Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

आपका इकिगाई क्या है?

यशवंत सिंह-

आजकल इकिगाई (Ikigai) पढ़ रहा हूँ। इसे पढ़ कर जीवन में मकसद तलाश रहा हूँ। इकिगाई जापान के ओकिनावा क्षेत्र (जहाँ सौ साल से ज़्यादा स्वस्थ जीवन जीने वाले बहुत हैं) की जीवन-दर्शन पर आधारित एक अवधारणा है। इसका अर्थ है: “जीने का कारण” या “सुबह उठने का मक़सद”।

Ikigai चार चीज़ों के संगम से बनता है: आप क्या पसंद करते हैं (What you love), आप किसमें अच्छे हैं (What you are good at), दुनिया को किस चीज़ की ज़रूरत है (What the world needs), जिसके लिए लोग आपको भुगतान कर सकते हैं (What you can be paid for)! जहाँ ये चारों चीज़ें मिलती हैं, वही आपका Ikigai है।

इकिगाई को समझने का सबसे सरल तरीका यह है कि इसे जीवन का वह बिंदु माना जाए जहाँ आपकी खुशी, कौशल, समाज की जरूरत, और आर्थिक स्थिरता एक साथ मिल जाते हैं। नीचे चारों तत्वों को विस्तार से समझिए:

आप क्या पसंद करते हैं (What you love)

यह आपका जुनून है। वो चीज़ें जिन्हें करने में आपको आनंद मिलता है, थकान नहीं। उदाहरण- लिखना, घूमना, ध्यान/साधना, कहानियाँ सुनना या बताना, लोगों की मदद करना। यह हिस्सा आपके मन और भावनाओं से जुड़ा होता है। जब आप वही करते हैं जो दिल को अच्छा लगे, तो जीवन हल्का और अर्थपूर्ण लगता है।

आप किसमें अच्छे हैं (What you are good at)

यह आपकी क्षमता या कौशल है। आप कौन सा काम स्वाभाविक रूप से बेहतर कर लेते हैं या अभ्यास से उसमें निपुण हो चुके हैं। उदाहरण- तेज़ निर्णय लेना, लेखन कौशल, समस्याएँ विश्लेषित करना, संवाद/communication, प्रबंधन। यह हिस्सा बताता है कि आप किस क्षेत्र में दूसरों से अलग चमकते हैं।

दुनिया को किस चीज़ की ज़रूरत है (What the world needs)

यह समाज की मांग और आपकी उपयोगिता का हिस्सा है।
यानी ऐसा काम जो आपके आसपास के लोगों के लिए मूल्य पैदा करे। उदाहरण- ईमानदार पत्रकारिता, जानकारी का सही विश्लेषण, लोगों को जागरूक करना, नई दृष्टि देना, सेवा, सहायता, मार्गदर्शन। यह चीज आपके जीवन को उद्देश्य देती है क्योंकि आप किसी बड़े मकसद के साथ जुड़े होते हैं।

जिसके लिए लोग आपको भुगतान कर सकते हैं (What you can be paid for)

हर पसंद किए जाने वाले या अच्छे काम के लिए भुगतान नहीं मिलता। यह हिस्सा आर्थिक स्थिरता का प्रतिनिधित्व करता है। उदाहरण- लेखन, कंटेंट क्रिएशन, कंसल्टिंग, प्रशिक्षण, पत्रकारिता संबंधी सेवाएँ। यह वह क्षेत्र है जहाँ आपका कार्य आय का स्रोत बन सकता है।

जहाँ ये चारों मिलते हैं, वही आपका इकिगाई है। अगर कोई काम आपको पसंद भी हो, आप उसमें अच्छे भी हों, दुनिया को उसकी ज़रूरत भी हो और उससे आपकी कमाई भी हो तो वही काम आपके जीवन का उद्देश्य, अर्थ और उत्साह बन जाता है। इकिगाई आपको बताता है कि आप क्यों उठते हैं, किसलिए काम करते हैं और आपके होने का अर्थ क्या है।

लंबी उम्र सिर्फ शरीर से नहीं मिलती। उद्देश्यपूर्ण जीवन, मन की शांति, सामाजिक संबंध, सरल भोजन, और नियमित रूटीन इसे लम्बा बनाते हैं। जापानी लोग, खासकर ओकिनावा वाले, दुनिया के सबसे ज्यादा लंबे समय तक जीने वालों में हैं, क्योंकि:

उनके जीवन में उद्देश्य होता है। हर उम्र में अपने काम, परिवार, समुदाय, बगीचे, शौक… इन सबमें सक्रिय रहते हैं।

छोटे-छोटे आनंदों की कद्र… भोजन सरल, प्रकृति के साथ तालमेल, चलते रहना, धीमी रफ्तार में जीना।

सामाजिक बंधन : उनका मोई (घनिष्ठ मित्र समूह) जीवनभर साथ चलता है। यह मानसिक शांति देता है।

शरीर को लगातार चलते रहना : जिम नहीं जाते, लेकिन रोज़मर्रा की गतिविधियाँ उन्हें फिट रखती हैं।

तनाव कम : तनाव को बोझ नहीं बनने देते। छोटे ब्रेक, चाय, बातचीत, प्रकृति… यह सब मानसिक संतुलन देता है।

इकागाई और लंबी उम्र के बीच संबंध : जिन लोगों का Ikigai होता है, उनका मन स्थिर और खुश रहता है। जिनकी दैनिक ज़िंदगी उद्देश्यपूर्ण होती है, उनमें अवसाद, चिंता और निराशा कम होती है। शरीर में तनाव हार्मोन घटते हैं। इससे दिल मजबूत रहता है। उद्देश्य के साथ उठने वाले लोग उम्र बढ़ने पर भी सक्रिय रहते हैं। इसलिए कहा जाता है:

“Those who have a why to live can bear almost any how.”

आप इसे अपनी ज़िंदगी में कैसे ला सकते हैं? छोटे-छोटे कदमों से: सुबह उठने का एक कारण चुनें- यह काम, लेखन, साधना, पढ़ना, सेवा… कुछ भी हो सकता है।

अपनी पसंद और क्षमता को जोड़ें- जो आपको अच्छा लगता है और जिसमें आप अच्छे हैं, उसे रोज़ थोड़ा-थोड़ा करें।

जीवन में धीमी रफ्तार लाएँ- बहुत तेज़ जीवन थका देता है।
धीमी, सजग और mindful दिनचर्या लंबी उम्र देती है।

अपने संबंधों को पोषित करें- दोस्ती, परिवार, समुदाय… ये मन को ऊर्जा देते हैं।

सरल भोजन + सरल जीवन : कम मिर्च, कम तेल, प्राकृतिक खाना!

रोज़ थोड़ा चलना- पैदल चलना ही सबसे लंबी उम्र का रहस्य माना जाता है।

(ऊपर तस्वीर- गाजीपुर में ग़ुप्तकालीन लटिया स्तंभ, क्लिक- उमेश श्रीवास्तव)

लेखक यशवंत भड़ास के संस्थापक और संपादक हैं. संपर्क-9999330099

Local News Community
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन