आदिवासियों व वनवासियों की बेदखली पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों को फटकारा

उच्चतम न्यायालय ने आदिवासियों और वनवासियों को भारी राहत देते हुए उन्हें फिलहाल जंगल से बेदखल नहीं करने का आदेश दिया है. उच्चतम न्यायालय ने 13 फरवरी के आदेश पर रोक लगाते हुए केंद्र और राज्य सरकार को फटकार लगायी और पूछा कि अब तक क्यों सोते रहे. जंगल की जमीन पर इन आदिवासियों और …

दीवानी मामलों को आपराधिक बनाने पर सुप्रीमकोर्ट सख्त

धारा 482 के तहत हाईकोर्ट यह जाँच कर सकता है कि दीवानी मामले को आपराधिक रंग तो नहीं दिया जा रहा है… आजकल दीवानी मामलों की सुनवाई में अतिशय अदालती देरी के चलते दीवानी मामलों को आपराधिक रंग देने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है, ताकि मन मुताबिक समझौते की संभावना बन सके. यही …

मोदी सरकार की सुप्रीम कोर्ट में इस बड़ी जीत से डिफॉल्टर कंपनियों में खलबली

सुप्रीम कोर्ट की कसौटी पर खरा उतरा दिवालिया कानून… लोन डिफॉल्टर्स पर शिकंजा कसने के लिए इन्सॉल्वंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड… उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) यानी दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता की संवैधानिक वैधता को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. उच्चतम न्यायालय ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता की संवैधानिक …

मास्टर आफ रोस्टर बनाम मास्टर आफ कॉलेजियम : न्यायपालिका की स्वतंत्रता दांव पर!

कॉलेजियम की सिफारिशों पर विधि क्षेत्रों में गम्भीर विवाद शुरू हो गया है। एक ओर जहाँ दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज कैलाश गंभीर ने उच्च न्यायालय के दो जस्टिसों को उच्चतम न्यायालय में भेजे जाने की कॉलेजियम की सिफारिश का विरोध किया है वहीं दूसरी ओर उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने …

कोर्ट से बहाल सैकड़ों मीडियाकर्मियों को एचटी प्रबंधन ने खाली मैदान व गोदाम में कराया ज्वाइन (देखें वीडियो)

हिंदुस्तान टाइम्स कर्मचारियों के साथ एक और बड़ा धोखा… सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 272 कर्मचारियों को हिंदुस्तान टाइम्स ने विदाउट प्रोड्यूस अप्वाइंटमेंट लेटर जारी किए हैं जिसमें कर्मचारी को 14 जनवरी से नौकरी पर रखने के लिए जिस स्थान का ऐड्रस (खसरा नंबर 629 कादीपुर विलेज दिल्ली) लिखा है, वहां गोदाम और खाली …

रंजन गोगोई जब चीफ जस्टिस बने थे तो बीजेपी वालों को साँप सूंघ गया था…

Navneet Mishra : जैसे आज जस्टिस सीकरी को लेकर अनर्गल कनेक्शन जोड़े जा रहे, वैसे रंजन गोगोई जब चीफ जस्टिस बने थे तो बीजेपी वालों को साँप सूंघ गया था- अरे ये तो कांग्रेसी मुख्यमंत्री रहे शख्स के बेटे हैं। सरकार के लिए जरूर परेशानी खड़ी करेंगे, काग्रेस के नमक का क़र्ज़ अदा करेंगे…. वहीं …

न्यायमूर्ति काटजू! साल में 2-3 बार लंदन जाने का मौका क्या ऊंचा ओहदा नहीं है?

द प्रिंट की खबर पर न्यायमूर्ति काटजू का एतराज सहमत होने लायक नहीं है… न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू ने न्यायमूर्ति सीकरी मामले में अंग्रेजी में फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा है। इसका शीर्षक अगर हिन्दी में लिखा जाए तो ये होगा- ‘क्या भारतीय मीडिया को शर्म नहीं है?’ इस पोस्ट में उन्होंने कहा है न्यायमूर्ति सीकरी …

फ़ैसला अगर ख़िलाफ़ है, कह दो- जज बेईमान है!

जस्टिस सीकरी ने लंदन में कॉमनवेल्थ ट्राइब्यूनल की पोस्टिंग का प्रस्ताव ठुकराकर बहुत अच्छा किया। कोई भी व्यक्ति जो अपने चरित्र पर कीचड़ उछाला जाना बर्दाश्त नहीं कर सकता, वह ऐसा ही करता। उम्मीद है कि आलोक वर्मा मामले में उनपर जो आरोप लगा था कि चार साल की इस पोस्टिंग के लालच में उन्होंने …

ईमानदार होना ही नहीं, ईमानदार दिखना भी चाहिए योर ऑनर!

