नरेंद्र प्रताप-
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार आज मेरठ में बीएलओ और नौजवानों के साथ “भव्य संवाद कार्यक्रम” करने वाले थे. “इंडियन एक्सप्रेस” ने जो रायता फैलाया, उसके बाद उनका कार्यक्रम रद्द हो गया. ऐसा एक कार्यक्रम वाराणसी में भी आयोजित था.
मेरठ में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस कार्यक्रम के लिए डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया जाना था.
CCS विश्वविद्यालय के ऑडोटोरियम और मेडीकल कालेज के ऑडोटोरियम में टेन्टेज, ब्रांडिंग, ऑडियो विजुअल फरोरल, लाइटिंग, जेनसेट इत्यादि पर 114.75 लाख रुपया खर्च किया जाना था.
दोनों स्थानों पर कार्यक्रम के भोजन के लिए 39.04 लाख रुपये का खर्च होना था.
ठेकेदार करोड़पति होते-होते रह गया. मेरठ, उत्तर प्रदेश में।
BLO के साथ संवाद कार्यक्रम का बजट डेढ़ करोड़ का है? इसकी तो अब भी जाँच हो सकती है।
-रवीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार
पवन सिंह-
INDIAN EXPRESS का एक और बड़ा खुलासा..!!
“इंडियन एक्सप्रेस” ने चुनाव आयुक्त के क्रिया कलापों को लेकर आज एक और रिपोर्ट प्रकाशित की है !!*
“इंडियन एक्सप्रेस” के लिए रितिका चोपड़ा की Investigation – Part 2 में Goa में 97 वोटरों के नाम फाइनल वोटर लिस्ट से गायब होने का खुलासा किया गया है. गोवा के CEO द्वारा इन नामों को जोड़ने के लिए 7 दिन में 8 बार ईमेल के बावजूद वोटरों के नाम नहीं जोड़े गये.
रिपोर्ट के अनुसार 17 फरवरी को गोवा में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) के तहत अंतिम वोटर लिस्ट (इलेक्टोरल रोल) जारी होने से चार दिन पहले गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने दिल्ली में चुनाव आयोग को ई-मेल लिखा. सात दिनों में यह उनकी ओर से भेजी गई आठवीं ई-मेल थी.
इसके साथ 97 वोटरों की एक सूची भी भेजी गई थी। ये वे मतदाता थे, जिन्हें गोवा के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई प्रक्रिया के तहत सुना था, जांच की थी और कहा था कि इन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है.
ई-मेल में कहा गया था कि इन मतदाताओं के नाम हटाने से पहले लिए गए फैसलों को वापस लिया जाना चाहिए. लेकिन EROs ECINet सॉफ्टवेयर के जरिए इन फैसलों को नहीं पलट सके. इसकी वजह यह थी कि ऐसा दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर से अनुमति मिलने के बाद ही हो सकता था. लेकिन अंतत: गोवा में जिन 97 वोटर्स का नाम वोटर लिस्ट में होना चाहिए- उन्हें लिस्ट में शामिल नहीं किया गया.
CEO गोवा ने मेल में कहा कि गोवा के EROs, ECINET के जरिए फैसले नहीं बदल पा रहे, क्योंकि उनके पास restricted access था. हफ्ते में 8 बार मेल करने के बावजूद चुनाव आयोग से जवाब नहीं आया और आखिर में फाइनल लिस्ट छप गई, जिनमें ये 97 वोटर शामिल नहीं थे…




