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दिल्ली

दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म में छात्रों का हंगामा, निदेशक पर जूते से पीटने की धमकी देने का आरोप

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म (DSJ) में छात्रों और प्रशासन के बीच एक बार फिर टकराव की स्थिति बन गई है। संस्थान में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया, जिसके दौरान डायरेक्टर प्रोफेसर भारती घोरे पर अभद्र व्यवहार और धमकी देने का आरोप लगा है।

क्या है विवाद?

इंडिया टुडे के सहयोगी पोर्टल लल्लनटॉप के अनुसार, छात्रों का आरोप है कि 1 अप्रैल को जब वे अपनी समस्याएँ लेकर डायरेक्टर से मिलने गए, तो उन्होंने उनकी शिकायतें सुनने के बजाय बदसलूकी की और यहां तक कि “जूते से पीटने” तक की धमकी दी। छात्रों के मुताबिक, संस्थान में कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, वाई-फाई और एसी जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है, जबकि प्रशासन पारदर्शिता नहीं बरत रहा।

एक छात्र ने कहा, “हम कॉलेज की फंडिंग और फैसलों में पारदर्शिता चाहते हैं, लेकिन जब भी सवाल उठाते हैं, तो हमें चुप करा दिया जाता है।”

डायरेक्टर ने किया आरोपों से इनकार

प्रोफेसर भारती घोरे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि छात्रों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उनके खिलाफ झूठी अफवाहें फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, “पूरा मामला तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। छात्रों ने अधिकारियों से माफी मांगी है, और अब मामला खत्म हो चुका है।”

छात्रों का विरोध जारी

हालांकि, छात्रों ने माफी मांगने के दावे को झूठा बताया और 3 अप्रैल को डायरेक्टर और अन्य अधिकारियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (DUSU) से समर्थन की अपील भी की है।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब DSJ में छात्र असंतोष जताया गया हो। 2018 में भी संस्थान की सुविधाओं की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था, जिसके कारण कक्षाएँ बाधित हो गई थीं।

महंगी फीस, लेकिन सुविधाओं का टोटा

DSJ दिल्ली विश्वविद्यालय का एक प्रमुख संस्थान है, जहाँ पांच साल का इंटीग्रेटेड जर्नलिज़्म कोर्स (FYIPJ) और दो साल का मास्टर ऑफ जर्नलिज्म (MJ) कोर्स ऑफर किया जाता है। लेकिन छात्रों के मुताबिक, पहले वर्ष की फीस 79,820 रुपये और आगे के वर्षों में 69,620 रुपये होने के बावजूद बुनियादी सुविधाएँ नदारद हैं।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस विरोध पर क्या रुख अपनाता है और क्या छात्रों की माँगों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

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