नई दिल्ली। राष्ट्रीय टीवी न्यूज़ चैनलों में बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी किए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक एक चैनल में पिछले कुछ दिनों से रोजाना दास से बीस कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के लिए कहा जा रहा है। दावा है कि अब तक करीब 150 कर्मचारी प्रभावित हो चुके हैं, जबकि यह प्रक्रिया अभी भी जारी है।
सूत्रों का कहना है कि सबसे पहले कैमरा, साउंड, पीसीआर, टेक्निकल और अन्य बैकएंड विभागों के कर्मचारियों पर गाज गिरी है। चर्चा यह भी है कि कार्यालय में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और प्रभावित कर्मचारियों को बुलाकर तत्काल कार्यमुक्त किया जा रहा है।
मीडिया जगत में वायरल हो रहे संदेशों में कई पत्रकारों और पूर्व कर्मचारियों ने इस पर चिंता जताई है। एक पूर्व कर्मचारी ने लिखा कि सबसे पहले उन कर्मचारियों को हटाया जा रहा है जिनकी कोई आवाज़ नहीं है और जिनकी आय अपेक्षाकृत कम है। उनका कहना है कि इन्हीं लोगों ने वर्षों तक न्यूज़रूम की रीढ़ बनकर काम किया, लेकिन संकट की घड़ी में सबसे पहले वही निशाने पर आ गए।
मीडिया उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह किसी एक संस्थान का संकट नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में टीवी न्यूज़ का विज्ञापन कारोबार लगातार कमजोर हुआ है। विज्ञापनदाता तेजी से डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे पारंपरिक टीवी चैनलों की आय पर भारी दबाव आया है। विशेष रूप से अंग्रेज़ी समाचार चैनलों में अधिकांश लंबे समय से लाभ कमाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने भी न्यूज़रूम की कार्यप्रणाली को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। स्क्रिप्टिंग, ट्रांसक्रिप्शन, वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक्स और कंटेंट प्रोडक्शन जैसे कई काम अब AI टूल्स से कम समय और कम लागत में किए जा रहे हैं। इसी कारण मीडिया संस्थान खर्च घटाने और कर्मचारियों की संख्या सीमित करने की रणनीति अपना रहे हैं। दुनिया भर में मीडिया और टेक कंपनियों में AI और लागत कटौती के कारण बड़े पैमाने पर छंटनी का दौर जारी है।
हाल के वर्षों में भारतीय टीवी मीडिया में भी पुनर्गठन की कई घटनाएं सामने आई हैं। कुछ चैनलों का संचालन बंद हुआ, कई संस्थानों ने लागत कम करने के लिए अपने ढांचे में बदलाव किए और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फोकस बढ़ाया। मीडिया विश्लेषकों का कहना है कि टीवी उद्योग अब उस दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां पारंपरिक न्यूज़रूम का आकार लगातार छोटा होता जाएगा और डिजिटल तथा AI आधारित मॉडल अधिक प्रभावी होते जाएंगे।


