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बीबीसी हिन्दी से प्रवीण कुमार और दीपक कुमार का इस्तीफ़ा, पढ़ें प्रवीण का आख़िरी पत्र

Woman hangs a 'Collective Newsroom' sign over a red 'BBC INDIA' panel on a beige brick wall, indicating a media collaboration or branding event.

बीबीसी हिन्दी और कलेक्टिव न्यूज़रूम में त्यागपत्रों का सिलसिला थम नहीं रहा है। एबीपी न्यूज़ में पहले काम कर चुके और इन दिनों बीबीसी में कार्यरत प्रवीण कुमार ने कुछ दिन पहले रात को अपनी शिफ्ट ख़त्म की और मध्यरात्रि टीम ग्रुप में अपना त्यागपत्र भेज दिया।

दूसरा बड़ा त्यागपत्र प्लानिंग टीम के दीपक कुमार का है जिन्होंने सीएनआर- बीबीसी छोड़ने का निर्णय ले लिया और मैनेजमेंट व अपनी टीम को बता दिया है।

प्रवीण कुमार द्वारा भेजा गया आख़िरी पत्र पढ़ें-

मैं नौकरी छोड़ रहा हूं. मेरे इस मैसेज को ही मेरा इस्तीफा समझ लिया जाए. 

मैं जानता हूं कि ये एक अनप्रोफेनल तरीका है, नौकरी को छोड़ने का. लेकिन आज ही मैंने तय कर लिया था कि अब मैं अपने मन के साथ और जबरदस्ती करके दोबारा ऑफिस नहीं आऊंगा. 

मैं कभी नौकरी करना ही नहीं चाहता था. बस व्यवस्था के चक्कर में फंस कर मैंने 10 साल अपने मन को मारते हुए नौकरी कर ली. लेकिन अब बस और नहीं, अब मैं अपने दिल की सुनना चाहता हूं. 

ऑफिस आकर इस्तीफा देकर, नोटिस पीरियड सर्व करने जैसी औपचारिकता करने का बिल्कुल भी दिल नहीं है. इसलिए ऐसे ही एक मैसेज छोड़कर जा रहा हूं.

बीते 2.5 साल का सफर रोलर कोस्टर रहा. दिगाम को बहुत चैलेंज फेस करना पड़ा. पहली नौकरी में तो मालूम ही नहीं चला था कि काम करना इतना मुश्किल होता है. सब कुछ बहुत आसान लगता था. 

लेकिन यहां आकर अपनी सीमाओं का पता चला. वक्त के साथ बहुत सारे वहम टूटते हुए चले गए. करीब सालभर पहले जब ऑफिस में ही ब्रेकडाउन हुआ तो खुद पर भरोसा ही खत्म हो गया था. लेकिन यहां मौजूद लगभग सभी लोगों ने भरोसा दिखाया, मैं खुद में भरोसा वापस हासिल कर पाया. 

फिलहाल काम को लेकर खराब जैसा कुछ नहीं चल रहा था. सब कुछ ठीक ही था. पर बस अब मन ही नहीं है नौकरी करने का. इस काम को छोड़कर बाकी कोई भी काम दिखाता है तो लगता है उसमें मन लग जाएगा. इसलिए बस जा रहा हूं. 

ऑफिस का सारा सामान मैं आज अपने लॉकर में रख आया था. उसे कोई जमा करवा देना. कोई कॉल या मैसेज करके प्लीज मुझे कुछ समझाने की कोशिश नहीं करे. मैं इस नौकरी से आगे बढ़कर दुनिया में मौजूद अपने लिए नई संभावना तलाशना चाहता हूं.

शायद फिलहाल के लिए दिल्ली से भी चला जाऊंगा. लेकिन वापस आया तो जो भी साथ बैठकर चाय, कॉफी पीना चाहे, खाना खाना चाहे, तो स्वागत रहेगा. 

और इस तरह से जाने के लिए कोई पेनल्टी भरनी हो तो मुझे कंपनी का अकाउंट नंबर भेज दें. मैं जमा कर दूंगा. 

शुक्रिया

प्रवीण


वैसे प्रवीण ने अपने रिजाइन को लेकर पहले ही इशारा कर दिया था, देखें उनकी ये एफबी पोस्ट-

Social media post by Praveen (23 Aug) with a long Hindi caption about quitting a job, long working hours, and reevaluating life.

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