ये अस्पताल धरती के नरक हैं और इनके ये डाक्टर तो साक्षात यमराज!

भड़ास के पास एक चिट्ठी आई है, मेल से. किसी ने bhumikaoffsetkhoor@gmail.com मेल आईडी से भेजा है. चिट्ठी में जो कहानी वर्णित है, उसे पढ़ सुन कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. Continue reading

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बाजार का सोयाचाप या मैदे से बना कोई पकवान खाने से पहले ये वीडियो जरूर देखें

Yashwant Singh : ये वीडियो एक मेडिकल स्टोर वाले ने बनाया है। रेस्टोरेंट में काम करने वाला एक बालक बिटेक्स मलहम लेने गया था। उसका हाथ सड़ रहा था।  Continue reading

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Health News : जानिए ‘शोग्रेन सिण्ड्रोम’ के बारे में

Skand Shukla : अशोक जोड़ों का दर्द लेकर डॉक्टर के पास पहुँचे थे, लेकिन उन्हें तब ताज्जुब हुआ जब उनसे आँखों और मुँह के कुछ विशिष्ट लक्षणों के बाबत पूछताछ की गयी। डॉक्टर जानना चाहते थे कि क्या उन्हें आँखों में कुछ गड़न सी महसूस होती है। ऐसा लगता है कि कुछ रेत या मिट्टी आँखों में गड़ रही है और उसे तत्काल आँखों से धोकर निकाल दिया जाए? Continue reading

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जानिए, निपाह वायरस से बचाव के लिए होमियोपैथिक में क्या है इलाज

जैसा कि हम सभी को पता है भय व्यक्ति के रोग प्रतिरोधक क्षमता को घटा देता है. आज जब निपाह वायरस एपिडेमिक का रूप ले रहा है, सारे देश में भय का वातावरण बन गया है. ऐसी अवस्था में कुछ लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत नीचे पहुंच जाने की आशंका बनती है. इस अवस्था के लिए होम्योपैथी में एक निश्चित दवा है ‘इग्नेशिया 200’. एक बार जब सारी दुनिया में प्लेग एपिडेमिक के रूप में फैला, उस समय इस होमियोपैथिक औषधि ने उसे रोकने और लोगों को जीवनदान देने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई थी. Continue reading

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विटामिन B17 की कमी से होने वाला कैंसर बीमारी कम, बिजनेस ज्यादा है

कैंसर कोई बीमारी नहीं बल्कि चिकित्सा जगत में पैसा कमाने का साधन मात्र है। पिछले कुछ सालों में कैंसर को एक तेजी से बढ़ती बीमारी के रूप में प्रचारित किया गया। इसके इलाज के लिए कीमियोथिरेपी, सर्जरी या और उपायों को अपनाया जाता है, जो महंगे होने के साथ-साथ मरीज के लिए उतने ही खतरनाक भी होते हैं। लेकिन, अगर हम कहें कि कैंसर जैसी कोई बीमारी है ही नहीं तो?

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Nearly 10 % Guwahati scribes are vulnerable for heart diseases

By NJ Thakuria

Guwahati: A lipid profile screening camp, covering a group of working
journalists, indicates the necessity of urgent medical attentions for
at least one tenth of the participants as their cholesterol and
triglycerides levels were found far above the permissible limits.
Almost half of them need life style modification (read more physical
activities), added the health camp report.
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डॉ. नरेश त्रेहान का मेदांता हॉस्पिटल भी लुटेरा निकला, पारस हास्पिटल का हाल भी सुनिए

Pravin Bagi : डॉ. नरेश त्रेहान का मेदांता हॉस्पिटल भी लुटेरा निकला। आखिर मरीज जाये तो कहां जाये ? अस्पताल ने गर्व नामक बच्चे के बुखार के इलाज के लिये 17 लाख रुपये लिए। बच्चे की मौत भी हो गई। बच्चे के पिता की शिकायत पर हुई जांच में पता चला कि दवाओं का 17 गुणा ज्यादा दाम लिया गया। अस्पताल के एक दवा दुकान का लाइसेंस हरियाणा सरकार ने 7 दिनों के लिये निलंबित कर दिया है। Continue reading

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तंबाकू उत्पाद के पैकेटों पर तम्बाकू छोड़ो नंबर 1800112356 दर्ज करने के आदेश

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने तम्बाकू सेवन की लत छोड़ने वालों के लिए तम्बाकू छोड़ो नंबर जारी की है। सरकार ने तम्बाकू उत्पादों के पैकेट पर ही ये नंबर लिखने की अधिसूचना जारी की है। नई चेतावनी 1 सितंबर, 2018 से प्रभावी होगी। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 3 अप्रैल, 2018 को जारी अधिसूचना में कहा है कि तम्बाकू पैकेटों पर 85 प्रतिशत की नई पैक चेतावनी होगी, जिसमें तम्बाकू उपयोग के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव, और तम्बाकू सेवन की लत को छोड़ने वालों के लिए तम्बाकू छोड़ो नंबर (क्विट लाइन नंबर) लिखना होगा। Continue reading

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इस मीडिया समूह ने अपने कर्मचारियों का स्‍वास्‍थ्‍य बीमा तक नहीं करवाया है…

पत्रकार की मौत : क्‍या संस्‍थान की कवरेज से भर जाएगा परिवार का पेट! शिमला के एक वरिष्‍ठ पत्रकार की मौत पर उसके मीडिया संस्‍थान ने खबरें और संपादकीय लिख कर श्रद्धांजलि दी। पूरा प्रदेश गमगीन हुआ। लेकिन क्‍या इससे उसके परिवार का भविष्‍य संवर जाएगा। ऐसे वक्‍त में एक कर्मचारी को संस्‍थान से आर्थिक मदद के तौर पर जो मिलना चाहिए क्‍या वह मिलेगा।

ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्‍योंकि प्रदेश का अपना और नंबर एक मीडिया समूह होने का दंभ भरने वाले इस अखबार ने अपने कर्मचारियों के भविष्‍य की चिंता न करते हुए न तो कर्मचारी बीमा करवा रखा है और न ही स्‍वास्‍थ्‍य बीमा । ऐसे वक्‍त में इस पत्रकार के परिवार के भविष्‍य की आर्थिक मदद कैसे होगी। सरकार के आगे हाथ पसारे जाएं तो भी इतनी राशि नहीं मिल पाएगी जितनी एक कंपनी ग्रुप इंश्‍योरेंस के माध्‍यम से अपने कर्मचारियों को दिला सकती है। शर्मनाक बात यह है कि प्रदेश के पत्रकार सरकार के आगे हाथ पसारे तो दिख जाएंगे, मगर अखबार मालिकों से अपना वैधानिक हक मांगने की इनकी हिम्‍मत नहीं है।

अब एक अन्‍य मामले की चर्चा करते हैं। धर्मशाला में एक राष्‍ट्रीय दैनिक अखबार के पत्रकार के साथ ही ऐसा ही हादसा हुआ था। उसके परिवार की चिंता में कई तथाकथित हमदर्दों ने होहल्‍ला किया कि उसके परिवार का क्‍या होगा। बैठकें हुईं और हाथ पसारे हुए परिवार की मदद के लिए सरकार और दूसरे लोगों से मदद जुटाने की कोशिश की गई, जो रकम जुटाई गई उससे शायद ही परिवार का राशन भी आ पता।

फिर आई संस्‍थान की बारी, तो संस्‍थान ने जो मदद की उससे उसका परिवार आर्थिक संकट की चिंता से मुक्‍त हुआ। परिवार को संस्‍थान द्वारा करवाए गए बीमा और ग्रेच्‍युटी इत्‍यादि के माध्‍यम से करीब तीस से चालीस लाख रुपये तक की राशि प्रदान की गई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्‍या शिमला के पत्रकार के परिवार को धर्मशाला की तरह संस्‍थान से इतनी आर्थिक मदद मिल पाएगी तो उसका जवाब ना में ही मिलता है। ऐसे में परिवार क्‍या पहले पन्‍ने से लेकर भितर के पन्‍नों में छापी गईं श्रद्धांजलि की खबरों को ताउम्र संभाले गुजारा करेगा!

वरिष्‍ठ पत्रकार रविंद्र अग्रवाल की फेसबुक वॉल से.

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‘डाक्टर साब, स्मोकिंग अगर छोड़ दूंगा तो अस्थमा से मर जाऊंगा’

As an individual has his own personality, each and every remedy have their own peculiarities also .These both are some of the most relevant symptoms for the selection of appropriate remedy. Alertness of prescriber’s mind catch these symptoms easily but attendant and patient both can not aware about the usefulness of those symptoms. So they will never give them directly.

Once at a time a senior citizen came in my clinic with his son. He was suffering from cough and breathlessness from long period.He had been already taken so many treatments from other pathies as well as Homoeopathy also with little relief. When I was taking the symptoms of Grand old man he looked in much more discomfort to talk due to short breathing . In between our conference his son interrupted us. He said ‘Doctor you can’t cure his father’. ‘Why?’ I ask. ‘Because he can never left the smoking.’ He answered. ‘Is it true?’ Then I asked from the patient.

His answer surprised all of the person present in my clinic at that time except me. He said if he doesn’t smoking it seems his asthma will kill him. No any medicine gives him as much relief as smoking. Smoking gives relief to asthma and cough is the peculiarity of Arania D. I prescribed him Arania D 30 and said to come next week. When he returned was in great relief.

Note – Here a question raised naturally “How a cause of asthma ‘smoking’ can give relief?” After a long thinking I reached at some undergiven points –

1- his asthma was not due to pulmonary disorder directly, but due to anaemia.

2 – anaemia causes the loss of oxygenation to brain and brain meets it by enhancing the work of heart. As much as heart rate increases pulmonary rate will increased naturally and this is the cause of asthma here.

3 – Smoking loads the nicotine on blood in lungs and this nicotinised blood when reached in brain it sedate it.

4- requirement of oxygenated blood of sedated brain lessened because of that cardiac and pulmonary action diminished also by which Asthma relieved.

5-An other question raised here ‘then what was the purpose of Arania D?’

Arania D is usually a splenic remedy by employment of it work of spleen raised and percentage of hemoglobin in blood normalised. By which loss of oxygenation to the brain normalised and cure became possible.

Thanks,

Dr M D Singh
Managing director
MD Homoeo Lab Pvt Ltd
Maharajganj Ghazipur
U.P India

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तंबाकू से एक पत्रकार और उसका परिवार तबाह… इससे पाएं छुटकारा

Ashwini Sharma : आज के मिलावटी युग में कब कौन गंभीर बीमारी का शिकार हो जाए कहा नहीं जा सकता..जीवन भर नशे से दूर रहने वालों को भी मौत खिंचती है और जो लोग इसकी दलील देकर तरह तरह के व्यसन करते हैं उऩका ईश्वर ही मालिक है..आज सुबह गाजीपुर के प्रत्रकार भाई प्रिंस सिंह की पोस्ट पढकर मन व्यथित हो गया..उन्होंने गाजीपुर के हिन्दुस्तान समाचार पत्र के ब्यूरो चीफ विनोद मिश्रा जी की कैंसर से निधन की खबर को अपनी वॉल पर लिखा… विनोद जी पिछले तीन महीने से मुंह के कैंसर से पीड़ित थे..और मुंबई के टाटा समेत कानपुर के अस्पताल में उनका इलाज हो रहा था..प्रिंस भाई ने बताया कि विनोद जी गुटखे और पान का जमकर सेवन करते थे जिससे उन्हें कैंसर हो गया था..वाकई विनोद भाई के असमय निधन से उनके परिवार पर बज्र टूट पड़ा है..ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें और परिवार को हिम्मत दें..साथ ही मैं अपने पत्रकार मित्रों से भी अनुरोध करता हूं कि कृपया जानलेेवा गुटखे से दूर रहें..और हां जो लोग शराब अदि से कुछ ज्यादा ही संगत कर रहे हैं उनसे भी अनुरोध है कि शराब आपके लीवर को खोखला कर देता है..आज आप किसी भी कैंसर अस्पताल में चले जाएं मुंह और लीवर के कैंसर के मरीज सबसे ज्यादा मिलते हैं..याद रखिए आप से आपके परिवार को बहुत उम्मीदें हैं…

