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दिल्ली

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के हस्तक्षेप के बाद दिल्ली पुलिस ने पत्रकारों के कैमरे लौटाए!

नई दिल्ली: लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकारों को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने अपनी आवाज उठाई है। प्रेस क्लब ने कहा है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कभी खामोश नहीं किया जाना चाहिए। सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी है कि वे संविधान में दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का सम्मान करें और उसकी रक्षा सुनिश्चित करें।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के मुताबिक, पत्रकार लखविंदर और राजविंदर के कैमरे दिल्ली पुलिस ने वापस कर दिए हैं। प्रेस क्लब ने बताया कि उसने बुधवार को इस मामले को उठाया था, जिसके बाद पत्रकारों के कैमरे लौटाए गए।

प्रेस क्लब ने इस घटनाक्रम पर संतोष जताते हुए कहा कि स्वतंत्र प्रेस सत्ता की ओर से दी जाने वाली कोई सुविधा या विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के सुचारु संचालन के लिए एक अनिवार्य स्तंभ है।

संविधान के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार पत्रकारों को भी अपने पेशेवर दायित्व निभाने का आधार देता है। प्रेस क्लब के इस बयान ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि समाचार संकलन के दौरान पत्रकारों के उपकरणों को जब्त करने या उनके काम में बाधा डालने जैसी घटनाओं में उनकी स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

प्रेस क्लब का स्पष्ट संदेश है कि लोकतंत्र में पत्रकारों को अपना काम करने से रोकना या उनकी आवाज दबाना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता के लिए जरूरी है कि पत्रकारों को बिना किसी अनुचित हस्तक्षेप के घटनाओं की रिपोर्टिंग करने का अवसर मिले।

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