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दिल्ली

नोएडा डीएम मेधा रूपम के केस की लिस्टिंग पर उठे सवाल, लॉयर्स एसोसिएशन ने CJI को लिखा पत्र!

Woman in a light purple outfit wearing green police body armor, talking on a cellphone and holding a helmet, with uniformed officers and a dusty street in the background.

‘लॉयर्स एसोसिएशन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन’ ने नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम की याचिका की लिस्टिंग को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखा है। एसोसिएशन ने याचिका को सूचीबद्ध किए जाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए चिंता जताई है।

एसोसिएशन का आरोप है कि मौजूदा रोस्टर के बावजूद मेधा रूपम की याचिका को “विशेष रूप से एक खास बेंच के सामने” सूचीबद्ध किया गया। पत्र में कहा गया है कि मेधा रूपम मुख्य चुनाव आयुक्त की बेटी हैं और किसी मामले को इस तरह प्राथमिकता के साथ सूचीबद्ध करना गलत नजीर कायम करता है।

पत्र में कहा गया है, “किसी विशेष बेंच के सामने विशेष रूप से लिस्ट किए जाने से न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास और मजबूत नहीं हुआ है।”

एसोसिएशन ने सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान कार्यवाही की आवाज म्यूट किए जाने का मुद्दा भी उठाया है।

यह मामला मेधा रूपम की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन के सिलसिले में एक छात्र को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने के उनके आदेश की आलोचना की गई थी। हाईकोर्ट ने मेधा रूपम को छात्र को हिरासत में रखने के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया था।

Open, formal letter on LAFC letterhead dated 24.09.2026, addressing the Chief Justice of India regarding a legal matter.

सुप्रीम कोर्ट से मेधा रूपम को मिली राहत के बाद डीयू की छात्रा आकृति चौधरी के पिता अरूण चौधरी का पहला बयान- “मेधा रूपम को ज्ञानेश कुमार का बेनिफिट मिल रहा है?”
आकृति चौधरी के पिता ने दिया Live Law की Petition listing वाली रिपोर्ट का हवाला
आकृति चौधरी पर नोएडा की डीएम मेधा रूपम ने की थी NSA लगाने की सिफारिश जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न सिर्फ खारिज किया, बल्कि मेधा रूपम समेत नीचे के सभी जिम्मेदार अधिकारियों की तनख्वाह से 5 लाख रुपए बतौर हर्जाना काटने का आदेश दिया।
इसी आदेश के खिलाफ मेधा रूपम पहुंची थी सुप्रीम कोर्ट।
सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के 5 लाख रुपए वाले हिस्से पर लगा दी रोक।
-अभिषेक उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार


मृगेंद्र प्रताप सिंह-

ब्रेकिंग: मोदी सरकार पर सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

नोएडा की DM मेधा रूपम को याद कीजिए?

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणी की थी और जिस छात्र के साथ अन्याय हुआ था, उसे मुआवजा देने का आदेश दिया था।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। स्टे मिला। मुआवजे पर रोक लग गई और हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों का प्रभाव भी रुक गया।

अब Bar & Bench की रिपोर्ट के मुताबिक, Lawyers’ Association for Constitution ने CJI सूर्यकांत को पत्र लिखकर कुछ गंभीर चिंताएं जताई हैं।

उनकी आपत्तियां: उनकी याचिका को कथित तौर पर तय क्रम से हटकर सूचीबद्ध किया गया।

सुनवाई के दौरान लाइव कार्यवाही की आवाज कथित तौर पर म्यूट कर दी गई।

आरोप है कि रोस्टर के बावजूद मामला एक विशेष बेंच के सामने भेजा गया। और पत्र में याचिकाकर्ता की पहचान का भी उल्लेख किया गया है—मेधा रूपम, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी।

भाई, जरा सोचिए… एक आम नागरिक को सुनवाई की तारीख के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ सकता है।

और यहां आरोप है कि एक मामले में जल्दी सूचीबद्ध करने, सुनवाई की आवाज म्यूट होने और स्टे मिलने जैसे सवाल उठ रहे हैं।

छात्र अभी भी अपने मुआवजे का इंतजार कर रहा है।

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