कैंसर के पहले और बाद की तस्वीरें

Yashwant Singh : आप बहुत जल्दी ये दुनिया छोड़ गए दोस्त.. Vinod Mishra जी…  विनोद मिश्रा मेरे गाजीपुर जिले के हिंदुस्तान अखबार के ब्यूरो चीफ थे. पान और गुटखे की लत से ओरल कैंसर का उन्हें पता तब चला जब वह विकराल रूप धारण कर चुका था. पूरे चेहरे पर फोड़े निकल आए थे. बीती रात इन्होंने अंतिम सांस ली. दो बेटियां और एक बेटा है. सबसे बड़ी बेटी आठवीं की छात्रा है. सोचिए, एक गृहस्थी को कैसे तबाह कर दिया तंबाकू की लत ने. आज से हम सभी को किसी भी रूप में तंबाकू न सेवन करने की कसम ले लेनी चाहिए. देर होने से पहले सावधान होना जरूरी है. मैं खुद भी विभिन्न रूपों में तंबाकू का सेवन करता हूं लेकिन आज से फाइनली बंद.. ये वादा है. जब भी गाजीपुर जाता, विनोद जी से जरूर मुलाकात होती. उन्हें पता चलता कि मैं गाजीपुर आया हुआ हूं तो खुद फोन कर शाम को मुलाकात करने का कार्यक्रम रख देते. बाटी चोखा पकाने-खाने से लेकर देर रात लंका-स्टेशन का चक्कर लगाने का दौर चलता. उनसे घरेलू रिश्ता बन गया था. सपरिवार हम लोग मिलते-जुलते, जब भी गाजीपुर जाते. अब भी भरोसा नहीं हो रहा कि यह जिंदादिल शख्स चला गया. विनोद जी की सबसे बड़ी खूबी उनका अहंकार विहीन व्यक्तित्व था. वे कभी किसी बात का बुरा नहीं मानते. कितना भी तनाव वाला माहौल हो और कितना भी भारी भरकम व्यक्तित्व हो, वे सबको अपने सहज स्वभाव से शांत-सरल बना लेते. विनोद जी मूलत: कानपुर के रहने वाले थे. उनके असमय चले जाने के बाद बच्चों और भाभी को मुश्किलों भरा जीवन जीना हो सकता है. हम लोग आगे इस परिवार के लिए क्या कर सकते हैं, इस पर सोच-विचार करना चाहिए.

टीवी जर्नलिस्ट अश्विनी शर्मा और भड़ास के एडिटर यशवंत की उपरोक्त एफबी पोस्ट पर आए ढेर सारे कमेंट्स में से कुछ प्रमुख यूं हैं…

Satyendra PS ये कसम वगैरा ससुरी दो चार रोज के लिए होती है। जो लोग मुझे चार साल पहले जीने और मरने के बीच की अवस्था मे देखे थे,4-5 महीने तम्बाकू गुटखा सिगरेट छोड़े रहे। अब खूब भकोस रहे हैं। जब तक लोग खुद मर न जाएं या अधमरा न हो जाएं तब तक लगता है कि तम्बाकू से कैंसर नही होता, किस्मत से होता है। विनोद मिश्र जी को विनम्र श्रद्धांजलि।

Dhirendra Asthana मैं निजी रूप से नहीं जानता मगर पोस्ट पढ़कर गहरे दुख से भरा हुआ हूं । तंबाकू सचमुच खतरनाक है । मैंने दिल के एक ऑपरेशन से एक दिन पहले डॉक्टर के आदेश पर सन 2008 में सिगरेट पूरी तरह छोड़ दी थी । विनोद जी के साथ हुए हादसे से सबको सबक लेना चाहिए । नमन

Vinod Bhardwaj विनम्र श्रद्धांजलि ! उनके कच्चे परिवार को देखते हुए सभी क्षमतावान पत्रकारों और पत्रकार संगठनों से अपील करता हूँ कि वे मुख्यमंत्री सहायता कोष से पर्याप्त धनराशि पीड़ित परिवार को दिलाने की सकारात्मक पहल करें ।

Nitin Srivastava विनोद मिश्रा भइया जी की आत्मा को ईश्वर शांति दें,हमेशा हर किसी पत्रकार के साथ खड़े होने वाले विनोद जी सुल्तानपुर में तकरीबन तीन साल रहे है,हम सभी उनके साथ बहुत अच्छे बुरे पल बिताये है जो कभी भुलाया नही जा सकेगा,ईश्वर उनके परिवार को इस दुख की घड़ी से लड़ने की हिम्मत दें….

Vikash Singh गुटखा ने बहुतों परिवार की जिंदगी खराब की है…जरूरत है इस इंडस्ट्री के खिलाफ अभियान चलाने की…

Ghanshyam Dubey दुखद है। हम लोग सरकार से कुछ बड़ी मदद की बात कर सकते हैं , जिससे परिवार की जिंदगी एक लम्बे समय तक चल सके! हम लोगों की मदद बहुत दूर तक नहीं ले जा सकती ….!!

Riyaz Hashmi बेहद दुखद। विनोद ने मेरे साथ सहारनपुर में करीब दो वर्ष जागरण में रिपोर्टिंग की। वाकई इनके परिवार पर तो दुख का पहाड़ टूट गया है। उफ्फ, भगवान इनकी आत्मा को शांति दे।

अजीत कुमार पाण्डेय मुख्य मंत्री कोष और हिंदुस्तान अख़बार समूह से पीड़ित परिवार को सहायता राशि दिलाने का सकारात्मक कदम उठाना होगा साथ ही नशा मुक्ति अभियान में पत्रकार बंधुओं को सहयोग करने पर भी बल होना चाहिये,ईश्वर विनोद मिश्रा जी के आत्मा को शांति प्रदान करें।

Nagmani Pandey बहुत ही दुःखद समाचार… महाराष्ट्र के कद्दावर नेता के रूप में पहचाने जाने वाले गृहमंत्री आर आर पाटिल की मुत्यु भी तंबाखू के कारण ही हुआ था ।इसके बाद से महाराष्ट्र में तंबाखू पर पाबंदी लाने की चर्चा हुआ लेकिन हुआ कुछ नहीं। मेरा कहने का तात्पर्य है की जो भी कोई हो तंबाखू खाना छोड़ दे ,अगर परिवार से प्यार है तो जरूर छोड़े बाकी आपकी मर्जी

Amitaabh Srivastava बहुत दुखद है। नशे ने जाने कितने घर उजाड़ दिये। लोग समझते ही नहीं।

Ashutosh Dwivedi ओह ये क्या हो गया। विनोद बाबू मुझे तो आपने गाजीपुर बुलाया था। हे राम। ॐ शांतिः शांतिः शांतिः

मूल खबर देखें पढ़ें…

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डिमेंशिया के मरीज को होमियोपैथी की इस दवा ने दी बड़ी राहत

Today’s I have a patient suffering from dementia. She is a well built fair complexioned 60 years of age lady forgotten all her past. She is a housewife belonged from a well mannered big joint family in which her husband is elder of three brothers. They all have their own jobs full of satisfaction and joy. Their wives lives with them. In this sense except when they gathered at their parents house they all leaves in a small family with their two three children.

Usually above given informations are useless for the treatment in other pathies but in Homoeopathy they may become deciding factor to select the remedy. At first her husband came in my clinic with his younger brother and complained that his wife has severe constipation and insomnia from several days with fever without relief by allopathic treatment.

According to symptoms I prescribed pyrogenium 200 one dose along with opium 30 two hourly. Next day they came again and inform me that their patient is quite well. They question me are you have medicine for dementia also ? I said yes. ‘It is very painful to bring her anywhere because she resists powerfully to go out from house and to ride any vehicle but anyhow we will come tomorrow with her’ her husband said.

Anyhow next day they bring her in clinic. She was looking very fearful clutching tightly her husband’s hand . They told me that she can’t answer any question . She was looking like faged and frightened.

Her all daily routine ware held mostly by her husband or children. I prescribed her Baryta carb 200 one dose and ask them to come after one week. When they came next week she was quite well she can go to toilet herself and can take her breakfast without other’s help also.

But for next 3 months there was no more other improvement . Shortly after when her husband told about her regular talking day and night with herself only about dogs and cats I gave her Aethusa Cyn one dose and result is wonderful .She stops talking about dogs and cats at once and became cheerful and comfortable at the same day. Now she’s improving very fastly.

The loneliness all the day due to departure of her bank manager husband to Bank and children to their schools was the cause for fear and ultimately for the disease. I am confident she will must be cured.

Dr M D Singh
Managing director M D Homoeo Lab Pvt Ltd

Maharajganj, Ghazipur

U.P India.

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इस कैंसर अस्पताल में एक रुपये में होता है इलाज, देखें वीडियो

गुजरात के वलसाड का RMD आयुर्वेदिक कैंसर अस्पताल जहां देसी गायों के दूध, घी, दही, मूत्र, गोबर से बने पंचगब्य, योग, संगीत के जरिए होता है चमत्कारिक इलाज.. इस अस्पताल में चार सौ गाएं हैं..यहां लोग बड़े बड़े अस्पतालों से थक हार कर, लाखों खर्च कर निराश भाव से पहुंचते हैं और पुनर्जीवित होकर लौटते हैं..और हां, यहां इलाज भी मात्र 1 रुपये में पूरे सेवाभाव से होता है..

ईश्वर न करें, लेकिन यदि आपका कोई जानने वाला तकलीफ में हो तो एक बार इस अस्पताल का रुख अवश्य करें..

देखें वीडियो :

पूरा पता…

RMD कैंसर अस्पताल

वाघलधारा, जिला वलसाड

गुजरात,

फोन नंबर: 02632-268080,268081, 08141880808

टीवी पत्रकार Ashwini Sharma की एफबी वॉल से.

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पत्रकार अब्दुल रशीद को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मदद की जरूरत

ये अब्दुल रशीद भाई हैं. हम लोग मिले तो नहीं कभी लेकिन कई वर्षों से टच में हैं. आनलाइन नाता काफी गहरा है. रशीद भाई सिंगरौली के पत्रकार हैं. यह स्थान मध्य प्रदेश में पड़ेगा. वे ‘उर्जांचल टाइगर डॉट इन’ नामक पोर्टल भी चलाते हैं. कई अखबारों में काम कर चुके हैं. बेबाक लिखते हैं. भड़ास पर उनके कई आर्टकिल छपे हैं. कल उनने जो बताया वह सुन कर मैं दुखी हो गया.

आजकल वैसे भी जाने क्यों अपने कई परिचितों की तरफ से उदास करने वाली सूचनाएं ही मिल रही हैं. अब्दुल रशीद भाई को किडनी में प्राब्लम इस कदर हो गई है कि अब इसे ट्रांसप्लांट कराना ही विकल्प है. छह-सात लाख रुपये का खर्च है. वह साफ-साफ कह तो नहीं पा रहे थे लेकिन उनके भाव को मैंने समझ लिया.

उन्होंने कहा- ”भइया यहां स्थानीय स्तर पर लोग आर्थिक मदद के लिए अभियान चला रहे हैं, हो जाएगा”. लेकिन मैंने उनसे ज़िद कर एकाउंट नंबर मांगा. यहां इस उम्मीद से प्रकाशित कर रहा हूं कि भड़ास पढ़ने वाले मेरे दो हजार दिलदार मित्र भी अगर दो-दो सौ रुपये उन्हें पेटीएम कर दें या उनके बैंक एकाउंट में डाल दें या उन्हें चेक से भेज दें तो उनका बोझ हलका हो जाएगा. अब्दुल रशीद भाई का ह्वाट्सअप नंबर 7805875468 दे रहा हूं ताकि उनसे डायरेक्ट संपर्क कर सकें.

फेसबुक पर उनका पता ये है : https://www.facebook.com/URJANCHALTIGER

रशीद भाई का बैंक एकाउंट डिटेल यूं है :

Abdul Rashid
State Bank of India
SB Account Number 10793894613
Vindhya Nagar
NH2, NTPC Colony
Sidhi, Madhya Pradesh-486885
IFS Code : SBIN0007937 

लेखक यशवंत भड़ास के संपादक हैं.

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वरिष्ठ पत्रकार नीलाभ का लीवर फेल, मदद की अपील

Bhasha Singh : Friends, Please spread this appeal as far as possible. A friend of ours, Neelabh Mishra, is now very critically ill with non alcoholic liver failure.

Neelabh is a very senior and widely respected journalist from Delhi who has also been involved with the human rights and civil liberties movement in India. He is in Chennai.

Pl contact:

Kavita Srivastava, 09351562965.

Or

Dr. V. Suresh, Adv, Madras High Court – 9444231497.

पत्रकार भाषा सिंह की एफबी वॉल से.

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पागलपन की इस अवस्था के लिए कारगर है Agaricus M

There are a lot of the symptoms in materia medica of Homoeopathy for each and every medicine. In between them there are living some rare Peculiar symptoms by which a wonderful prescribing maybe done and a natural cure maybe find as well.