जस्टिस सीकरी जब चयन समिति की बैठक में शामिल हुये, उसके पहले वे कॉमनवेल्थ ट्राइब्यूनल में भेजने के सरकारी प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे चुके थे कहते हैं ईमानदार होना ही नहीं ईमानदार दिखना भी चाहिए। आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटाने के लिए चयन समिति की बैठक में चीफ जस्टिस रंजन …

जस्टिस सीकरी का ‘इंसाफ’ : रिटायरमेंट के बाद हुजूर को सरकार भेजेगी लंदन!

Ravish Kumar : हिन्दी में पढ़ने पर यह लिखा मिलेगा कि जस्टिस सिकरी को रिटायरमेंट के बाद लंदन स्थित कॉमनवेल्थ सेक्रेटेरियल आर्बिट्रल ट्राइब्यूनल का सदस्य बनाया जाएगा। चार साल क लिए यह नियुक्ति होती है। छह मार्च को जस्टिस सिककी रिटायर हो रहे हैं। मनीष छिब्बर ने दि प्रिंट के लिए यह ख़बर लिखी है। …

सुप्रीम कोर्ट के प्रत्येक जज को मिलते हैं 11 कर्मचारी

सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सहित प्रत्येक जज को सहवर्ती स्टाफ के रूप में 11 कर्मी प्रदान किये जाते हैं. इनमे 01 वैयक्तिक सचिव, 02 वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक, 01 चालाक, 01 प्रवेशक तथा 06 कनिष्ठ कोर्ट परिचारक शामिल हैं. यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट के जन सूचना अधिकारी अजय अग्रवाल …

वरिष्ठ IRS अधिकारी ने दो महिला IRS अफसरों को उनके मुंह पर कह दिया ‘वेश्या’!

आईआरएस अधिकारी संजय श्रीवास्तव ‘वेश्या’ कहे जाने को सुप्रीम कोर्ट ने भी किया नजरअंदाज, कैट ने आईआरएस अधिकारियों शुमाना सेन और अशिमा नेब का प्रमोशन रोका….  सुप्रीम कोर्ट ने आईआरएस अधिकारी शुमाना सेन और एक अन्य आईआरएस अधिकारी अशिमा नेब को कमिश्नर एसके श्रीवास्तव द्वारा “वेश्या” कहे जाने को नजरअंदाज कर दिया। ज्ञात हो कि …

बालिकागृह रेप कांड की रिपोर्टिंग पर रोक को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया

Santosh Singh : मुजफ्फरपुर बालिकागृह रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के मीडिया के रिपोर्टिंग की तारीफ करते हुए कहा कि मुजफ्फरपुर बालिकागृह रेप मामले में रिपोर्टिंग पर लगा बैन गलत है और अभी से इस बैन को खत्म किया जाता है। पत्रकार की ओर से दलील दे रही वकील ने कोर्ट के सामने …

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली को कड़ी फटकार लगाई- ‘बहानेबाजी मत करो, यह बताओ घर कब दोगे’

सुप्रीम कोर्ट ने आज बेइमान और धोखेबाज बिल्डर कंपनी आम्रपाली के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. घर पाने से वंचित निवेशकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली के निदेशकों से पूछा है कि बिना बहानेबाजी किए यह साफ साफ बताओ, घर कब दोगे. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा- बहानेबाजी मत करो. यह गंभीर मसला है. लोगों की जीवनभर की कमाई लगी है. साफ बताओ, घर कब दोगे. आपको उत्तरदायी बनना पड़ेगा. आम्रपाली को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि वो एक सप्ताह के अंदर अपने हर प्रोजेक्ट के प्लान से संबंधित रेसोल्यूशन जमा करें. 

दो सौ करोड़ रुपये के विज्ञापन फर्जीवाड़े मामले में हिंदुस्तान अखबार की मालकिन शोभना भरतिया के खिलाफ सुनवाई पांच दिसंबर को

Rs.200 crore Dainik Hindustan Government Advertisement Scam of Bihar : Supreme court of India will hear Shobhana Bhartia’s Criminal Appeal No.-1216/2017 on Dec.05, 2017 next…

By ShriKrishna Prasad, advocate, Munger, Bihar

The order of  the court of Hon’ble Mr.Justice R.K.Agrawal and Hon’ble Mr.Justice Navin Sinha on Nov 28,2017

New Delhi : In the globally talked Rs.200 crore Dainik Hindustan Government Advertisement Scandal, the Supreme Court of India, on Nov,28, 2017 , has notified  through its website  that the Supreme Court of India (New Delhi) will list Criminal Appeal No.1216/2017 {SLP(Criminal)No.1603/2013} for hearing in the court of Hon’ble Mr.Justice R.K.Agrawal on Dec 05, 2017 next.

