सोनम वांगचुक का इलाज सरकारी अस्पताल में ही होगा। खबर है कि दिल्ली के एक अन्य सरकारी अस्पताल में मरीज के ऊपर पंखा गिरने के बाद उसकी मौत हो गई
संजय कुमार सिंह
आज ज्यादातर खबरें सरकार को सही साबित करने वाली हैं। दैनिक भास्कर की लीड का शीर्षक है, “वांगचुक को सरकारी अस्पताल ले जाना मनमानी नहीं : हाईकोर्ट”। अमर उजाला की लीड फुटबॉल के महाकुंभ की है और शीर्षक है, सरताज स्पेन। चार कॉलम की सेकेंड लीड का शीर्षक है, “वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराना सरकार की मनमानी नहीं, इलाज सफदरजंग में ही : हाईकोर्ट”। कल मैंने लिखा था कि तमाम खबरों से यह पता नहीं चला कि उन्हें गिरफ्तार किया गया है या सिर्फ इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। जो भी हो, उनकी पत्नी को लगा कि स्थितियां जेल जैसी हैं, अस्पताल में, कमरे में और आस-पास सैकड़ों वर्दीधारी पुलिस वालों की उपस्थिति से रक्तचाप सामान्य होना मुश्किल है, ब्लड रिपोर्ट पर शंका थी, जांच कराने पर सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट गलत निकली फिर भी हाईकोर्ट ने पसंद के अस्पताल में इलाज कराने की इजाजत नहीं दी। जिस ढंग से गिरफ्तार किया गया था उसकी खबर सभी अखबारों में थी। पुलिस ने गिरफ्तार किया तो वे सादी वर्दी में क्यों थे और सादी वर्दी में थे तो जबरदस्ती करने से पहले उन्हें सूचना क्यों नहीं दी, कारण क्यों नहीं बताए जैसे तमाम सवालों का जवाब कल की खबरों में नहीं था। फिर भी अदालत ने उसे सरकार की मनमानी नहीं माना और अखबारों में यह पहले पन्ने की खबर बन गई। दूसरी ओर, शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग पर चल रहे भारी आंदोलन के बावजूद हटाया नहीं गया और कल घोषित नीट के नतीजों में गड़बड़ी की कई शिकायतें सोशल मीडिया पर थीं। लेकिन आज पहले पन्ने पर उसकी कोई खबर नहीं है। ठीक है कि अखबारों को खबर नहीं होगी तो छपेगी कैसे लेकिन सोशल मीडिया की पोस्ट खबर बनती रही है। नवोदय टाइम्स में भी, सोनम को अस्पताल ले जाना मनमानी नहीं : अदालत शीर्षक से खबर पहले पन्ने पर तीन कॉलम में छपी है। देशबन्धु में यह खबर चार कॉलम में है। इसका शीर्षक है, “सफदरजंग अस्पताल में ही भर्ती रहेंगे वांगचुक”। उपशीर्षक है, दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया इनकार।
हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर पांच कॉलम में है। शीर्षक है,” वांगचुक को अस्पताल पहुंचाना सरकार के अधिकार में है”। अखबार ने बताया है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसा सोनम वांगचुक की पत्नी की अपील पर कहा है। पहले बता चुका हूं कि उनकी पत्नी उनका इलाज मन के अस्पताल में कराना चाहती हैं और अदालत ने इसकी इजाजत नहीं दी। हिन्दुस्तान टाइम्स में इस खबर के नीचे तीन कॉलम की एक खबर फोटो के साथ छपी है। इसके अनुसार, दिल्ली के एक अन्य सरकारी अस्पताल में मरीज के ऊपर पंखा गिरने के बाद उसकी मौत हो गई। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर पहले पन्ने पर है। शीर्षक है, अस्पताल पहुंचाना मनमानी नहीं है, हाईकोर्ट ने कहा, वांगचुक को किसी और अस्पताल में ले जाने की अपील खारिज कर दी। द हिन्दू में यह खबर सेकेंड लीड है। शीर्षक है, वांगचुक को सफदरजंग से स्थानांतरित करने की अपील हाईकोर्ट ने खारिज की। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, सफदरजंग अस्पताल ने कहा है कि वे अभी भी अनशन पर हैं, उनकी स्थिति स्थिर है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने मुख्य खबर के साथ उनकी पत्नी के हवाले से कहा है कि मामला संसद में उठाए जाने पर वे अनशन खत्म कर देंगे। यह मुख्य खबर का इंट्रो है। इसके हाइलाइट किए अंश के अनुसार, …. अगर राजनीतिक कार्यकर्ता सफदरजंग अस्पताल में उनसे मिलें और उन्हें आश्वस्त करें कि संसद के मानसून सत्र के दौरान शिक्षा में जवाबदही का मामला संसद के मानसून सत्र में उठाया जाएगा तो वे अपना अनशन वापस ले लेंगे। इंडियन एक्सप्रेस ने इस शीर्षक को सेकेंड लीड बनाया है।
