दिल्ली की कथित आबकारी नीति मामले से जुड़ा अवमानना (Contempt of Court) विवाद अब और व्यापक हो गया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में पत्रकार Saurav Das और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता Gopal Rai को भी पक्षकार बनाया है। मामला उन सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और सार्वजनिक टिप्पणियों से जुड़ा है, जिनमें अदालत और संबंधित जज को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें कही गई थीं।
दरअसल, यह पूरा विवाद दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति केस की सुनवाई के दौरान सामने आया। अदालत के सामने आरोप रखा गया कि कुछ नेताओं, समर्थकों और सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए ऐसे पोस्ट साझा किए गए, जिनसे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने की कोशिश हुई। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन पोस्टों के जरिए सुनवाई कर रहे जज की छवि खराब करने और जनता के बीच अदालत को लेकर अविश्वास पैदा करने का प्रयास किया गया।
इसी मामले में पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने Arvind Kejriwal, Manish Sisodia समेत कई आम आदमी पार्टी नेताओं को नोटिस जारी किया था। आरोप था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा की गई सामग्री अदालत की गरिमा को प्रभावित कर सकती है। अब इसी कड़ी में पत्रकार सौरव दास और मंत्री गोपाल राय का नाम भी जोड़ा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार अदालत यह जांच कर रही है कि संबंधित पोस्ट और टिप्पणियां सामान्य आलोचना के दायरे में थीं या फिर उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और अदालत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की सीमा पार कर दी थी। भारतीय कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति अदालत की कार्यवाही या न्यायपालिका की निष्पक्षता को प्रभावित करने वाली गतिविधि करता है, तो उसे अवमानना माना जा सकता है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सोशल मीडिया के दौर में न्यायपालिका के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों को गंभीरता से देखा जाएगा। अदालत का मानना है कि किसी भी न्यायिक प्रक्रिया पर सार्वजनिक दबाव बनाने या जजों को निशाना बनाने वाली मुहिम लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंताजनक हो सकती है।
उधर, आम आदमी पार्टी पहले भी यह आरोप लगाती रही है कि आबकारी नीति केस राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों के जरिए विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों का दावा है कि शराब नीति में बड़े स्तर पर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ था।
गौरतलब है कि दिल्ली आबकारी नीति मामला देश के सबसे चर्चित राजनीतिक और कानूनी मामलों में शामिल रहा है। इस केस में शराब कारोबार से जुड़े लाइसेंस वितरण, कथित कमीशनखोरी और नीति निर्माण में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। मामले में कई कारोबारी, अधिकारी और राजनीतिक नेता जांच के दायरे में आए थे।
अब अदालत की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि संबंधित पोस्ट और बयानों को न्यायालय की अवमानना माना जाए या नहीं। इस मामले पर राजनीतिक और मीडिया जगत की नजरें टिकी हुई हैं।