मजीठिया मामला : सुप्रीम कोर्ट ने दैनिक भास्कर प्रबंधन को राहत देने से किया इनकार

धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, लतिका चव्हाण और आलिया शेख के मामले में भास्कर प्रबंधन को लगा झटका

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मुंबई उच्च न्यायालय के एक आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट गए दैनिक भास्कर (डी बी कॉर्प लि.) अखबार के प्रबंधन को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार करते हुए उसे वापस मुंबई उच्च न्यायालय की शरण में जाने के लिए मजबूर कर दिया है। यह पूरा मामला मुंबई में कार्यरत दैनिक भास्कर के प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह संग मुंबई के उसी कार्यालय की रिसेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण और आलिया इम्तियाज़ शेख की मजीठिया वेज बोर्ड मामले में जारी रिकवरी सर्टीफिकेट (आरसी) से जुड़ा हुआ है… पत्रकार सिंह और रिसेप्शनिस्ट चव्हाण व शेख ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा के मार्गदर्शन एवं उन्हीं के दिशा-निर्देश में कामगार आयुक्त के समक्ष 17 (1) के तहत क्लेम लगाया था।

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए अब जो क्लेम करेगा, वह हार हाल में जीतेगा : एडवोकेट उमेश शर्मा

सुप्रीम कोर्ट के टाइम बाउण्ड के निर्णय का स्वागत… जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट में देश भर के मीडियाकर्मियों का केस लड़ रहे जाने-माने एडवोकेट उमेश शर्मा ने 13 अक्टूबर को सुप्रीमकोर्ट द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड मामले को श्रम न्यायालय और कामगार विभाग द्वारा टाइम बाउंड करने के निर्णय का स्वागत किया है और कहा है कि मजीठिया वेज बोर्ड मामले में क्लेम लगाने वाले मीडियाकर्मियों की हर हाल में जीत तय है, वह एक निश्चित समय के भीतर। इससे एक बार फिर साबित हो गया है कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ उनको ही मिलेगा जो वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा 17(1) के तहत क्लेम लगाएंगे।

एचटी बिल्डिंग के सामने सिर्फ एक मीडियाकर्मी नहीं मरा, मर गया लोकतंत्र और मर गए इसके सारे खंभे : यशवंत सिंह

Yashwant Singh : शर्म मगर इस देश के मीडिया मालिकों, नेताओं, अफसरों और न्यायाधीशों को बिलकुल नहीं आती… ये जो शख्स लेटा हुआ है.. असल में मरा पड़ा है.. एक मीडियाकर्मी है… एचटी ग्रुप से तेरह साल पहले चार सौ लोग निकाले गए थे… उसमें से एक ये भी है… एचटी के आफिस के सामने तेरह साल से धरना दे रहा था.. मिलता तो खा लेता.. न मिले तो भूखे सो जाता… आसपास के दुकानदारों और कुछ जानने वालों के रहमोकरम पर था.. कोर्ट कचहरी मंत्रालय सरोकार दुकान पुलिस सत्ता मीडिया सब कुछ दिल्ली में है.. पर सब अंधे हैं… सब बेशर्म हैं… आंख पर काला कपड़ा बांधे हैं…

इस संजय गुप्ता को सुप्रीम कोर्ट की बात न मानने पर हुई दस दिन की जेल, एक करोड़ 32 लाख रुपये जुर्माना भी भरना होगा

ये संजय गुप्ता एक मिल मालिक हैं. इनका भी काम  कोर्ट को गुमराह करना हो गया था. सो, इस संजय गुप्ता को सुप्रीम कोर्ट ने दस दिन की जेल और एक करोड़ 32 लाख रुपये का जुर्माना लगाकर दिमाग ठिकाने पर ला दिया. इस फैसले से पता चलता है कि कोई भी अगर माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करेगा और अदालत को गुमराह करते पाया गया तो उसे एक लाख रुपये प्रतिमाह का जुर्माना और दस दिन की जेल होगी. सोमवार को शीर्ष अदालत ने संजय गुप्ता नामक एक मिल मालिक को 10 दिन की कैद के साथ-साथ एक करोड़ 32 लाख रुपये का जुमार्ना सुनाया है.