Once a patient had been taken to my clinic suffering from mental disorders like Madness. He had been already treated at a mental hospital for several days without any positive result.

When I asked the patient what happen? he at once upped his hand over his head and moved it fast in a circle and said all universe is moving. And this is enough for me to choose the appropriate remedy. That was Agaricus M . I gave 3 drops of Agaricus M 2oo at his tongue and told his father to come next day again.

When they both came next day they were praying the power of Homoeopathy. That patient who never slept for last several days took a comfortable sleep whole night.

I always say that every remedy of Homoeopathy has a symptom which drive whole the remedy. And here It was hyper imaging. If he said that his head is moving, roof is moving or seems like he is going up and down I never used this remedy. To the Agaricus patient a spoonful of water seems like a pond , a narrow trench looks like a river , a small hurdle looks like a mountain etc. Only a Agaricus patient may calls about the moving of universe.

Thanks,
Dr M D Singh
Managing director
M D Homoeo Lab Pvt Ltd
Maharajganj, Ghazipur
U.P., India

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Tinnitus यानि कान बजने का होमियोपैथी में ये है इलाज

Today, I read a news at a internet news portal that Homeopathy failed to prove its value in all the cases of Tinnitus had taken part in a survey oriented program. And like it slowly slowly Homeopathy  will be  disqualified as a medicine from the world. We Homeopaths  will be lived alone with rubbing our hands. Friends, you should come forward with proves of cures done by Homeopathy in your hand.

As I have been told before some changes are necessary in Homeopathic philosophy, such as necessity of totality of the symptom for selection of homeopathic remedy.

In my clinic  usually I find that the basis of selection of Homeopathic remedy actually depends on the cause or any causative symptom which drives the whole suffering. Every time same cause same remedy formula works. Only potency will be different according to power of disease. Repetition of dose will depend according to repetition of cause.

Here I am going to define a cause  of tinnitus at which I select same remedy for three different persons and they all ware cured very soon. One person come to me and said every time when he travels from airplane his ears started ringing for some days. I gave him Coca 30 to take before take off of airplane. Now he is fit.

Another person came and said his right ear is painful and buzzing from last two years after take off of airplane when he was going to Delhi. I gave him Coca 200 one dose for some days. He is also cured  now.

Third person was a ex servicemen. He told that when he was posted at Leha whistling in left ear started and  is still today after 5 years. And here also, cure  was awaiting the Coca. I gave coca 200 to him with full confidence.

There was high altitude is the cause in those all three cases and ultimately Coca was the remedy.

Dr MD Singh
Managing director
MD Homoeo Lab Pvt Ltd
Maharajganj, Ghazipur U.P India

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हायमेनोप्लास्टी के जरिए शादी के पहले योनि दुरुस्त कराने का चलन शहरों में बढ़ा

भारतीय समाज में शादी से पहले लड़कियों में कौमार्य अनिवार्य सी शर्त मानी जाती है, और शायद इसीलिए पाश्चात्य संस्कृति से प्रभावित महानगरों में अब ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं, जिनमें लड़कियां सुंदर नैन नक्श की तरह ही कौमार्य भी कृत्रिम तौर पर हासिल कर रही हैं। आम तौर पर शारीरिक संबंधों, खेल संबंधी शारीरिक गतिविधियों या कभी किसी चोट के कारण योनि के भीतर की हायमन झिल्ली फट जाती है, जिसे दुरूस्त कराने की प्रक्रिया हायमेनोप्लास्टी कहलाती है। इस सर्जरी का उपयोग अब कृत्रिम तौर पर कौमार्य पाने के लिए भी किया जा रहा है।

क्या हायमेनोप्लास्टी के बढ़ते मामलों के पीछे महानगरीय संस्कृति भी एक बड़ा कारण है, इस सवाल के जवाब में मुंबई के कॉस्मेटिक सर्जन डॉ़ अनुराग तिवारी ने कहा कि निश्चित तौर पर, महानगरों में आज कल शादी से पहले शारीरिक संबंध आम बात हो गई है और इसी के चलते कई लड़कियां, जिनकी जल्द शादी होने वाली है, कॉस्मेटिक सर्जन का रुख करती हैं, ताकि शादी के पहले के शारीरिक संबंधों के बारे में भावी पति को पता न चले। हालांकि उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि लंबे समय तक खेलों और ऐसी ही अन्य शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी रहीं लड़कियां भी कई बार हायमेनोप्लास्टी कराती हैं।

डॉ तिवारी ने कहा कि हायमेनोप्लास्टी मुख्य तौर पर योनि में कसाव लाने की प्रक्रिया है। पहले शारीरिक संबंध के बाद हायमन झिल्ली फट जाती है, जिसे दोबारा दुरूस्त करने के लिए हायमेनोप्लास्टी की जाती है। इसकी जरूरत कई बार उन लड़कियों को भी पड़ती है, जो खेलों या एथलेटिक्स संबंधी गतिविधियों में शामिल होती हैं, ताकि शादी के बाद किसी तरह की गलतफहमी न पैदा हो। इस संबंध में दिल्ली के ख्यातिप्राप्त कॉस्मेटिक सर्जन डॉ़ पीके तलवार ने बताया कि पिछले कुछ सालों में हायमेनोप्लास्टी के मामलों में इजाफा हुआ है और जल्द शादी करने जा रही लड़कियां यह सर्जरी कराने से नहीं हिचक रहीं।

डॉ तलवार ने बताया कि निश्चित तौर पर लड़कियों और महिलाओं का हायमेनोप्लास्टी की ओर रुझान बढ़ा है। यह सर्जरी कराने वालों में हर वर्ग की महिलाएं शामिल हैं। कॉलेज जाने वाली लड़कियां, जिनकी शादी होने वाली है और कई तो शादीशुदा भी, इस सर्जरी से भावी जीवन का आनंद उठाने से नहीं हिचक रहीं। डॉ़ तलवार ने कहा शादीशुदा महिलाएं प्रसव के बाद भी कई बार इस सर्जरी का सहारा लेती हैं। कई महिलाएं ऐसी भी आती हैं, जिनकी शादी को 20 से भी ज्यादा वर्ष हो गए हैं और वे आगे भी वैवाहिक जीवन का भरपूर सुख उठाना चाहती हैं, इसलिए इस सर्जरी का विकल्प अपनाती हैं।

कॉस्मेटिक सर्जन डॉ़ मनीषा मनसुखानी उपचार की सुलभता को हायमेनोप्लास्टी के बढ़ते मामलों के पीछे का कारण मानती हैं। डॉ़ मनीषा ने बताया कि देर से शादी और सामाजिक तौर पर खुलेपन के कारण भी लड़कियां हायमेनोप्लास्टी कराती हैं। कॉस्मेटिक सर्जन ने बताया कि देर से शादी और ब्वॉयफ्रेंडस की लंबी फेहरिस्त अब सोशल स्टेटस सिंबल बन गए हैं। ऐसे में लड़कियों को हायमेनोप्लास्टी के रूप में एक आसान विकल्प मिल जाता है। मेडिकल तकनीक दिनों-दिन आसान होती जा रही है और इसका फायदा हर वर्ग उठा रहा है। डॉ मनीषा के मुताबिक इसके बाद भी कहा जा सकता है कि अब तक यह प्रक्रिया काफी हद तक उच्च या मध्यम वर्ग की महिलाओं के बीच ही सीमित है।

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ये थेरेपिस्ट निर्वस्त्र होकर करती है मानसिक रोगियों का इलाज

…व्यक्तिगत समस्याओं से जूझ रहे क्लाइंट से सवाल-जवाब करने के दौरान वह धीरे-धीरे, एक-एक कर अपने कपड़ों की परत उतारती जाती हैं…  किसी मनोचिकित्सक के पास अपने क्लाइंट से उसकी दबी भावनाओं, बातों को उगलवाने के लिए कई तरीके हो सकते हैं लेकिन न्यूयार्क की 24 वर्षीय सराह व्हाइट के पास जो है, वह शायद ही कोई और इस्तेमाल करता हो…. मनोविज्ञान की इस विशेषज्ञ ने इसके लिए नई किस्म की थेरेपी ईजाद की है जिसने इंटरनेट पर लोगों में दिलचस्पी जगाई है. व्यक्तिगत समस्याओं से जूझ रहे क्लाइंट से सवाल-जवाब करने के दौरान वह धीरे-धीरे, एक-एक कर अपने कपड़ों की परत उतारती जाती हैं.

उसका विश्वास है कि ऐसा करने से वह अपने क्लाइंट के अवचेतन में दबी परतों को आसानी से बाहर निकाल लेती हैं. सराह का कहना है ‘सत्र के दौरान मैं ‘उत्तेजना शक्ति’ का इस्तेमाल करती हूं जिससे आप अपनी जिंदगी पर ज्यादा से ज्यादा कंट्रोल कर सकें. मैं अपनी थेरेपी में इसलिए निर्वस्त्रता का इस्तेमाल करती हूं ताकि आप खुद को और अपनी दुनिया को बेहतर ढंग से समझ सकें. ऐसे में आप ‘ग्रेट’ और ‘पावरफुल’ महसूस करते हैं. इस उत्तेजना को आप सत्र के दौरान और बाद में भी महसूस करते हैं.’

इस निर्वस्त्र थेरेपिस्ट की इस अजीबोगरीब थेरेपी का लाभ उठाने वाले कलाइंट्स में पुरुष ही ज्यादा हैं. सराह ने अंडरग्रेजुएट स्तर पर न्यूयार्क की यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की पढ़ाई की और इस दौरान महसूस किया कि इसमें काफी कुछ नीरस और निरुत्साही है. इस कमी को पूरा करने के लिए वह ‘ओपन सेक्सुएलिटी’ की तरफ मुड़ गई. न्यूयार्क डेली को दिए इंटरव्यू में सराह ने बताया, ‘महिलाओं की तुलना में पुरुष इस थेरेपी को ज्यादा पसंद करते हैं और एक या दो सेशन में अपनी मनोवैज्ञानिक समस्याओं से पूरी तरह निजात पा लेते हैं.’ एक घंटे के सत्र के दौरान सराह जब बातचीत शुरू करती है, तब उसके शरीर पर पूरे कपड़े होते हैं लेकिन जैसे-जैसे सेशन आगे बढ़ता है, वह सवाल पूछते-पूछते अपने कपड़े भी उतारने शुरू कर देती हैं. आखिर में उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं होता.

सराह एक सेशन के 150 डॉलर लेती हैं और यह सत्र कंप्यूटर स्क्रीन पर वेब कैमरे तथा  टेक्स्ट चैट के जरिए ‘वन वे’  (एक तरफा) संपन्न होता है. एक बार जब क्लाइंट से घनिष्ठता हो जाती है, तब यह सेशन स्काईप वीडियाो अप्वाइंटमेंट के जरिए दो तरफा होता है. उसके बाद कई मामलों में यह सजीव यानी आमने-सामने होता है. सराह ने इसके लिए बाकायदा अपनी वेबसाइट (सराहव्हाइटलाइव.कॉम) पर विज्ञापन भी दिया है जिसमें उसके कई एंगल से मॉडलिगं शॉट्स हैं. अब तक वह दर्जनों क्लाइंट की समस्याओं को सुलझा चुकी हैं जिसमें शामिल हैं कॉलेज स्टूडेंट्स और प्रौढ़ावस्था वाले पुरुष. ये सभी अपनी रिलेशनशिप की समस्याओं को सुलझाने के लिए इस थेरेपिस्ट की मदद लेते हैं.

सराह का कहना है, ‘मेरा लक्ष्य अपने मरीजों को यह दिखाना होता है कि देखो, मेरे पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए आप भी मेरी तरह ईमानदारी से खुलकर अपनी बात कहो. फ्रायड ने मुक्त साहचर्य का इस्तेमाल  किया था, मैं निर्वस्त्रता का प्रयोग करती हूं.’ फिलहाल, सराह ने इस बात को माना है कि उसकी इस ‘नेकेड थेरेपी’ को किसी मेंटल हेल्थ एसोसिएशन द्वारा मान्यता नहीं है और न वह लाइसेंसशुदा थेरेपिस्ट है. सराह का ब्वॉयफ्रेंड जहां उसकी इस थेरेपी का जोरदार समर्थन करता है, वहीं सराह के माता-पिता इस बात से अनभिज्ञ हैं. दूसरी तरफ प्रोफेशनल मनोचिकित्सकों को यह थेरेपी जरा भी नहीं भा रही है और उन्होंने इसे ‘इंट्रैक्टिव सॉफ्ट-कोर इंटरनेट पोर्न’ करार दिया है.

