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सुख-दुख

आज उन्हीं हेमंत शर्मा का जन्मदिन है!

इकसठ बाँसठ पार कर चुके हेमंत जी को जन्म दिन की बधाई देने उनके ऑफिस गया न बुक़े ले गया न ही मिष्टी न कोई केक मैं ले गया हींग यह उपहार इसलिए ताकि तिरसठवें के Hemant की ख़ुशबू रसोई से ले कर दिग दिगन्त गमकती रहे

शंभूनाथ शुक्ला-

स्ती मिटती नहीं हमारी! साल 1984 के अक्तूबर महीने की वह एक धुँधलाती शाम थी। तब दिल्ली में दो अक्तूबर से हाफ स्वेटर निकल आते थे। 21 साल का एक युवक प्रभाष जी से मिलने दिल्ली आया हुआ था। अपने साथ दो संग्रह लिए था, भारतेन्दु समग्र और देवकी नंदन खत्री समग्र।

उन दिनों मैं प्रभाष जी के चेंबर के सामने बने एक केबिन में बैठता था। सुधांशु मिश्र इस युवक के साथ थे। उन्होंने परिचय कराया, ये हैं हेमंत शर्मा। हंसमुख और बातूनी हेमंत ने दोनों संग्रह मुझे भी भेंट किए। दोनों उन्होंने स्वयं संग्रहीत और संपादित किए थे। तब न टीवी था न मोबाइल न लैपटॉप और गूगल भी नहीं था। अकेले पुस्तकें ही आपकी साथी थीं। दोनों संग्रह एक हफ़्ते में ही पढ़ डाले। पढ़ कर लगा, 21 साल के इस युवक ने कैसे इतना बड़ा काम कर डाला! किंतु प्रतिभा उम्र का इंतज़ार नहीं करती।

कुछ दिनों बाद हेमंत शर्मा वाराणसी से अंशकालिक संवाददाता बनाये गये। और जल्द ही उन्हें इलाहाबाद के संसदीय उपचुनाव को कवर करने भेजा गया। इस चुनाव में विश्वनाथ प्रताप सिंह कांग्रेस के ख़िलाफ़ सभी विरोधी दलों के साझा उम्मीदवार थे। तब लग गया था कि जल्द ही हेमंत लखनऊ में जनसत्ता के राज्य प्रमुख होंगे। उनकी कॉपी की तरलता, भाषा और लय तथा शिल्प अद्भुत। इसके ऊपर सभी खबरों में अकाट्य तर्क।

रोज़ उनकी खबरें पहले पेज पर लगने लगीं। यूँ भी तब उत्तर प्रदेश देश का इतिहास बदल रहा था। और जनसत्ता में हेमंत शर्मा। 1989 से 1992 तक तो हेमंत की कॉपी इंडियन एक्सप्रेस में अनुवाद हो कर पहले पेज पर छपतीं। ऐसा रामनाथ गोयनका का सीधे निर्देश था।

बेचारे एक्सप्रेस वाले हिन्दी से अंग्रेज़ी अनुवाद करते। एक रोज़ तो हेमंत की पहले पेज पर ही पाँच बाई लाइन छप गईं। उन दिनों पहले पेज पर एक संवाददाता की दो बाई लाइन खबरें छप सकती थीं। पर यह कुछ अधिक हो गया था। प्रभाष जी ने मुझे तलब किया। तब मैं राज्यों की डेस्क का प्रभारी था। मैंने कहा लीड और बॉटम मेरी डेस्क से गईं। न्यूज़ एडिटर श्रीश मिश्र (अब दिवंगत) ने बताया कि तीन जनरल डेस्क से गईं। क्या करते हेमंत की हर स्टोरी पहले पेज पर डिज़र्ब करती है। जब स्टोरी जानदार होगी तो बाई लाइन देनी ही पड़ेगी।

