ओम थानवी-
मैं पंजाबी थोड़ी-बहुत जानता हूँ। बड़े भाई या आदरणीय को पा’जी बोलते हैं — पा से जी को चिपका कर नहीं, किंचित खींच कर बोलते हैं, पा–जी। इसलिए मैंने पा के बाद अपॉस्ट्रफ़ी जड़ दी।
पा’जी प्रा’जी यानी भाईजी — भा (भ्राता, भाई) के साथ जी का आदरसूचक जोड़ है। पंजाब के माझा क्षेत्र के अमृतसर-गुरदासपुर या आगे लाहौर के बाशिंदे तो अब भी अक्सर केवल भा या भाऊ बोलते हैं। पश्चिमी राजस्थान में भी भा और भाऊ चलता है; बड़े भाई के अलावा अन्य बड़े रिश्तों में भी भा संबोधन प्रयोग होता है।
जो हो, पा’जी को हम पाजी क्यों लिखें? कहा जा सकता है कि बोलते समय जानने वाले सही बोलेंगे। ठीक है। लेकिन न जानने वालों को भी तो भ्रम से बचा रखना चाहिए।
इस पोस्ट पर आए कुछ कमेंट्स भी पढ़िए…
मुकुंद हरि-
वीर जी के बाद के दौर में प्रा~जी, फिर पा’जी आ गया। जो लोग पाजी और पा~जी का अंतर, भाषा से न जान सके, वो टीवी, सिनेमा से इसे पाजी ही मान बैठे।
मनोज खरे-
पंजाब का होते हुए भी कपिल शर्मा ने इस कुच्चारण को ज़्यादा प्रचलित किया है। बेहतर होगा कि इस दोष से मुक्त होने के लिए प्राजी या भ्राजी ही बोला जाए।
अवतार सिंह पाहवा-
इसके उच्चारण के लिये हिंदी में कोई व्यंजन ही नही है। इसमें ‘प’ और ‘भ’ के बीच की एक साउंड है।
विवेक शुक्ला-
मुझे लगता है कि पा जी हाल के वर्षों में अधिक प्रचलन में आ गया है। सचिन तेंदुलकर के नाम के साथ भी कुछ प्लेयर पाजी का इस्तेमाल करने लगे हैं। करीब दो दशक पहले तक बड़े भाई या उसी की तरह के आदरणीय इंसान को वीर जी बोला जाता था। वेस्ट पंजाब में वीर जी के स्थान पर भापा जी का संबोधन चलता था। मैं दो दिन पहले साउथ दिल्ली में एक पंजाबी शादी में शामिल हुआ। उधर भापा जी का खूब इस्तेमाल हो रहा था।
प्रवीण मल्होत्रा-
मैं भी पंजाब से हूं. बचपन में काफी समय अंबाला (तब वह पंजाब ही था) में बिताया है. तब बड़े भाई को आदर से भापाजी या भ्राजी बोला जाता था. (भापे भी बोला जाता था) बाद में कुछ क्रिकेट खिलाडियों ने कपिलदेव को पाजी (सही शब्द पा’ जी की जगह) बोलना शुरू किया. तब से यह शब्द चलन में आ गया.
कुलजीत सिंह-
आपने सही पकड़ा, दरअसल पंजाबी ‘भ'(ਭ) का उच्चारण हिंदी के भ और प के बीच का है। हिंदी या अन्य पंजाबेतर भारतीय भाषाएं बोलने वालों को यह उच्चारण प जैसा लगता है, कुछ अंचलों में इसका उच्चारण हिंदी भ की तरह ही किया जाता है।.. तो ये भाषाओं के बीच की छोटी मोटी गलतफहमियां हैं, ख़ैर!



हरजिंदर
November 28, 2025 at 5:05 pm
पा जी नहीं भाअ जी सही शब्द है।