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इसे कहते हैं मीडिया की ताकत, एम्स ऋषिकेश झुका (देखें वीडियो)

रोहिनी गुप्ते नामक एक अनाम सी महिला ने फेसबुक पर एक बड़ा मुद्दा उठाया. आखिर क्यों ऋषिकेश में बने एम्स में दिल्ली वाले एम्स से कई गुना ज्यादा रेट पर इलाज होता है? इस एफबी स्टेटस पर भड़ास4मीडिया, जनचौक समेत कई वेबसाइटों की नजर पड़ी. इन पोर्टल्स पर प्रमुखता से खबर छपने के साथ ही एनडीटीवी की टीम ने भी इस पर काम शुरू कर दिया. चर्चित एंकर रवीश कुमार ने इस गड़बड़ी को प्राइम टाइम में प्रमुखता और विस्तार से प्रसारित किया.

मुद्दा हर तरफ चर्चा का विषय बन गया. एम्स ऋषिकेश में गरीबों के साथ होने वाले क्रूर मजाक को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों की थूथू होने लगी. एम्स ऋषिकेश के सामने समाजसेवियों ने डेरा डाल दिया. धरना शुरू हुआ. हर ओर रेट घटाने की मांग होने लगी. अंतत: ऋषिकेश एम्स प्रशासन सामने आया. पहले तो लीपापोती वाली बातें करता रहा, जिसे आप आगे के वीडियो में सुन सकते हैं. बाद में उसे एम्स ऋषिकेश के रेट एम्स दिल्ली के बराबर करने की घोषणा करनी पड़ी. इसे कहते हैं मीडिया की ताकत. देखें संबंधित वीडियो:

मूल खबरें :   xxx

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ऋषि‍केश एम्‍स में आने वाले मरीजों से लाखों रुपये असंवैधानि‍क रूप से वसूले जा रहे हैं!

उत्‍तराखंड में एम्‍स बना तो लगा कि‍ पहाड़ की पहाड़ सी बीमारि‍यां शायद तलहटी पर आएं। लेकि‍न फि‍लवक्‍त वहां के एम्‍स में जो हालात चल रहे हैं, साफ लग रहा है कि‍ पहाड़ की बीमारि‍यां पहाड़ पर ही चढ़ती जा रही हैं। ऋषि‍केश एम्‍स में आने वाले मरीजों के इलाज से लेकर जांच तक लाखों रुपये असंवैधानि‍क रूप से वसूले जा रहे हैं। कमाल की बात है कि‍ कुछ एक राजनीति‍क दलों के कुछ एक बार के वि‍रोध प्रदर्शनों को छोड़ दें, तो लगता है कि‍ एम्‍स प्रशासन ने यहां के पत्रकारों को बेहोशी की दवा दे दी है, या मर जाने की। पहाड़ के लोग बुरी तरह से परेशान हैं, और पत्रकार चुप बैठे हैं।

एम्‍स दि‍ल्‍ली में कैंसर के मरीज की जो रेडि‍योथेरेपी 750 रुपये में होती है, एम्‍स ऋषि‍केश में उसी के 1 लाख 32 हजार रुपये से भी ज्‍यादा वसूले जा रहे हैं। दर्जनों ऐसे इलाज हैं जो एम्‍स दि‍ल्‍ली में आम मरीजों के लि‍ए पूरी तरह से फ्री हैं, वहां पर कि‍सी के लि‍ए भी पांच हजार रुपये से कम नहीं वसूले जा रहे हैं। आलम यह है कि बाहर के प्राइवेट अस्‍पताल में जो इलाज दो हजार में हो रहा है, एम्‍स ऋषि‍केश में उसके लि‍ए पांच से सात हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, एम्‍स के दर्जनों डॉक्‍टरों ने इतने ज्‍यादा पैसे वसूलने से यह कहते हुए इन्‍कार कर दि‍या कि‍ इसके बाद मरीज एम्‍स में आने ही बंद हो जाएंगे, बावजूद इसके, स्‍पेशल आदेश नि‍कालकर उन्‍हें मरीजों से उल्‍टी सीधी वसूली करने के लि‍ए बाध्‍य कि‍या जा रहा है।

ऐसा नहीं है कि मरीजों के हालात देखते हुए वहां के डॉक्‍टर या प्रफेसर शांत बैठे हैं। डि‍पार्टमेंट के अंदर तो वह इसका वि‍रोध कर ही रहे हैं, बाहर मीडि‍या में भी सबसे इस मामले का जि‍क्र कर रहे हैं। मैंने उत्‍तराखंड में कई पत्रकारों को फोन कि‍या तो सबका यही कहना था कि‍ मामला उनके संज्ञान में है। जब मैंने यह पूछा कि‍ फि‍र कुछ लि‍ख क्‍यों नहीं रहे तो अजीब रहस्‍यमय चुप्‍पी छा जाती है, जैसे कोई उन्‍हें ब्‍लैकमेल कर रहा हो। इन डॉक्‍टरों ने देहरादून से लेकर लखनऊ और दि‍ल्‍ली तक के पत्रकारों को इस अंधेरगर्दी की पूरी सूचना मय सबूतों के दे रखी है, लेकि‍न जि‍स तरह से मीडि‍या के लोग चुप हैं, यही लगता है कि‍ जनता की परेशानि‍यों से उनका कोई लेना देना नहीं है।

एक तो पहले ही पहाड़ में जीवन कि‍सी पहाड़ से कम नहीं। पैसा होता तो पहाड़ की जवानी पहाड़ में ही रहती, मैदानी ढाबों, होटलों में यूं ही जाया न हो रही होती। दूसरे पहाड़ में जो कुछ भी पहाड़ बचा है, उसे भी लूटने की पूरी तैयारी एम्‍स ऋषि‍केश ने कर ली है। जैसे पत्‍थर माफि‍याओं ने पहाड़ को खोद-खोदकर खाली कर डाला, मगर वहां के कथि‍त मेनस्‍ट्रीमी पत्रकार चुप रहने का पैसा लेकर अपना घर-बार बनाते रहे, वही लगता है कि‍ एम्‍स में भी हो रहा है। ऋषि‍केश में लगता है पत्रकार के नाम पर सारे के सारे लोग दलाल ही हैं, वरना एक कारण बताइए कि इतनी बड़ी अंधेरगर्दी, जो महीनों से हो रही है, अभी तक कि‍सी ने एक खबर क्‍यों नहीं सुनी।

रोहिनी गुप्ते की एफबी वॉल से.

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आपको डायबिटीज है या नहीं, यह दवा कम्पनियां तय करती हैं!

Priyabhanshu Ranjan : साल 1997 से पहले फास्टिंग ब्लड सुगर की ऊपरी लिमिट 140 होती थी। फिर WHO ने एक पैनल बिठाया और उसने यह लिमिट 126 कर दी और रातों रात दुनिया की 14 प्रतिशत जनसंख्या डायबिटीज की मरीज हो गई।

फिर 2003 में अमेरिकन डायबिटिक एसोसिएशन ने यह लिमिट 100 कर दी। और फिर से रातों रात भारत की 60 प्रतिशत जनसंख्या डायबिटीज की मरीज बन गई।

आपको पता है कि लिमिट तय करने वाले इन पैनलों के सदस्य कौन हैं? ये हैं दुनिया की बड़ी दवा कंपनियों के कंसलटेंट। इससे क्या पता चलता है? यही कि आपको डायबिटीज है या नहीं, यह दवा कम्पनियां तय करती हैं।

पीटीआई के प्रतिभाशाली पत्रकार प्रियभांशु रंजन की एफबी वॉल से.

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तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, सुर्ती, पान खाने वाले इस वीडियो को जरूर देखें

भारत में तंबाकू का प्रचलन बहुत ज्यादा है. हर दूसरा शख्स किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करता मिल जाएगा. इस कारण से भारत में तंबाकू जनित रोगों के शिकार भी काफी मात्रा में होते हैं. आप अगर किसी भी रूप में तंबाकू लेते हैं, मसलन सिगरेट, गुटखा, पान, सुर्ती, जर्दा आदि तो आपको जरूर यह वीडियो देखना चाहिए. आपको यह वीडियो देखकर टेस्ट करना चाहिए कि आप कहीं मुंह के किसी रोग के शिकार तो नहीं होने जा रहे.

भड़ास4मीडिाय डाट काम के संपादक यशवंत सिंह खुद तंबाकू का सेवन करते रहे हैं लेकिन आजकल उन्होंने इससे तौबा कर लिया है. वह एक डाक्टर मित्र की सलाह पर रोजाना मुंह से संबंधित एक एक्सरसाइज करते हैं. साथ ही यह टेस्ट भी करते रहते हैं कि उनका मुंह नार्मल हुआ या नहीं. तंबाकू सेवन से आपका मुंह असामान्य हो चुका है या नहीं, इसे कैसे सामान्य किया जाए, यह जानने के लिए इस वीडियो को देखें…

https://www.youtube.com/watch?v=Q6v8Gq9x-aU

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कोबरा पोस्ट का ‘ऑपरेशन व्हाईट कोट’ : इलाज के दौरान मरीज भले मर जाए, रेफर करने वाले का कमीशन नहीं मरेगा!

गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज अपनी जिंदगी बचाने के लिए बड़े और नामी अस्पतालों का रुख करते हैं या फिर कहे उन्हे छोटे अस्पताल से बड़े सेंटर के लिए रेफर कर दिया जाता है। लेकिन इन बड़े अस्पतालों में मरीजों को सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने का जरिया समझा जाता है। रेफर करने वाले छोटे अस्पतालों और डाक्टरों को कमीशन देकर ये बड़े अस्पताल मरीजों को अपने यहां रेफर कराते हैं और फिर इलाज, सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट के नाम पर उनसे भारी-भरकम कमाई करते हैं।

कोबरपोस्ट की तहकीकत “OPERATION WHITE COAT” में सामने आया कि Fortis Hospital (Mumbai और बैंगलुरू), Noida के JP Hospital और Metro Hospital, गाज़ियाबाद के Yashoda Hospital और Columbia Asia Hospital (बैंगलुरू की ब्रांच भी), MAX Hospitals (नई दिल्ली में Saket और Patparganj स्थित), Apollo Hospital (नई दिल्ली और बैंगलुरू), BLK Super Speciality Hospital, नई दिल्ली; मुंबई के Nanavati Super Speciality Hospital, Hiranandani Hospital, Asian Heart Institute, Seven Hills Hospital और Jaslok Hospital; बैंगलुरू के Narayana Hrudayalaya College of Nursing और Mallya Hospital जैसे 20 बड़े अस्पतालों में कमीशन या फिर कहे रेफेरल कट का घिनौना काम खुलेआम हो रहा है।

कोबरापोस्ट विशेष संवाददाता उमेश पाटिल एक छोटे अस्पताल का नुमाइंदा बनकर देश के इन नामी बड़े प्राइवेट हास्पिटल्स के कॉर्पोरेट रिलेशन्स हैड, सेल्स एंड मार्केटिंग हैड, मार्केटिंग मैनेजर और असिस्टेंट मैनेजर स्तर के अधिकारियों से मिले और हर जगह पाया कि ये नामी अस्पताल छोटे अस्पतालों और डाक्टरों को मरीज भेजने के एवज में मोटा कमीशन यानि रेफेरल कट देते हैं। कैमरे पर इनके कबूलनामें कुछ इस तरह है:

-मुनाफ़ा कमाने के लिए छोटे अस्पतालों और डॉक्टर को रेफेरल कट यानि कमिशन के तौर पर दस से पेंतीस फीसदी तक कमिशन।

-हर अस्पताल का रेफेरल कट देने का तरीका अलग है।

-निजी प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर को कमिशन कॉन्सल्टेशन फीस के तौर पर दिया जाता है।

-कमिशन के अलावा डॉक्टर को महंगे गिफ्ट भी दिये जाते है।

-रेफेरल के इस काम को अंजाम देने के लिए इन बड़े होस्पिटल्स का विशाल नेटवर्क है।

– MCI Code of ethics Regulations, 2002 Chapter 6 Unethical Acts के मुताबिक कोई physician किसी तरह का gift, gratuity, commission or bonus किसी मरीज को refer या recommend के नाम पर नहीं ले सकता। ये पूरी तरह से गलत है।

