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सुप्रीम कोर्ट जांच पैनल ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को दोषी ठहराया!

कैश-फॉर-जॉब घोटाले में सुप्रीम कोर्ट के जांच करने वाले पैनल ने न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को दोषी ठहराया है। उन्हें या तो इस्तीफा देना होगा या महाभियोग का सामना करना होगा। देखना ये भी है कि क्या इस मामले में आपराधिक मुक़दमा दर्ज होगा या नहीं होगा?

जस्टिस यशवंत वर्मा फंस गए हैं, जांच टीम ने दोषी पाया…

जिसमें उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लगने की घटना के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने का आरोप है। इस मामले की जांच के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय इन-हाउस समिति ने उन्हें दोषी पाया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा से 9 मई तक इस्तीफा देने या महाभियोग की प्रक्रिया का सामना करने के लिए कहा है।

14 मार्च 2025 को दिल्ली के तुगलक क्रेसेंट स्थित जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर आग लग गई थी। इस घटना के दौरान दमकल कर्मियों को एक कमरे में जलती हुई नकदी के बंडल मिले, जिसका वीडियो बाद में सामने आया। उस समय जस्टिस वर्मा और उनकी पत्नी दिल्ली में नहीं थे; घर में केवल उनकी बेटी और वृद्ध मां मौजूद थीं।

CJI संजीव खन्ना ने 22 मार्च को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया, और कर्नाटक हाई कोर्ट की जस्टिस अनु शिवरामन की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति ने 4 मई को अपनी रिपोर्ट CJI को सौंपी, जिसमें नकदी मिलने की पुष्टि की गई और जस्टिस वर्मा को दोषी ठहराया गया।

रिपोर्ट के आधार पर, CJI खन्ना ने जस्टिस वर्मा को 48 घंटे के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। यदि वे इस्तीफा नहीं देते, तो मामला राष्ट्रपति को भेजा जाएगा और उनके खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की जाएगी।

जस्टिस वर्मा ने आरोपों से इनकार करते हुए इसे उनके खिलाफ साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया कि आग लगने के बाद किसी भी नकदी की उपस्थिति नहीं थी और यह मामला उन्हें बदनाम करने के लिए रचा गया है।

वर्तमान स्थिति

  • स्थानांतरण: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 24 मार्च को जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से उनके मूल न्यायालय, इलाहाबाद हाई कोर्ट, में स्थानांतरित करने की सिफारिश की थी, जिसे स्वतंत्र निर्णय बताया गया।
  • कार्यभार: वर्तमान में, जस्टिस वर्मा को कोई न्यायिक कार्य सौंपा नहीं गया है।
  • समयसीमा: CJI खन्ना 13 मई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जिससे इस मामले में त्वरित निर्णय की आवश्यकता है।

जस्टिस यशवंत वर्मा को हाउस पैनल ने दोषी पाया है और अब उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ेगा। लेकिन इस्तीफ़ा काफी नहीं है। एफआईआर दर्ज़ करके गिरफ़्तारी होनी चाहिए और मुकद्दमा चलना चाहिए। -मुकेश कुमार (वरिष्ठ पत्रकार)

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