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अमृतकाल के नवभारत टाइम्स में पहले पन्ने की हेडलाइन देखकर मैं धन्य हो गया!

राकेश कायस्थ-

सुबह-सुबह आंख खुली और पहले पन्ने की हेडलाइन देखकर धन्य हो गया। शुरू में लगा कि किसी नगर पार्षद का बयान प्रधानमंत्री के नाम से छप गया है। फिर ध्यान आया कि ये तो अमृत काल है, जहां भगवान और भक्त एकाकार हो जाते हैं।

आप फर्क ही नहीं कर सकते कि कौन सी बात पान की दुकान पर खड़े होकर कही जा रही है और कौन सी बात देश का शीर्ष नेतृत्व कह रहा है। तीन कॉलम में दो लाइन वाली हेडलाइन के बदले अगर अखबार आठ कॉलम वाला बैनर हेडलाइन बनाता तो क्या बिगड़ जाता।

ये सोच ही रहा था कि दायीं ओर नज़र गई। तीन कॉलम में महाशिवरात्रि भी तो है। एक इवेंट जा रहा है और दूसरा इवेंट आ रहा है। अखबार निकालने वालों ने अभूतपूर्व संपादकीय विवेक का प्रयोग करते हुए प्रधानमंत्री की खबर से थोड़ा समझौता किया है ताकि तीन कॉलम में काशी की शिवरात्रि को स्थान दिया जा सके।

अखबार मालिक त्रिपुंड लगाकर आनेवाले दिनों पूरी श्रद्धा से गाएंगे–

मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है
करते हो तुम कन्हैया मेरा नाम हो रहा है

अखबारों में भी काम भगवत कृपा से ही होगा। जिस तरह की खबरें चलती है, वो एआई चुटकियो में बनाएगा और बेरोजगार हुआ पत्रकार पांच किलो मुफ्त राशन योजना का लाभ उठाता नज़र आएगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अमेरिका के फाइव ट्रिलियन डॉलर बजट से जिन्हें मूर्छा आ रही है, उनके लिए बता दूं भारत सरकार ने भी अपना एआई बजट दोगुना कर दिया है। अब यह बजट पूरे दो हज़ार करोड़ रुपये है।

ये मत कहिये कि चालीस लाख करोड़ और दो हज़ार करोड़ रुपये में फर्क है। असली चीज श्रद्धा है। कन्हैया भारत में किसी को भूखा नहीं मरने देंगे।

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