इसी कड़ी में सबसे पहले हमारी मुलाक़ात हुई नोएडा के जेपी हॉस्पिटल में डिप्टी मैनेजर (सेल्स एंड मार्केटिंग) अमित कुमार बंदोपाद्धाय से। अमित कुमार ने हमे बताया कि रेडियो थेरेपी में ये 10 परसेंट कमिशन देंगे और कीमो थेरेपी में तो हर साइकिल पर कमिशन दिया जाएगा। यानि जितनी बार मरीज कीमो थेरेपी के लिए जेपी हॉस्पिटल आएगा हर विजिट पर जेपी हॉस्पिटल 10 परसेंट कमिशन देगा। इन्होंने बताया कि चाहे किसी भी बीमारी का मरीज क्यों ना हो, या भले ही इलाज के दौरान मरीज की मौत ही क्यों ना हो जाए लेकिन रेफर करने वाले का कमीशन नहीं मरेगा, उसे हर हाल में कमिशन मिलेगा। आगे अमित ने हमारी मुलाकात जेपी हॉस्पिटल के सीनियर मैनेजर डी.के. भारद्वाज से कराई। जेपी हॉस्पिटल के इन लोगों ने इंटरनेशनल पेशंट पर बीस से पच्चीस परसेंट कमिशन देने की बात भी की।

जेपी हॉस्पिटल के बाद हमारी मुलाकात हुई मेट्रो हॉस्पिटल में असिस्टेंट मैनेजर बिलाल अहमद खान से। बिलाल ने हमे बताया कि इन का कांटैक्ट देश भर में कई सौ डॉक्टर से है जो इन्हे कमिशन के बदले पेशंट रेफर करते है। बिलाल के मुताबिक कमिशन कैश में दिया जाता है और इंटरनेशनल पेशंट पर ये तो तीस से पेंतीस फीसदी तक है। हमारी पेशेंट रेफर की बात पर बिलाल ने तुरंत हमारी मीटिंग अपने कॉर्पोरेट हैड प्रणव सिन्हा से कराई। प्रणव मेट्रो हॉस्पिटलस के 12 अस्पतालों के कॉर्पोरेट रिलेशंस हैड हैं। प्रणव ने हमें 10 परसेंट कमिशन देने की बात की और इस बातचीत में आगे ये भी मालूम चला कि कैसे महज़ 30 हजार के स्टंट पर मेट्रो हॉस्पिटल भारी भरकम खर्च और पैकेज दिखाकर मरीजों से लाखों वसूल रहा है।

OPERATION WHITE COAT में हमारा अगला पड़ाव था दिल्ली के साकेत इलाके में स्थित मैक्स सुपर स्पैशलिटी हॉस्पिटल।यहाँ हॉस्पिटल के मैनेजर बिज़नस डेव्लपमेंट सुमित ने बताया कि वो हमें 10 परसेंट रेफरलकट देंगे और यही इनका फिक्स रेट है।कमिशन की रेट लिस्ट मांगने पर सुमित ने MEDICAL COUNCIL OF INDIA का हवाला देकर हमें कमिशन की लिस्ट देने से मना कर दिया। ज्यादा जानकारी के लिए सुमित ने हमे मेक्स हास्पिटल के एसिस्टेंट मैनेजर मुस्तफा के पास भेजा। मुस्तफा ने हमें बताया कि इनके कॉन्टेक्ट दिल्ली-NCR के करीब 400 डॉक्टरों से हैं। जो इनके यहां कमिशन पर मरीज़ रेफर करते हैं। बतौर मुस्तफा साकेत स्थित मैक्स अस्पताल हर महीने 20 से 25 लाख रुपये कमिशन रेफर करने वाले डॉक्टरों और अस्पतालों को बांटता है। मुस्तफा ने आगे बताया कि रुपया कमाने के लिए कई बार मैक्स सुपर स्पैशलिटी हॉस्पिटल मरीज को बिना जरूरत के भी एक-दो दिन के लिए वेंटिलेटर पर डाल देता है। ताकि बिना कुछ किए ही इनकी मोटी कमाई होती रहे।

कोबरपोस्ट टीम ने आगे रुख किया मैक्स सुपर स्पैशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज का। यहा हमारी मुलाक़ात हुई हॉस्पिटल के डिप्टी मैनेजर बिज़नस डेव्लपमेंट आशीष सिंह से। रेफर के बदले कमिशन के अलावा आशीष ने बताया कि किस बीमारी के मरीज से अस्पताल को सबसे ज्यादा फायदा होता है और इससे रेफर करने वालों की भी खूब कमाई होती है। आशीष के मुताबिक ट्रीटमंट के नाम पर एक ही मरीज को बार बार एड्मिट करने पर हॉस्पिटल और रेफर करने वाले को ज्यादा कमाई होती है। इतना ही नहीं रेफर करने वाले डॉक्टरों को ना सिर्फ मैक्स सुपर स्पैशलिटी हॉस्पिटल मोटा कमिशन देते हैं बल्कि जो डॉक्टर मरीज का इलाज कर रहा है वो भी रेफर करने वाले को कमिशन देता है।

OPERATION WHITE COAT में अगला मुकाम था दिल्ली का सबसे मशहूर इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल। अपोलो हॉस्पिटल के सीनियर मैनेजर मार्केटिंग राम नरेश भगतने बताया कि angioplasty, रेडियो थेरेपी और knee replacement पर 10% कमिशन है, kidney transplant पर कोई fix नहीं है, liver पर 50 हज़ार fix है। इसके अलावा IPT के patient के total bill पर 10% कमिशन मिलेगा। अंतर्राष्ट्रीय मरीजों को रेफर करने पर ये अस्पताल कितना कमिशन देता है। तो इस सवाल का जवाब हमें अपोलो हॉस्पिटल के एसिस्टेंट मैनेजर विपिन शर्मा से मिला। विपिन ने हमें बाहर के देशों से आए मरीजों को रेफर करने पर पूरे इलाज का 15 फीसदी कमिशन देने की बात कही।

पेशंट रेफर करने के बदले कमिशन का कारोबार दिल्ली के BLK Super Speciality Hospital में भी खुले आम चल रहा है। हॉस्पिटल में बतौर सीनियर मैनेजर विनय के मुताबिक दिल्ली के सभी प्राइवेट अस्पतालों में ये खेल जारी है, और इसी खेल के दम पर ये अस्पताल कमाई कर रहे हैं। यही नहीं कमिशन लेन-देने के इस गोरखधंधे ने अस्पातलों के बीच कॉम्टीशन के हालात पैदा कर दिए हैं। कैसे ये अस्पताल रेफर करने वाले डॉक्टरों का कमिशन सेट करते हैं। किस बीमारी के मरीज पर कितना कमिशन देना है ये सब कैसे निर्धारित किया जाता है? इस बारे में भी विनय ने हमें सबकुछ खुलकर बताया। विनय के मुताबिक हॉस्पिटल 12% रेफेरल कट यानि कमिशन देता है। इसके अलावा पंद्रह से बीस हज़ार रुपए बाइपास सर्जरी पर, बारह से पंद्रह हज़ार रुपए स्टंट पर और डेढ़ से दो लाख रुपए लीवर ट्रांसप्लांट पर देते है।

ऑपरेशन व्हाइट कोट के तहत कोबरपोस्ट विशेष संवाददाता उमेश पाटिल ने कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल गाज़ियाबाद का दौरा किया। मलेशिया के प्रसिद्द हेल्थ केयर ग्रुप कोलंबिया एशिया के पूरे एशिया में 28 संस्थान हैं। कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल गाज़ियाबाद के मार्किटिंग हैड सत्यनारायणन के मुताबिक रेफेरल कट हम किसी भी तरह से ले सकते है। इलाज पर होने पर खर्च का 10 परसेंट या फिर फिक्स अमाउंट के तौर पर। महज़ एक मरीज पर 10 परसेंट कमिशन देने वाला ये अस्पताल करीब 7 करोड़ रुपया इसी तरीके से कमाता है। इसके लिए बाकायदा अस्पताल में मार्किंटिंग एक्सपर्ट की टीम है, जो छोटे डॉक्टरों और अस्पतालों में जाकर कमिशन के बदले मरीज रेफर कराती है।

रेफेरल कट का ये खेल फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा में भी धड़ल्ले से चल रहा था। यहाँ हमारी मुलाक़ात फोर्टिस हॉस्पिटल के डिप्टी मैनेजर निशांत चौहान से हुई। निशांत के मुताबिक जिस बीमारी के इलाज के लिए यहां फिक्स पैकेज निर्धारित किया गया है सिर्फ उसी पर कमिशन दिया जाता है। इसके अलावा निशांत ने किस बीमारी पर कितना खर्च और कितने खर्च पर कितना कमिशन दिया जाता है उसकी पूरी रेट लिस्ट भी बताई।

कुछ इसी तरह का हाल कौशांबी गाज़ियाबाद स्थित यशोदा सुपर स्पैशलिटी हॉस्पिटल का भी था। यहाँ के मैनेजर मार्किंटिंग नागेन्द्र की माने तो यशोदा अस्पताल भी एक बिजनेस फर्म की तरह है जिसका मकसद रुपया कमाना है। अगर कोई मरीज एक बार इनके चंगुल में फंस जाए तो ये उसे जल्दी से डिस्चार्ज नहीं करते। जब तक ये उससे मनचाही कमाई न कर लें। बक़ौल नागेन्द्र इस मोटी कमाई के लिए ही तो डॉक्टरों ने इतनी पढ़ाई की है और जो कंपनियां मरीजों के लिए महंगे पार्ट्स बनाती हैं, वो अगर पैसा नहीं कमाएंगी तो खर्चा कैसे चलाएंगी। इसलिए डॉक्टर मरीजों को महंगे इलाज और सर्जरी कराने के लिए बोलते हैं।

दिल्ली एनसीआर के बाद कोबरपोस्ट रिपोर्टर उमेश पाटिल ने मुंबई के होस्पिटल्स की स्थिति भी मालूम करनी चाहिए और रुख किया मुंबई के पोवाई इलाके के मशहूर डॉ एलएच हीरानन्दानी हॉस्पिटल का। यहाँ मैनेजर मार्किंटिंग भगत सिंह ने हमें प्रपोजल तैयार कर उसे ईमेल करने की बात कही। आगे बातचीत के दौरान इन्होंने हमसे मरीजों का ब्यौरा भी पूछ लिया। मसलन हमारे पास किस-किस बीमारी के कितने मरीज़ हैं। जैसे ही हमारे रिपोर्टर ने इनके सवालों का जवाब दिया। ये भी खुल्लम खुल्ला कमिशन की बातें करने लगे।

ऑपरेशन व्हाइट कोट में फोर्टिस हीरानंदानी हॉस्पिटल की भी सच्चाई सामने आई।फोर्टिस हीरानंदानी हॉस्पिटल के सीनियर मैनेजर मार्किंटिंग शुभेंदु भट्टाचार्य ने रेफेरल कट का पूरा रेटकार्ड हमारे सामने कंप्यूटर पर खोल दिया। शुभेंदु भट्टाचार्य ने बताया कि इनके तार 200 से 300 डॉक्टरों से जुड़े हैं। जो इनके अस्पताल को मरीज़ रेफर करते हैं और बदले में इनसे मोटा कमिशन भी वसूलते हैं। इसके अलावा शुभेंदु खुद भी मानते हैं कि जिस काम को ये अंजाम रहे हैं वो पूरी तरह से गलत और कानून के खिलाफ है।

अगला पड़ाव था दिल की गंभीर बिमारियों के इलाज के लिए मशहूर मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स इलाके का ASIAN HEART इंस्टीट्यूट। यहाँ एसिस्टेटं मैनेजर मार्किंटिंग एंड सेल्स मिलिंद मेहता ने न सिर्फ रेफेरल कट के बारे में बताया बल्कि उन छोटे अस्पतालों में से एक ऐसे अस्पताल का भी जिक्र किया जो इन्हें कमिशन पर महीने भर में 40-50 लाख का बिजनेस (पेशेंट रेफर) देता है।

मुंबई के अँधेरी इलाके में बना मशहूर सेवन हिल्स हॉस्पिटल, हमारा अगला मुकाम। अस्पताल के एसिस्टेंट जनरल मैनेजर शिव कुमार ने रेफेरल कट के बारे में खुल कर बात की। इसके बाद सेवेन हिल्स हॉस्पिटल के सीनियर मैनेजर वीरेन्द्र ने हमें बताया कि इनका 1500 डॉक्टर्स और करीब 250 छोटे अस्पतालों से टाई अप है। जो इन्हें मरीज सप्लाई करते हैं और बदले में ये उन्हें मोटा कमिशन देते हैं। यही नहीं वीरेन्द्र ने आगे बताया कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने इन्हें हर महीने 13 करोड़ की कमाई का टारगेट भी दे रखा है।

