जौनपुर। जिले में कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। बदमाश अब सीधे पुलिस को टारगेट कर रहे हैं और पुलिस—मात्र “जांच और टीम गठित करने” तक सिमटती दिख रही है। बुधवार देर रात जलालपुर थाना क्षेत्र में अपराधियों ने चौकी इंचार्ज प्रतिमा सिंह समेत चार पुलिसकर्मियों को पिकअप से कुचलने की कोशिश की। इस घटना ने साफ कर दिया कि जौनपुर में पुलिस अब बैकफुट पर और अपराधी बेलगाम हो चुके हैं।
घटना रात लगभग 12 बजे की है, जब चौकी इंचार्ज प्रतिमा सिंह अपनी टीम के साथ दो बाइकों और एक स्कूटी पर सवार होकर एक संदिग्ध की तलाश में क्षेत्र में निकली थीं। चौरी बाजार के पास पीछे से आई एक तेज़ रफ्तार पिकअप ने पुलिसकर्मियों की दो बाइकों को टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गई।
प्रतिमा सिंह की हालत गंभीर, वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर
इस हमले में चौकी इंचार्ज प्रतिमा सिंह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है। अन्य घायल पुलिसकर्मियों को भी हाथ, पैर और सिर में गंभीर चोटें आई हैं।
कानून का भय खत्म? पुलिस ही सुरक्षित नहीं तो आम जनता का क्या होगा?
इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। जब अपराधी खुल्लमखुल्ला वर्दीधारियों को टक्कर मारकर भाग निकलते हैं, तो यह किसी एक वारदात का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम के फेल होने की चेतावनी है।
एसपी देहात शैलेन्द्र सिंह ने माना कि यह हमला जानबूझकर किया गया और कहा कि अपराधियों की तलाश में 10 टीमें गठित कर दी गई हैं। लेकिन सवाल यह है कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हुए? क्या अपराधियों को पुलिस से कोई डर नहीं रहा?
पशु तस्करों पर शक, लेकिन कार्रवाई कब?
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह हमला पशु तस्करों द्वारा किया गया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, यही बताया जा रहा है, मगर जनता अब पूछ रही है—कब तक केवल फुटेज खंगाले जाएंगे, कब तक अपराधियों पर लगाम लगेगी?
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बढ़ रही नाराज़गी
घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर लोग तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और सवाल पूछ रहे हैं कि जब पुलिस ही सुरक्षित नहीं है तो आम जनता का क्या होगा? वरिष्ठ अधिकारियों का ट्रॉमा सेंटर जाना भी अब एक औपचारिकता जैसा लगने लगा है।
अब वक्त आ गया है कि जौनपुर की पुलिस केवल टीम गठित करने और बयान देने से आगे बढ़कर अपराधियों पर ठोस कार्रवाई करे। नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब अपराधी सरेआम वर्दी को चुनौती देंगे—और कानून बस तमाशबीन बनकर रह जाएगा।
जौनपुर पुलिस की ढिलाई का एक और प्रकरण देखिए-
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