अंततः उन्हें इस्तीफा देकर संस्थान छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। हद तो यह हो गई की कुछ कर्मचारियों को एक्सटेंशन देने के नाम पर दोबारा ज्वाइन कराया गया, मगर नियुक्ति पत्र देने के समय अमानवीय तरीके से इनकी नौकरी छीन ली गई। राहुल कंवल के एनडीटीवी में आने के बाद भी संतोष कुमार की टीम की अंधेरगर्दी नहीं रुकी। संतोष कुमार संजय पुगलिया और पूर्वा मिश्रा मिलकर पुराने कर्मचारियों की नौकरी छीनने का घिनौना खेल करते रहे। राहुल कंवल भी आंख मूंद कर यह सब कुछ देखते रहे। अब एनडीटीवी के नाम पर कादंबिनी शर्मा और उमाशंकर सिंह जैसे बड़े पत्रकारों को भी किसी मीडिया संस्थान में नौकरी नहीं मिल रही है। जिसके चलते वह लोग अपना यूट्यूब चैनल खोलने पर मजबूर हुए।
इससे पहले मिहिर गौतम भी यूट्यूब चैनल खोल चुके हैं। मिहिर गौतम को एक गंभीर बीमारी हो गई, मगर संतोष कुमार को दया नहीं आई। मिहिर गौतम बीमारी को लेकर 6-8 महीने संघर्ष करते रहे और बाद में उन्हें भी संस्थान छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया। रसिक मिजाज संतोष कुमार और पूर्वा मिश्रा ने मिलकर NDTV और वहां के पुराने कर्मचारियों का जीवन बर्बाद कर दिया मगर अपना आर्थिक विकास करते रहे। यही अभी एनडीटीवी की सच्चाई है। यह तो केवल एक झांकी है, पूरी पिक्चर अभी बाकी है।