ऑपरेशन व्हाइट कोट के तहत ये है मुंबई के वीले पार्ले स्थित नानावती सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल। क्या रेफेरल कट की फेहरिस्त में ये अस्पताल भी शुमार है ? अस्पताल में खुद को रेफरेल टीम का हेड बताने वाले अरविंद मौर्या ने हमे अपना कमिशन एजेंट (रिटेनर) बनने का ऑफर दे दिया। यहां तक कि इसने हमें बताया कि इनके साथ काम करने पर हम हर महीने ढाई से तीन लाख रुपये कमा सकते हैं। साथ ही अरविंद ने बताया कि इस काम में कई डाक्टर भी शामिल है।

कोबरपोस्ट टीम ने मुंबई की पेडर रोड स्थित जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर का रुख किया। यहां मार्केकिंग डिपार्टमेंट में काम करने वाले सुबोध ने रेफेरल कट का रेटकार्ड बताया। मसलन लीवर ट्रांसप्लांट के पेशेंट भेजने पर कमिशन के तौर पर पूरा एक लाख रुपया ये अस्पताल देता है। मुंबई के बाद ऑपरेशन व्हाइट कोट में हमारा अगला मुकाम था बैंगलुरू। बैंगलुरू के फोर्टिस हॉस्पिटल के मार्किंटिंग मैनेजर परवेज सज्जाद ने रेफेरल कट के नाम पर तुरंत हमें कहा Than u r make me a right person..i will handle the cases यानी आपने एकदम सही इंसान को चुना है, मैं आपके सारे मामले हैंडल कर लूंगा। फोर्टिंस हॉस्पिटल के मैनेजर यूनिट सेल्स एंड मार्किंटिंग ने हमें टोटल बिल पर 5 परसेंट कमिशन देने की बात कही। जिसमें किसी तरह की कोई कैपिंग भी नहीं होगी। कैमरे पर इन्होंने ये भी कबूल किया कि इनका टाईअप दूसरे अस्पतालों से भी है। जो इन्हें मरीज भेजते हैं और बदले में इनसे मोटा कमिशन लेते हैं।

दिल्ली की ही तर्ज पर बैंगलुरु में भी अपोलो हॉस्पिटल का बड़ा नाम है। बैंगलुरू के अपोलो हॉस्पिटल में हमारी मुलाकात हुई यहां के सीनियर मैनेजर नितेज से, जब हमने इन्हें मरीज रेफर करने की बात कही और बदले में रेफरलकट के बारे में पूछा, तो इन्हें हमसे कहा कि ये अपने सीनियर से पूछकर हमें बताएंगे। हालांकि जब हमारे रिपोर्टर ने इनसे पूछा कि क्या बाकी अस्पतालों के साथ भी इनका टाईअप है, क्या ये उन्हें कमिशन देते हैं। जवाब में सीनियर मैनेजर साहब ने भी कह दिया कि ये हमारा बिजनेस है।

बैंगलुरू के अपोलो हॉस्पिटल में सबसे अलग नियम कानून हैं। यहां 10 मरीज भेजने के बाद ही अस्पताल से इकट्ठा कमीशन मिलता है। ये बात खुद हॉस्पिटल के सीनियर मैनेजर ने हमारे कैमरे पर कबूल की। कमिशन का पैसा यहां न चैक से दिया जाता है और न ही यहां कैश चलता है। 10 मरीजों के इलाज पर जो भी कमिशन बनेगा उसका पूरा पैसा इकट्ठा NEFT के जरिए आपके खाते में पहुंच जाएगा।

ऑपरेशन व्हाइट कोट में आगे जा पहुंचे बैंगलुरू के हेब्बल इलाके में बने कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल । अस्पताल के मैनेजर कुमार हिरेमत से मरीज रेफर करने के बदले रेफरलकट पर खुलकर रेटलिस्ट पर बात की। कुमार ने बातचीत में साफ कह दिया कि हॉस्पिटल सात परसेंट कमिशन सिर्फ उन्हीं अस्पतालों और डॉक्टर्स को देता हैं जिनसे इनका टाईअप यानी डील हो चुकी है।

बैंगलुरू के नारायणा हृदयालय कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग में भी कुछ इसी तरह का खेल चल रहा है। यहां हमारी मुलाकात हॉस्पिटल के मार्किटिंग मैनेजर एंथनी सग्याराज से हुई। ये हमें हर मरीज पर 10 परसेंट कमिशन देने को राजी हो गए। साथ ही इन्होंने हमें बताया कि कमिशन की जो रकम रेफर करने वाले डॉक्टर को दी जाएगी, उसे विजिटिंग कंसलटेंसी फीस का नाम दे दिया जाएगा। इसके अलावा इन्होने आगे कहा कि ये एक और अस्पताल की मार्किंटिंग टीम से हमारी सेटिंग करा देंगे।

बैंगलुरू में माल्या हॉस्पिटल एक जाना माना नाम है। कोबरापोस्ट टीम की जैसे-जैसे माल्या ह़स्पिटल के बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर टी.सोमा शेखर से हमारी बातचीत आगे बढ़ी…हकीकत परत-दर-परत खुलती चली गई। जो शख्स 5 मिनट पहले तक ये कह रहा था कि इनके अस्पताल में कमिशन और रेफरल कट का कोई सिस्टम नहीं है, वो 5 हजार, 10 हजार और 15 हजार तक कमिशन मिलने की बात कहता दिखाई दिया। आगे बातचीत में इस शख्स ने हमसे कहा कि अगर हम अस्पतालों में सर्जरी से जुड़े केस भेजेंगे तो बदले में डॉक्टर हमें अच्छा कमिशन भी देंगे। यहां डॉक्टर ही रेफर करने वाले डॉक्टरों को कमिशन देते हैं।

ये हाल देश के किसी एक अस्पताल का नहीं बल्कि खास बात ये है कि बड़े शहरों के नामी हॉस्पिटल्स में ये धंधा खुलेआम चल रहा है। छोटे अस्पतालों की बड़े हॉस्पिटल्स से मरीजों पर डील होती है। जो मरीज यहां इलाज कराने आते हैं उन्हें भी कानों कान इस बात की भनक तक नहीं लगती कि उनका सौदा हो चुका है। वो बेचे जा चुके हैं। यहां तक कि इन्हें बेचने वाले को जो पैसे दिए जाएंगे वो भी इन्हीं की जेब से निकाले जाएंगे। ये भी मरीजों को पता नहीं लग पाता। हैरत की बात ये है कि हॉस्पिटल मैनेजमेंट के साथ-साथ डॉक्टर भी इस काली कमाई के धंधे में शामिल हैं।

न्यूज़ डेस्क, कोबरापोस्ट
Date: 1 Sep 2017


पूरी स्टोरी पढ़िए, एक्सक्लूसिव वीडियो के साथ, नीचे दिए कोबरापोस्ट के लिंक पर क्लिक करिए…

https://hindi.cobrapost.com/braking-news/cobrapost-expose-operation-white-coat/85449

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कोबरा पोस्ट के स्टिंग में फोर्टिस, मेट्रो, यशोदा, कोलंबिया, मैक्स, अपोलो, नानावती समेत दर्जनों अस्पताल हुए नंगा

कोबरा पोस्ट वाले अनिरुद्ध बहल की टीम ने इस बार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जबरदस्त स्टिंग आपरेशन किया है. इस स्टिंग ने कई बड़े नामी गिरामी अस्पतालों के चेहरे से नकाब उतारने का काम किया है. प्राइवेट अस्पताल वाले मरीज रिफर करने पर किस तरह डाक्टरों और छोटे अस्पतालों को अच्छा खासा कमीशन देते हैं, यह स्टिंग आपरेशन का हिस्सा है. यह कमीशन मरीज के मत्थे मढ़ा जाता है. कोबरा पोस्ट की तरफ से इस स्टिंग को लेकर जारी प्रेस रिलीज इस प्रकार है…

Cobrapost unearths a thriving racket in which all major private hospitals hand out handsome commission to doctors and smaller hospitals for referrals, at the expense of patients

New Delhi: In a long investigation Operation White Coat spanning three mega-cities of Delhi-NCR, Mumbai and Bangalore and covering 20 major private multi-specialty hospitals, Cobrapost has unearthed a racket of referrals in which these hospitals offer commission ranging between 10 and 30 per cent to doctors and smaller hospitals or nursing homes. Undertaken by Cobrapost Special Correspondent Umesh Patil, the investigation exposes almost all marquee names among private health care providers, namely, Fortis Hospital (with a branch each in Mumbai and Bangalore), JP Hospital, Metro Hospital in Noida;  Yashoda Hospital and Columbia Asia Hospital (with a branch in Bangalore)  in Ghaziabad; MAX Hospitals (in Saket and Patparganj), Apollo Hospital  (with a branch in Bangalore), BLK Super Speciality Hospital, all in Delhi; Nanavati Super Speciality Hospital, Hiranandani Hospital, Asian Heart Institute, Seven Hills Hospital and Jaslok Hospital, all in Mumbai; and Narayana Hrudayalaya College of Nursing and Mallya Hospital both in Bangalore.

In the course of this undercover investigation, Cobrapost Special Correspondent interviewed marketing officials, not less than the rank of assistant managers, of these hospitals who without exception candidly admitted on camera to offering handsome rewards to doctors, and smaller hospitals, who send their patients to these super-specialty hospitals for serious ailments. These confessions can be summed as follows:

-To make more business out of patients’ miseries, all these hospitals offer handsome commissions to individual doctors, nursing homes and smaller hospitals, which cannot handle serious ailments, on all referrals.

-Each hospital has an elaborate process for such referrals and pay-offs thereof.

-Commissions to individual doctors are paid out to them as consultation fee.

-In addition to regular cuts, some of these hospitals give such doctors expensive gifts.

All these hospitals have a well-oiled network of doctors and small nursing homes and hospitals, to help them generate a steady business out of patients’ needs for specialized treatment.

Well, they also know that this is a malpractice under the MCI guidelines, yet they do not blink an eye while indulging in it.

It should be kept in mind that the MCI guidelines specifically prohibit the disbursement of commission by hospitals for patients referred to them. The MCI Code of Ethics Regulations, 2002 Chapter 6 Unethical Acts are as follows:

6.4 Rebates and Commission

6.4.1 A physician shall not give, solicit, or receive nor shall he offer to give solicit or receive, any gift, gratuity, commission or bonus in consideration of or return for the referring, recommending or procuring of any patient for medical, surgical or other treatment. A physician shall not directly or indirectly, participate in or be a party to act of division, transference, assignment, subordination, rebating, splitting or refunding of any fee for medical, surgical or other treatment.

Their sole motive is to soar up their profits by hook or by crook, and in the process they dole out crores of rupees in referral cuts, apparently at the expense of their gullible customers who happen to be patients and need care. For instance, JP Hospital Deputy Manager (Sales and Marketing) Amit Kumar Bandopadhyay and Sr. Manager D. K. Bhardwaj both tell us their hospital gives a 10 per cent cut on patient referrals and has provisions for it.

Pranav Sinha, Corporate Communications Head of Metro Hospital and his colleague Assistant Manager (Corporate Affairs) Belal Ahmed educate us on how much commission his hospital pays out for referrals for procedures like stent implant, angiography, valve replacement, hip replacement, radiotherapy and chemotherapy, among others.

Sr. Manager Sumit of Max Hospital, Saket says, “10 per cent hota hai aur wo excluding … (We give 10 per cent [cut] and that is excluding …),” Sumit informs us but refuses to give us the rate list: “Yaar wo main officially to de nahi sakta (I cannot give you that list officially).” But there is one condition. One will be eligible for this referral cut only when he is informed three hours before a patient is admitted. According to Assistant Manager Mustafa, the hospital has about 400 doctors who provide it referrals and if what Mustafa says is true the hospital pays about Rs. 20–25 lakh every month in referral cuts.

Deputy Marketing Manager Ashish at Max’s Patparganj Unit says: “10 per cent milega lekin excluding medicine aur wo bhi agar ek patient hoga …uspe capping hogi 30,000 ki (You will get a 10 per cent cut, excluding medicine [bill] if there is one patient … but there is a capping of Rs. 30,000).” According to Ashish, even doctor who conducts a surgery gives payout for such referrals.

Sr. Manager Ram Naresh Bhagat of Indraprastha Apollo Hospital, Delhi tells us that we can get 10 per cent cut on referrals for almost all medical procedures, and the payments are made by cheque favouring only those with whom the hospital will have entered into an agreement. Apollo also receives patients from abroad, and if you refer a foreign patient to them, you can make a neat cut of 15 per cent.