(पार्ट थ्री) मजीठिया पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हिंदी अनुवाद पढ़ें

16. याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अधिनियम की धारा 12 के तहत केंद्र सरकार द्वारा सिफारिशों को स्वीकार करने और अधिसूचना जारी किए जाने के बाद श्रमजीवी पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारी मजीठिया वेजबोर्ड अवार्ड के तहत अपना वेतन/मजदूरी प्राप्त करने के हकदार हैं। यह, अवमानना याचिकाकर्ताओं के अनुसार, अधिनियम की धारा 16 के साथ धारा 13 के प्रावधानों से होता है, इन प्रावधानों के तहत वेजबोर्ड की सिफारिशें, अधिनियम की धारा 12 के तहत केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित होने पर, सभी मौजूदा अनंबधों के साथ श्रमजीवी पत्रकार और गैर पत्रकार कर्मचारियों की सेवा की शर्तों को नियंत्रित करने वाले विशिष्ट अनुबंध/ठेका व्यवस्था को अधिलंघित  (Supersedes) करती है या इसकी जगह लेती है।

मजीठिया पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एडवोकेट द्वय उमेश शर्मा और दिनेश तिवारी दायर करेंगे पुनरीक्षण याचिका

मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसला पर मीडियाकर्मियों में बहस-विचार-चर्चा जोरों पर है. ताजी सूचना ये है कि मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई से जुड़े रहे दो वकीलों उमेश शर्मा और दिनेश तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर करने का ऐलान कर दिया है. ये दोनों वकील अलग-अलग रिव्यू पिटीशन दायर करेंगे. इनकी पुनरीक्षण याचिकाओं में मीडिया मालिकों को अवमानना का दोषी न माने जाने का बिंदु तो होगा ही, ट्रांसफर-टर्मिनेशन जैसे मसलों पर स्पष्ट आदेश न दिया जाना और इस मजीठिया के मामले में सुप्रीम कोर्ट में फिर न आने की सलाह देने जैसी बातों का भी उल्लेख होगा. इन समेत ढेर सारे बिंदुओं पर सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकृष्ट करते हुए फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया जाएगा.

मजीठिया मामले में सुप्रीम कोर्ट का आज आया पूरा फैसला इस प्रकार है…

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जागरण के पत्रकार पंकज के ट्रांसफर मामले को सुप्रीमकोर्ट ने अवमानना मामले से अटैच किया

दैनिक जागरण के गया जिले (बिहार) के मीडियाकर्मी पंकज कुमार के ट्रांसफर के मामले पर आज सोमवार को माननीय सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई हुई। इस मुकदमे की सुनवाई कोर्ट नम्बर 4 में आयटम नम्बर 9, सिविल रिट 330/2017 के तहत की गई। न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सुनवाई करते हुए इस मामले को भी मजीठिया वेज बोर्ड के अवमानना मामला संख्या 411/2014 के साथ अटैच कर दिया है। माननीय न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे ही अन्य मामलों पर निर्णय आने वाला है, लिहाजा याचिका का निपटारा भी इसी में हो जाएगा।

दैनिक जागरण के पत्रकार पंकज के ट्रांसफर मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में होगी ऐतिहासिक सुनवाई

पटना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य कार्यकारी न्यायाधीश रखेंगे मीडियाकर्मी का सुप्रीम कोर्ट में पक्ष… देश भर के अखबार मालिकों की जहां मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सांस टंगी है वहीं दैनिक जागरण के बिहार के मीडियाकर्मी पंकज कुमार के ट्रांसफर मामले में आज सोमवार को सुप्रीमकोर्ट में एक ऐतिहासिक सुनवाई होने जा रही है। ऐतिहासिक इस मामले में यह सुनवाई होगी कि दैनिक जागरण, बिहार के गया जिले के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुमार का तबादला किए जाने पर फौरन सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होने जा रही है, साथ ही पीड़ित पत्रकार का पक्ष माननीय सुप्रीमकोर्ट में पटना हाई कोर्ट के रिटायर मुख्य कार्यकारी न्यायाधीश नागेंद्र राय रखेंगे।

मजीठिया मामले के निपटारे को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कमेटी बनाए जाने की उम्मीद : एडवोकेट उमेश शर्मा

