नई दिल्ली: इंडियन एक्सप्रेस द्वारा जारी ‘100 सबसे प्रभावशाली भारतीयों’ की सूची एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। इस सूची में किन्हें जगह मिली और किन्हें नजरअंदाज किया गया, इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं।
वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर मिश्रा ने इस सूची पर तंज कसते हुए लिखा कि “145 करोड़ की आबादी वाले देश में इंडियन एक्सप्रेस को लेखक, कवि, सामाजिक कार्यकर्ता, सरकार का प्रतिरोध करने वाले नागरिक, पत्रकार और संपादक नज़र नहीं आते!” वे सवाल उठाते हैं कि जब देश साम्प्रदायिकता और नफ़रत से जूझ रहा है, जब मीडिया लोकतंत्र का साथ छोड़ चुका है, तब इस तरह की सूचियां हमें बार-बार यह याद दिलाती हैं कि असली ताकत जनता की आवाज़ नहीं, बल्कि सत्ता का संरक्षण है।
वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेई ने भी इस सूची पर कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा, “पद, पैसा और पावर का संगम। साहित्यकार, संपादक, वैज्ञानिक और शिक्षाविद् को मत खोजिएगा।” उनका इशारा साफ था कि इस सूची में केवल वही चेहरे शामिल हैं जो सत्ता के करीब हैं, न कि वे लोग जो समाज को बौद्धिक, वैज्ञानिक या साहित्यिक रूप से समृद्ध कर रहे हैं।
वहीं, मीडिया विश्लेषक एक्स अकाउंट चुरूमुरी ने एक और गंभीर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में सिर्फ 7 महिलाएं हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रभावशाली होने का पैमाना आखिर क्या है। साथ ही, उन्होंने तंज भरे अंदाज में लिखा कि इस सूची में शामिल लोगों की ‘प्रभावशाली’ जानकारियों में कौन किस मिठाई का शौकीन है, कौन लिगो सेट बनाता है, और किसे किस भाषा का ज्ञान है— यह सब तो है, लेकिन असल सवालों और असल मुद्दों की जगह नहीं है।
इस पूरी बहस से यह सवाल उठता है कि क्या ‘प्रभावशाली’ होने का मतलब सिर्फ सत्ता के करीब होना है? क्या जो लोग सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं, सामाजिक बदलाव के लिए काम करते हैं, वे इस ‘प्रभाव’ की परिभाषा में फिट नहीं बैठते? इंडियन एक्सप्रेस की यह सूची एक बार फिर मीडिया की प्राथमिकताओं और उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रही है।
इंडियन एक्सप्रेस की मोस्ट पावरफुल टॉप 100 लोगों की सूची कितनी असली कितनी नकली? देखें ये भड़ासी विश्लेषण! : योगी जी को पीछे कर दिया, राहुल गांधी को खिसका दिया, जयशंकर, निर्मला सीतारमण, राजनाथ को ज़्यादा भाव मिला, गडकरी को बहुत पीछे धकेल दिया, चीफ जस्टिस की ताक़त को कम किया, अदानी से ज़्यादा ताकतवर अंबानी को बता दिया, धामी जी को खूब ओब्लाइज़ किया, बाबा रामदेव को एकदम पीछे पटक दिया, अखिलेश यादव को अंडर एस्टीमेट किया गया…. देखें ये विश्लेषण
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