Next, we call on Vinay, Senior Manager with the BLK Super Speciality Hospital on Pusa Road in Delhi, to check if our tip-off had any substance. It does not take much time to get Vinay talking, who tells us we can get a 12 per cent of referral cut on total bill, excluding medicines.

Situated on NH 24 in Ghaziabad, Columbia Asia Hospital’s Marketing Manager Satyanarayana does not have any qualms while telling us he is flexible on referral cut: “Bada case hai aap bolo total bill ka aap 10 per cent bolte hain … nahi aisa nahi waisa chahiye … humko 40 chahiye 50 chahiye meri taraf se main toh flexible hoon”

Deputy Manager Nishant Chauhan of Fortis Hospital, Noida spills it all for us: “Bhai JP de sakta hai dekho competition toh sabka hai humara toh yahi rahega 10 per cent hum log dete hain wahi humara rahega agreement (Brother, JP [Hospital] might offer you more. No doubt, there is competition but we give 10 per cent and this will be our agreement).” At this hospital, according to Chauhan, every procedure package carries a fixed referral cut, which ranges from Rs. 10,000 to Rs. 15,000.

When we meet Nagender, Senior Marketing Manager of Yashoda Hospital, Ghaziabad, he tells us we will get a referral cut of 10 per cent on the bill raised excluding medicine expenses. Now, what Nagender says reveals is the demonic face of the medical practitioners at its ugliest: “Business revenue se related hai saari cheejein samajh rahe ho kisi ko knee replacement bol diya doctor kahega karao karoa … zaroorat nahi hai aise hi nakal lo time … ye toh hai ab ye batao doctor nahi karega to uski degree fail hai na kaahe ko aaya wo parh-likh kar itna … toh jis company ne ye jo knee replacement ke wo bekar hain unki manufacturing bekar hai unke bhi … khali … toh toh chain bani hui hai poori jo stent supply karte hain unke bhi aise hi …

Bhagat Singh, Manager, Dr. L.H. Hiranandani Hospital in Powai, Mumbai, comes up with his offer of referral cut on knee replacement: “Usmein aapko 15 se upar hi milega matlab main toh bol raha hoon 15 ke upar (You will get a cut of Rs. 15000 on that. I am telling you).” In case the patient has to get both his knees replaced, the cut will be almost double. “Wo mil jayega abhi start karo (You will get that. You just start it),” Singh assures. Then he also reveals how much we will get in other procedures.

Senior Manager at Fortis Hiranandani Hospital, Mumbai Shubhendu Bhattacharya advises us to bring surgical cases: “Main aapko bata deta hoon agar surgical case rahega toh theek rahega (I should tell you it is better if you refer surgical cases).” The reason is they offer 15 per cent referral cut in such cases. Similar is the case with procedures such as valve replacement. Bhattacharya rattles off rates of referral cuts for various procedures.

Claiming to be the best in heart care, Mumbai’s Asian Heart Institute Hospital’s Assistant Manager Milind Mehta told that the hospital has more than 100 doctors on its panel who send in patients. However, the hospital offers referral cut of 2–3 per cent only.

Assistant General Manager Shiv Kumar and then Senior Manager Virendra of Seven Hills Hospital, Mumbai says that hospital has a tie-up with about 1500 doctors and 250 smaller hospitals to help keep its cash registers always ringing, and there is 10 per cent referral cut for all to be collected.

Nanavati Super Speciality Hospital, Mumbai has a separate referral team to deal with all kinds of referrals. Arvind Maurya, Head of the Referral Team, tells us: “Hospital ka aapka jo tie-up hai hospital se tie-up kar sakte hain hum log jo bhi patient ayega uspe sirf durgs disposable aur implant minus karke 10 per cent mil jayega aapko

The famed Jaslok Hospital located in Pedar Road in Mumbai is no exception to this referral racket. Markting  Manager Subodh tells us that before referring a patient to Jaslok, they need to be informed. Here, one gets 10 per cent cut on investigation bills apart from the regular medical procedure employed for an IPD patient.

Fortis Hospital, Bangalore’s Assistant Manager Pravez Sajjad tells us we have approached the right person as he deals with referral cases. He explains: “See it [sic] everything depends upon the bill … referral cut jo hota hai … normally we make it on 5% on the total bill.” The hospital has tie-ups with medical practitioners and small hospitals and nursing homes.

When Cobrapost Correspondent asks Nitej Senior Manager, Apollo Hospital, Bangalore in what mode his referral cut will be paid and in how many days, Neetej enlightens in these no uncertain words: “NEFT … we have […] ten patients has to refer.”

Columbia Asia Hospital, Bangalore Marketing Manager, Kumar Hiramat has a fabulous terminology to define this kind of arrangements of mutual benefit: business to business tie-up. Kumar explains how we should move about the deal: “Monthly jaise aap patient bhejte hain referral letter ke saath bhejna aur idhar admission hoga discharge hone ke baad hum log bill forward kar denge usko apko ek invoice daal kar bhejna hai itna bill hua hai humara business to business agreement agreed percentage

Our conversation with Marketing Manager Anthony Sagayaraj of Narayana Hridaylaya Hospital in Banglore can be summed up in these words in which he explains how we will be given our referral cut of 10 per cent.

Soma Sekhar, Business Development Manager of Mallya Hospital in Banglore reveals all about this shady aspect of this business. Listen to what he says: “See if the patient get admitted 1lakh may be the approximately the patients bill out of which some 15 or 20 thousand the upper charges including … and everything procedure approximately 20,000 in that 20 he is going to share the … three specialty I will take the responsibility … oncology, cardiology and hip replacement.”

Flouting all ethics of a noble profession and the MCI guidelines that govern the conduct of this profession across India, such a malpractice is symptomatic of the rot that has set in with the government having unleashed corporate greed on a human need as basic and fundamental as health care. We all know doctors who ask their patients to undergo a myriad of tests, not always necessary, to arrive at a diagnosis, get a handsome cut ranging anything from 20 per cent to 40 per cent on every referral they make to various pathology labs across the country.  Now, if the professional in white coat, who you trust with your life and limb, refers you to a super-specialty hospital, his intentions may not be as pious as you may think.
It was high time government agencies and MCI took note of such malpractices.

News Desk, cobrapost.com

Date:01 Sep 2017

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https://www.cobrapost.com/expose/cobrapost-expose-operation-white-coat/29152

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स्वाइन फ्लू को जानें और इससे ऐसे बचें

स्वाइन फ्लू। जैसा कि नाम से बिदित है यह सूअरों से मनुष्य तक संक्रमित होने वाला रोग है| यह वायरल डिजीज है जिसका आउटब्रस्ट नम बरसाती मौसम में होता है| इस रोग का कारक एच1 एन1 वायरस है, यह दुनिया के हर उस हिस्से में हो सकता है| जहां बारिश हरियाली लेकर आती है वही कूड़े-करकट का निस्तारण ना हो पाने से गंदगी का अंबार भी लगता है और वहां सूअर भी अपना भोजन खोजने भटकते रहते हैं। ऐसे में वो संक्रमित होते हैं जिनसे यह वायरस मनुष्य तक पहुंच सकता है| बाद में मनुष्य स्वयं ही इस एपिडेमिक का वाहक बन जाता है|

प्रभावित होने वाले जीव- सूअर एवं मनुष्य

संक्रमण की विधि -यह वायरस प्रभावित सूअर अथवा मनुष्य के छींकने खांसने के साथ बाहर आता है और संपर्क में आए मनुष्य को आक्रांत करता है|

स्वाइन फ्लू के लक्षण –

1-प्रथम अवस्था- सामान्यतः सामान्य सर्दी जुकाम, बुखार, गले में खराश, छींक आना, बदन दर्द, पेट दर्द, उल्टी दस्त लगना|

2-द्वितीय अवस्था अथवा प्रोग्रेसिव टाइप- यदि चार-पांच दिन तक जुकाम न खत्म हो और उपरोक्त सारे लक्षण एवं खांसी व ज्वर तीव्र हो जाएं उसे प्रोग्रेसिव अथवा द्वितीय अवस्था माना जाता है|

तृतीय अवस्था अथवा कॉम्प्लिकेटेड टाइप- यदि सही समय पर सही चिकित्सा ना हो पाया हो और रोग बढ़ता रहे तो स्वसन तंत्र बुरी तरह प्रभावित होकर फेफड़ों की कार्यक्षमता घट जाती है|  न्यूमोनिया डेवलप कर जाता है, ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है  ,उल्टी और दस्त, पेट में दर्द असहनीय अवस्था तक बढ़ सकता है ,जिससे डिहाइड्रेशन  और बाद में रीनल फेल्योर भी संभव है|

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार स्वाइन फ्लू में मृत्यु दर मात्र 0.4 परसेंट है जो कई अन्य संक्रामक रोगों की अपेक्षा बहुत ही कम है| यह ऐसा रोग नहीं है जिससे बहुत ज्यादा भयभीत हुआ जाए|

बचाव के उपाय- नमी, गंदगी और भय इस रोग को बढ़ावा देते हैं| यदि हम अपने आसपास सफाई और जल निस्तारण का समुचित ध्यान दें तो  यह रोग नियंत्रित रहेगा| भय व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को घटाती है जो किसी भी रोग को आमंत्रित करने का कारण बन सकती है| यह वायरस सख्त और सपाट सतह पर 24 से 48 घंटे तक जीवित रह सकता है कपड़ों पर 8 घंटे तक एवं हाथ पर 3:00 से 5:00 मिनट तक अतः दूसरे की मोबाइल फोन कीबोर्ड दरवाजे के हैंडल छू कर हाथों को साबुन अथवा अल्कोहल से अवश्य धोएं| जुकाम से पीड़ित व्यक्ति मास्क अवश्य लगाएं|

भय मुक्त रहकर व्यायाम प्राणायाम और अच्छे पौष्टिक भोजन से अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने की जरूरत है|

चिकित्सा- रोग पूर्व बचाव के लिए  –

एलोपैथी में टीकाकरण

आयुर्वेद में तुलसी गिलोय अदरक आंवला का प्रचुर मात्रा में सेवन

होम्योपैथी में भी बचाव की औषधियां है स्वाइन फ्लू होने से पूर्णतः रोक सकती हैं | वह है- इन्फ्लुएंन्जिनम एवं आर्सेनिक एल्ब इनकी  200 शक्ति की एक एक खुराक दो दो दिन के अंतर पर संक्रमण काल में तीन चार बार लिया जा सकता है| एक अन्य तीसरी दवा जिसके लिए होम्योपैथिक मटेरिया मेडिका में लिखा है की यह हर तरह के फ्लू की प्रतिरोधक औषधि है वह है आसिलोकोकिनम 200 (Oscilococcinum)

रोग हो जाने पर-

रोग हो जाने की अवस्था में लाक्षणिक चिकित्सा पद्धति होने के कारण होम्योपैथी सबसे ज्यादा सक्षम और समृद्ध है| एकोनाइट नक्स वोमिका, ब्रायोनिया, एलियम सीपा, जेल्सीमियम, आर्सेनिक एल्बम, इपिकाक, लाइकोपोडियम, यूपेटोरियम पर्फ, ऐन्टिम टार्ट, हिपर सल्फ, स्पाइडोइस्पर्मा, हिपेटिका, डलकामारा नेट्रम सल्फ आदि विभिन्न होम्योपैथिक औषधियां अलग-अलग लक्षणों पर त्वरित एवं प्रभावपूर्ण असर डाल कर इस रोग को पूर्णतया खत्म कर सकती हैं|

एम.डी. होमियो लैब प्रा. लि. महाराजगंज यू.पी. ने तीन ऐसे पेटेंट दवाएं बनाई है जिन्हें अन्य दवाओं के साथ देकर स्वाइन फ्लू को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है| वह हैं नो कफ सिरप, पाइरेक्सिया सिरप एवं एकनिल बाम|

डॉ एमडी सिंह
प्रबंध निदेशक
एमडी होमियो लैब
9839099261, 9839099251

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झूठी खबर छापने वाला दैनिक जागरण थूकने के बाद फौरन चाटने लगता है!

Yashwant Singh : सुबह सुबह एक फोन आया. आवाज आई- मैं मनीष राय बोल रहा हूं, मऊ से. मैंने कहा- बोलिए. मनीष जी ने अपना परिचय दिया और जो कुछ बताया उसे सुनकर मैं सन्न रह गया. आखिर दैनिक जागरण जैसे बड़े अखबार अगर इस तरह की गिरी हरकत और गैर-जिम्मेदार हरकत करेंगे तो इस देश में मीडिया की बची खुची प्रतिष्ठा में खत्म हो जाएगी. मनीष एक जमाने में पत्रकार हुआ करते थे. फिर वह राजनीति में आ गए और ब्लाक प्रमुख बन गए. इसके बाद उन्होंने एक ट्रामा सेंटर खोला. दैनिक जागरण में उनके ट्रामा सेंटर से संबंधित खबर छपी कि वहां मरीज की किडनी निकाल ली गई.