मजीठिया मामले में तीन मई को आरपार की उम्मीद…. देश भर के मीडियाकर्मियों के लिये माननीय सुप्रीमकोर्ट में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे एडवोकट उमेश शर्मा का मानना है कि अखबार मालिकों के खिलाफ चल रही अवमानना मामले की यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और तीन मई को इस मामले में आरपार होने की उम्मीद है। यह पूछे जाने पर कि इस लड़ाई का निष्कर्ष क्या निकलने की उम्मीद है, एडवोकेट उमेश शर्मा का कहना है कि लड़ाई मीडियाकर्मी ही जीतेंगे लेकिन जहां तक मुझे लग रहा है, सुप्रीमकोर्ट इस मामले में एक कमेटी बना सकती है।

माई लॉर्ड ने वरिष्ठ पत्रकार को अवमानना में तिहाड़ भेजा पर मीडिया मालिकों के लिए शुभ मुहुर्त का इंतजार!

…सहारा का होटल न खरीद पाने वाले चेन्नई के एक वरिष्ठ पत्रकार को सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का दोषी मान कर आनन-फानन में जेल भेज दिया… यह वरिष्ठ पत्रकार गिड़गिड़ाता रहा लेकिन जज नहीं पसीजे… पर मीडिया मालिक तो खुद एक बार सुप्रीम कोर्ट के सामने उपस्थित तक नहीं हुए और कोर्ट को चकरघिन्नी की तरह हिलाडुला कर, कोर्ट से समय पर समय लेकर अघोषित रूप से ललकारने में लगे हैं कि जेल भेज सको तो जरा भेज कर दिखाओ….

ये क्या, सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश में जागरण के मालिकों को तलब करने का जिक्र ही नहीं!

सुप्रीमकोर्ट के लिखित आदेश से समाचारपत्र कर्मियों में निराशा : माननीय सुप्रीमकोर्ट में 4 अक्टूबर को हुयी मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुनवाई के बाद लिखित आदेश कल 6 अक्टूबर को आया। लेकिन इस आदेश में दैनिक जागरण के मालिकों संजय गुप्ता और महेंद्र मोहन गुप्ता को तलब किए जाने का जिक्र ही नहीं है। न ही इन दोनों का नाम किसी भी संदर्भ में लिया गया है। यानि संजय गुप्ता और महेंद्र मोहन गुप्ता को अगली सुनवाई के दौरान सुप्रीमकोर्ट में उपस्थित नहीं रहना पड़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट में भास्कर को सबसे ज्यादा नंगा किया गया

शशिकांत सिंह

मंगलवार को मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुनवाई के दौरान माननीय सुप्रीम कोर्ट में सबसे ज्यादा नंगा किया गया दैनिक भास्कर को। इस सुनवाई के दौरान सभी सीनियर वकीलों ने दैनिक भास्कर की सच्चाई से माननीय सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया। देश भर के पत्रकारों की मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे सीनियर एडवोकेट उमेश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट को विस्तार से बताया कि एक हजार करोड़ से ज्यादा टर्न ओवर की इस कंपनी ने आज तक किसी भी वेज बोर्ड का पालन नहीं किया, चाहे वो पालेकर वेज बोर्ड हो, बछावत हो, मणिसाना वेज बोर्ड हो या फिर मजीठिया वेज बोर्ड।

सुप्रीम कोर्ट ने लेबर कमिश्नरों को दिया सख्त निर्देश- आरसी काटिये और वेज बोर्ड की सिफारिश लागू कराइए

सुप्रीम कोर्ट से शशिकांत सिंह की रिपोर्ट…

सभी लेबर कमिश्नरों को अखबार मालिकों की रिकवरी काटने का सख्त आदेश… लेबर कमिश्नरों को आज माननीय सुप्रीमकोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू ना करने पर जमकर लताड़ा और दैनिक जागरण के मालिकों संजय गुप्ता और महेन्द्र मोहन गुप्ता को अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट में तलब कर लिया है। साथ ही सभी लेबर कमिश्नरों को सख्त आदेश दिया कि आप इस मामले की रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करा कर इस सिफारिश को अमल में लाइए।

सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन और संजय गुप्ता को तलब किया

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न करने और सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानून, न्याय, संविधान तक की भावनाओं की अनदेखी करने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने आज दैनिक जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन गुप्ता और संजय गुप्ता को अगली सुनवाई पर, जो कि 25 अक्टूबर को होगी, कोर्ट में तलब किया है. आज सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न किए जाने को लेकर सैकड़ों मीडियाकर्मियों द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई हुई.