हमारे अख़बार के पाठक भी हेमंत शर्मा को पढ़ने के एडिक्ट थे। ऐसे हैं हेमंत शर्मा।

वे सिर्फ़ खबरें ही नहीं निकालते बल्कि विलक्षण साहित्यकार और इतिहासकार तथा दर्शन शास्त्री भी हैं। युद्ध में अयोध्या और अयोध्या का चश्मदीद पढ़ कर पूरे अयोध्या घटनाक्रम को एक पारखी नज़र से देखा जा सकता है। राम फिर लौटे में उन्होंने विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा पर अत्यंत रोचक शैली में जानकारी दी है। तमाशा मेरे आगे और एकदा भारतवर्षे, तथा कैलाश यात्रा पर उनकी पुस्तक द्वितीयोनास्ति तो कैलाश मानसरोवर जाने की हुड़क पैदा करती है। इसी तरह देखो हमरी काशी पढ़ कर एक और काशी के दर्शन होते हैं।

उत्सवप्रिय हेमंत शर्मा हर त्योहार पर दिल्ली में काशी ले आते हैं। उनकी होली पार्टी तो ग़ज़ब की होती है। रंग, अबीर, गुलाल, इत्र, गुझिया, चाट, पकौड़ी और गायन-वादन सब बनारस का। बनारसी अंदाज़ में भी। कुछ छिपाते नहीं और हर चीज़ को दोस्तों में बाँटते हैं। आम हो या जाड़ा आते ही मगदल सब हेमंत के यहाँ से बड़ी नफ़ासत के साथ पूरे बनारसी अंदाज़ में आता है। उनका आलम यह है कि उनकी किताब के लोकार्पण पर नामवर सिंह जी और मुरारी बापू एक साथ मंच पर पधारे थे। दोनों ने भाषण दिया। सीताराम येचुरी भी उन्हें पसंद करते थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी।

आज उन्हीं हेमंत शर्मा का जन्मदिन है। आज भी खबरों पर उनकी समझ और पकड़ लाजवाब है। हर विषय की गहराई में जाना उनका शौक़ और लगन है। राजनीति, धर्म, दर्शन, विज्ञान और समाज के वे जागरूक प्रहरी हैं। ऐसे हेमंत शर्मा के जन्म दिन पर मेरी लख-लख बधाई और शुभकामनाएँ।

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1 Comment

1 Comment

  1. प्रोफेसर शरद कुमार

    September 28, 2024 at 6:27 pm

    हेमंत जी को बधाई जन्म दिवस की। शुभकामनाएं तिरसठवें को छूनें लेनें की। आपके जन्म दिन पर आपको ही पढ़ रहा हूं सर आपने अपने संस्मरण
    से बचपन के मौज मस्ती की याद ताजा कर दी। अमरेंद्र राय साहब शंभू शुक्ला सर नें आपके बारे में जो कुछ लिखा हैं उससे तो यही लगता हैं की इतना टूटा हुआ हूं की छूने से बिखर जाउंगा। एक ही बात मन में बार बार आ रही हैं की हेमंत सर से हमारी दोस्ती क्यू नहीं हुई। 63 के आप हुए 63 के हम भी हैं। आपका जन्म दारा नगर में हुआ और मेरा जन्म नवापुरा लोहटिया में। शिक्षा मोनटेनशरी शिशु बिहार बाग बरियर सिंह चेतगंज, कबीर चौरा मिडिल स्कूल, हरिश्चंद्र इंटर कॉलेज, अग्रसेन महाजनी, गुजरात विद्या मंदिर, काशी विद्यापीठ, बी एच यू अब एस एस यू। बनारस में बहुत बार आपको सुना जाना और चाहा पर मिल ना पाया। आपको पढ़ा, सबके हैं आप, एक ही मान्यता आपके जेहन में कोई भेद भाव नहीं। जनसत्ता इंडियन एक्सप्रेस से लेकर एक बड़े चैनल का डाइरेक्टर होना आपके हुनर और कुशलता का परिचय हैं। जन्म दिवस की खुशियां खूब आनंदित हो उल्लासपूर्ण हों बनारस की मिठाइयां आप तक पहुंचें रामनगर की लस्सी राम भंडार का लाल पेड़ा लंका के चाची की कचौडी जलेबी सत्यनारायण भंडार का चमचम आप सब तक पहुंचें।

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