मनीष राय ने खुद डीएम को पत्र लिखकर मरीज की लाश कब्र से निकाल कर पोस्टमार्ट कराने का अनुरोध किया ताकि उन पर लग रहे आरोप-दाग की सत्यता सामने आ जाए. परिजनों और अस्पताल प्रशासक दोनों की मांग को देखते हुए कब्र से लाश निकलवा कर डाक्टरों के एक पैनल ने पोस्टमार्टम किया और बताया कि किडनी सलामत है. जब दैनिक जागरण की ब्रेकिंग न्यूज फर्जी साबित हो गई तो जागरण के पत्रकारों ने थूक कर चाटने का काम शुरू किया. इन्होंने छापा कि किडनी गायब नहीं थी.

मनीष राय का कहना है कि किसी की इज्जत एक झूठी खबर से कैसी उतारी जाती है और उसके ब्रांड इमेज को किस तरह बर्बाद किया जाता है, यह इस घटना से जाना जा सकता है. उन्होंने कहा कि वे दैनिक जागरण प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा करने का मन बना रहे हैं. इस मामले को लेकर वह प्रेस काउंसिल और कोर्ट दोनों जगह जाएंगे और झूठी खबर चलाने वाले पत्रकारों को सबक सिखाएंगे.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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सिजेरियन का सच

Ila Joshi : जब तक सिजेरियन तरीके से प्रसव कराने की तकनीक हमारे देश में नहीं थी, या कहना चाहिए कि जब तक ये तरीका बेहद आम नहीं बना था तब तक नॉर्मल डिलीवरी को लेकर जितनी आशंकाएं डॉक्टर आज आपको गिनाते हैं ये लगभग नामौजूद ही थीं। सिजेरियन डिलीवरी से जुड़ी डिलीवरी के बाद की कॉम्प्लिकेशन के बारे में अगर आप अंजान हैं तो ज़रूर पढ़ लें क्योंकि ये फेहरिस्त बेहद लम्बी है।

पिछले एक दशक में जिस तरह से सिजेरियन तरीके से प्रसव के आंकड़े बढ़ रहे हैं उससे तो ये लगने लगा है कि कुछ समय बाद यदि कोई भारतीय औरत नॉर्मल डिलीवरी से बच्चा पैदा करती है तो ये ख़बर बनेगी। कुछ बेहद समझदार लोग ये तर्क भी देते हैं कि नई लड़कियां लेबर पेन से बचने के लिए सिजेरियन तरीका अपनाती हैं तो उन महान लोगों को पता होना चाहिए कि सिजेरियन के बाद ज़िंदगी भर जो उन लड़कियों को झेलना पड़ता है उसमें कोई भी थोड़ा बहुत समझदार इंसान अपनी इच्छा से इस विकल्प को कभी नहीं चुनेगा। सरकारी अस्पतालों के बिगड़ते हालात, अच्छे डॉक्टरों की उन सुविधाविहीन अस्पतालों में काम करने के प्रति उदासीनता और निजी अस्पतालों की बढ़ती संख्या ने एक नया बाज़ार खड़ा किया है।

ऐसे में बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए मेडिकल इनश्योरेंस कोई लक्ज़री नहीं एक बुनियादी ज़रूरत बन गई है। आए दिन हम अख़बारों में, टीवी में इस तरह की ख़बरें पढ़ते देखते हैं कि अस्पताल ने केस बिगाड़ दिया, कुछ नहीं था लेकिन दुनियाभर के टेस्ट करवा दिए, डिपाजिट न दे पाने की हालत में मरीज़ को एडमिट नहीं किया, बकाया न अदा कर पाने तक बॉडी देने से इंकार कर दिया। और ये सब केस अपवाद नहीं हैं, दुर्भाग्यवश ज़्यादातर मामलों में ऐसा ही होता है। एक अनुभव तो निजी है जिसमें डिपाजिट का पैसा मरीज़ के डिस्चार्ज होने के 100 दिन बाद मिला वो भी जब सैंकड़ों तकादे दिए गए। इसी बाज़ार का एक अहम हिस्सा है सिजेरियन तरीके से प्रसव कराना।

आम तौर पर प्रसव के समय सभी लोग थोड़े टेंशन में होते हैं ऐसे में अचानक डॉक्टर कहे कि सिजेरियन करना पड़ेगा तो अमूमन लोग उस वक़्त तर्क न कर सकने की स्थिति में हाँ कह देते हैं और इसी का फ़ायदा ये बाज़ार उठाता है। गर्भ के नौ महीनों में रेगुलर चेकअप के दौरान डॉक्टर का ज़ोर इस बात पर होना चाहिए कि कैसे होने वाली माँ स्वस्थ रहे जिससे सिजेरियन की ज़रूरत न ही पड़े।

इसी बीच बहुत से ऐसे ख़ास संस्थान/अस्पताल सामने आने लगे हैं जो नॉर्मल डिलीवरी कराने के लिए बनाए गए हैं। लेकिन इनमें से अधिक्तर का प्रोसीजर एक आम इंसान की आर्थिक हैसियत से बाहर है सो ज़्यादातर लोगों के पास ये विकल्प नहीं। ऐसे में ये ज़रूरी हो जाता है कि आप निजी तौर पर ख़ुद को जागरूक रखें, नौ महीने के समय में आपके पास पर्याप्त समय है एक अच्छा डॉक्टर और अस्पताल ढूंढने का। क्योंकि अगर इस मसले पर आप ख़ुद लापरवाह रहेंगे तो इस बाज़ार को फलने फूलने का मौका आप ख़ुद दे रहे हैं। वैसे मैं सिस्टम पर सवाल करना चाहती हूं लेकिन क्या फ़ायदा दस लाइनें ज़्यादा लिखकर, क्योंकि जिस देश में धर्म के नाम पर चंदा मिलना आसान है लेकिन सभी सुविधाओं से लैस ग़रीबों के लिए एक मुफ़्त अस्पताल बनाने की बात कोई सोचता तक न हो तो वहां सिस्टम को सवाल करने से कौन सा आप लोग जागने वाले हैं।

रंगकर्मी, पत्रकार और एक्टिविस्ट इला जोशी की एफबी वॉल से.

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नेपाल में बाबा रामदेव के छह प्रोडक्ट लैब टेस्ट में फेल, हटाने के निर्देश

बाबा से व्यापारी बने रामदेव की दिव्य फार्मेसी के 6 उत्पादों को नेपाल सरकार ने बाजार से हटा लेने के निर्देश जारी किये हैं. इस बाबत बाकायदा अख़बारों में नोटिस निकालकर इन्हें बेचने पर रोक लगाई गई है. वज़ह है इन प्रोडक्ट्स का जीवाणु टेस्ट में असफल होना. इससे पहले भारत में भारतीय सेना के लैब टेस्ट में रामदेव के प्रोडक्ट फेल होने से सेना ने अपनी कैंटीन से प्रोडक्ट्स हटा लिए थे और बिक्री पर रोक लगा दी थी.

ये है नेपाल के अखबार में प्रकाशित नोटिस…

फेसबुक यूजर दिनेश कुमार चमोली का कहना है कि फार्मा कंपनियों का एनालिसिस प्रोटोकॉल स्टैण्डर्ड नॉर्म्स पर होता है. फिर ये प्रोडक्ट कभी भारत में फेल क्यों नहीं हुए? ये सोचने की बात है. एक अन्य फेसबुक यूजर Kamal Kant का कहना है- ”रामदेव एक पूंजीपति से भी ज्यादा लूट रहा है, क्योंकि इसने तो धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाकर भी अपना उल्लू सीधा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. इसके द्वारा संचालित अवैज्ञानिक चालें अपराध की श्रेणी में आती हैं.”

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भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की योगी सरकार की नीति को मुंह चिढ़ाता एक सरकारी अस्पताल

प्रदेश भर में चल रहे राजकीय आर्युवेदिक और यूनानी चिकित्सालय न सिर्फ बदहाल हैं बल्कि लूट के अड्डे बने हुए हैं। इन अस्पतालों में दसकों से तैनात चिकित्सक और कर्मचारी दलाली की मलाई काट रहे हैं। इन अस्पतालों को दवा आपूर्ति से लेकर अन्य सुविधाओं के नाम पर मिलने वाले करोड़ो का बजट किसके पेट में जा रहा है, ये इन अस्पतालों में जाकर वहां के हालात और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को देखकर समझा जा सकता है। जौनपुर के शाहगंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय इन दिनों बाबू, डाक्टर और कर्मचारियों की मिलीभगत से खुली लूट का केन्द्र बना हुआ है। दवाओं की आपूर्ति से लेकर अन्य मामलों में यहां बड़ी खामियां है। यहां मरीजों का कल्याण सिर्फ कागजों पर हो रहा है।

बसपा से भाजपा में गये और फिलहाल आयुष मंत्री बने धर्म सिंह सैनी के साथ कई किस्म के आरोपों से घिरा बाबू इशरत हुसैन (चश्मे में, तीर से निशान बना हुआ है)।

जौनपुर के शाहगंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में पिछले 25 वर्षों से तमाम स्थानांतरण नीति को ताक पर रखकर इशरत हुसैन नामक एक बाबू लगातार अपनी मनमानी चला रहा है। इसने तो पूरे कार्यालय को ही कचहरी के पास हुसैनाबाद से हटाकर एक वर्ग विशेष की आबादी वाले इलाके रासमण्डल में लेकर चला गया है, ताकि इसकी मनमाना पूरी तरह खुल कर चल सके। चर्चा तो इस बात को लेकर भी है कि इसकी पहुंच सरकार के मंत्रियों तक है।

जौनपुर के शाहगंज स्थित इसी राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में तैनात डा. विजय प्रताप का प्रदेश सरकार के आयुष विभाग द्वारा खमरिया भदोही में रिक्त चिकित्साधिकारी के पद पर स्थानान्तरण किया गया लेकिन वो यहां से टस से मस होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ये चिकित्सक महोदय को खुद को कानून से परे समझते हैं। हाईकोर्ट ने इन्हें विगत 17 मार्च को ही कार्यमुक्त हो जाने का आदेश दिया है। पूरा मामला तब सामने आया जब यहां चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात डा. श्रीप्रकाश सिंह ने यहां चल रहे लूट-खसोट में हिस्सेदार बनने से मना कर दिया। बकौल श्रीप्रकाश सिंह, यहां बड़े पैमाने पर सरकारी धन के लूट का खेल चल रहा है। 21 शैया वाले जिले के सबसे बड़े इस अस्पताल में मरीजों को सुविधा के नाम पर कुछ नहीं दिया जा रहा है। सरकारी पैसे के लूट की खुली छूट यहां मिली हुई है।

डाक्टर श्रीप्रकाश सिंह ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा से लेकर आयुष विभाग के आला अधिकारियों तक को दर्जनों पत्र लिख कर यहां चल रहे भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग की लेकिन कहीं कुछ नहीं हो रहा। करप्शन से लड़ रहे इस डाक्टर की आवाज नक्कारखाने में तूती साबित होती दिख रही है। डा. सिंह की माने तो बलिया से यहां आने के बाद से ही उन्हें खामोश रहने की धमकिया दी जा रही हैं। कार्यवाहक क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी के पद पर डाक्टर श्रीप्रकाश की नियुक्ति के लिए उच्च न्यायालय द्वारा आदेश दिये जाने के बाद भी उन्हें तैनाती नहीं दी जा रही है।

यहां चल रहे भ्रष्टाचार के खेल का छोटा सा नमूना इस बात से समझा जा सकता है कि 15 मई के दिन अस्पताल के रिकार्ड में 20 थर्मामीटर की आपूर्ति दर्शायी गयी है। दूसरी तरफ उसी दिन इन थर्मामीटरों को कार्य करते समय खराब होने की बात भी कही जा रही है।

डा. श्रीप्रकाश सिंह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कई सारे पत्र लिखे हैं। योगी सरकार भी भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टालरेंस की नीति अपनाने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में डा. श्रीप्रकाश के आरोपों की जांच कराकर दोषी और भ्रष्ट कर्मियों को दंडित किया जाना जरूरी है ताकि आम जन को उनका हक मिल सके।

बनारस से भाष्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट. संपर्क : bhaskarniyogi.786@gmail.com

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