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पिंजड़े में कैद गोदी के पालतू तोते की तस्वीरें देखें!

-शिशिर सोनी-

राजनेताओं की चरणपादुका बने वीर रस के पत्रकारों, देखो अर्णब का हाल!

खरी खरी… पत्रकारिता में दुम दबाये जोकरों के समूह देख लो अर्णब गोस्वामी का हाल। वीर रस में पत्रकारिता को डुबा कर मारने वालों, देखो अर्णब कैसे है बेहाल। राजनेताओं के चरण पादुका बनने से बचो। इनकी कितनी भी जय, जय कर लो, ये रंग हुए सियार किसी के नहीं होते। जब तक इनकी गिरबाँ तुम्हारी मुट्ठी में भींची है तब तक ही ये तुम्हारे चारण भाट हैं। पकड़ ढीली हुई कि अपनी औकात दिखा देंगे।

पिंजड़े में गोदी का पालतू तोता

पकड़ बनती है खबरों से। खोजपरक रिर्पोर्ताज़ से। खुलासे से। खबर दबाने वालों ऐसे ही एक दिन तुम भी दबाये जाओगे। दशकों मेहनत से बनाई नाम, दाम की जमापूंजी पल में भसकते देखोगे। तब तक तुम सब कुछ खो चुके होगे। अपने आसपास किसी साथी को भी न पाओगे। अकेले बियांबां में धकेले जाओगे। तब पछताओगे। चंद चिरकुटों की वाहवाही तुम्हें सालेगी। पत्रकारिता क्यों नहीं की, सवाल कचोटेगी। हर पल मारेगी।

जब जागो तभी सवेरा। अब भी समय है उठ खड़े हो। खुद को पहचानो। तीखे सवालों को और पैनापन दो। तंत्र की रक्षा करो। साहस करो। आओ प्रण लो। पत्रकारिता को प्राण दो। लोकतंत्र को मजबूती दो।

मूल खबर- अर्णब को पीटते हुए गिरफ्तार कर ले गई पुलिस!

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2 Comments

2 Comments

  1. प्रकाश

    November 4, 2020 at 11:26 am

    इसे कहते हैं एक दिन सबका समय आता है। सो देख लिया जब अपनी ताकत होती है तो केस को जैसे मर्जी दबबा दो लोगों के काम करा कर पैसे मत दो। क्योंकि अपनी ताकत है। हम चैनल के मालिक हैं। हमारी ताकत है चाहे कोई आत्महत्या कर ले हमें क्या फर्क पडेगा सरकार हमारी मुठ्ठी में है हम पैसे नहीं देंगे ये नहीं पता सरकार बदलती रहती है जब एक्सन होता है कोई साथ नहीं आता जिन सताया है उनकी आत्मा को शांति मिलती है। इसे कहते हैं जैसे को तैसा।

  2. sunil

    November 4, 2020 at 1:06 pm

    एक पत्रकार की गिरफ़्तारी पर इस तरह की heading. भड़ास को शर्म आनी चाहिए.

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