आप जानते हैं कि सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को यानी आज जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है तब संसद को घेरने के लिए मार्च की अपील की थी और पहले ही कहा था कि 20 मार्च के बाद मुद्दे को संसद को सौंप कर ही वे अनशन खत्म करेंगे और दो दिन तक नहीं मरेंगे। मर गए तो भूत बनकर आएंगे। यह सब होता उससे पहले उन्हें जबरन जंतर मंतर से हटा दिया गया और कल शाम जंतर मंतर खाली करने का आदेश सुनाया जा रहा था। फिर भी आंदोलनकारी मार्च निकालने पर डटे हुए थे। रात में सोनम की पत्नी की घोषणा आग की तरह फैली। उसके साथ मिर्च मसाला तो होना ही था। आज सुबह बंटने वाले अखबारों में स्थिति साफ की जानी चाहिए थी या बताया जाना चाहिए था कि मार्च को लेकर क्या खबरें हैं। दैनिक भास्कर में लीड का फ्लैग शीर्षक है, सीजेपी का ‘संसद चलो’ मार्च आज, पर दिल्ली पुलिस की अनुमति नहीं। मुख्य खबर के साथ एक खबर है, वांगचुक ने मार्च को दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन बताया। इसके साथ छपा है, इस बीच एक इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने कहा, लद्दाख के उपराज्यपाल विनय सक्सेना के कहने पर वे सीजेपी के अभिजीत दिपके से मिले थे। यह इंटरव्यू उन्होंने जंतर मंतर पर दिया था। इस मामले में तथ्य यह है कि 28 मई को सोनम वांगचुक ने एक वीडियो पोस्ट कर मामले को तभी स्पष्ट किया था। जंतर मंतर पर इंटरव्यू में जो कहा वह इस पोस्ट के आलोक में होगा लेकिन अब छप रही खबरों से भ्रम हो रहा है। मोटा मोटी मामला यह है कि सोनम ने 26 मई को पत्नी के साथ एलजी वीके सक्सेना से शिष्टाचार मुलाकात की थी। यह उनके जेल से छूटने के बाद की राजनीति का भाग हो सकता है। एलजी के एक्स पोस्ट से बात बिगड़ी जिसे मीडिया ने उनके बयान की तरह माना और मीडिया ने सोनम का पक्ष मांगा। इससे सोनम वांगचुक भड़क गए स्थिति स्पष्ट की और बाद में जब कॉक्रोच जनता पार्टी बनी तो उससे जुड़ गए। यह सब पहले से सार्वजनिक है। इसलिए इसमें किसी साजिश की गुंजाइश ही नहीं है और होती तो सोनम जंतर मंतर पर क्यों दोहराते। मोटा मोटी हुआ यह है कि एलजी के व्यवहार से वे सीजेपी से जुड़ने के लिए प्रेरित हुए। फिर भी अनशन खत्म करने की शर्त घोषित करते ही ऐसी प्रतिक्रिया हुई जैसे धर्मेंद्र प्रधान को नहीं हटाया जाए तो सोनम वांगचुक को मर जाना चाहिए।
गजब की राजनीति चल रही है और उसे वैसी ही फूहड़ पत्रकारिता का समर्थन मिल रहा है। मैं इसी को रेखांकित करने की कोशिश करता हूं। मुझे लगता है कि अनशन खत्म करने की शर्त घोषित किए जाने के कारण आज के मार्च का मुद्दा कमजोर कर दिया गया और इसकी खबर ही नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस में दो कॉलम की खबर का शीर्षक है, प्रदर्शनकारी आज संसद मार्च के लिए तैयार; इजाजत नहीं दी जाएगी : पुलिस। इंडियन एक्सप्रेस ने आज सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि अंगमो का एक लेख भी छापा है जिसका शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा – “सोनम में मुझे कोई प्रदर्शनकारी नहीं दिखता। मुझे लगता है कि एक शिक्षक को उसके काम से अलग खींच लिया गया है”। कहने वाले कह सकते हैं, कहते रहे हैं कि खींचने वाला अभिजीत दिपके है पर मैं मानता हूं कि खींचने वाली व्यवस्था है और वही चाहती है कि मर जाएं तो मर जाएं पर अपनी मांग पर डटे रहें।, दि एशियन एज में सीजेपी के संसद मार्च की खबर आज तीन कॉलम में पहले पन्ने पर है। शीर्षक में लिखा है, पुलिस ने धारा 163 लगाई। उपशीर्षक है, वांहचुक ने मार्च को आजादी का दूसरा आंदोलन कहा। एक और उपशीर्षक है, जंतर मंतर पर रात में निगरानी के लिए प्रदर्शनकारी जुटे। द टेलीग्राफ की लीड फुटबॉल की खबर है लेकिन सेकेंड लीड सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अपील पर हाईकोर्ट के आदेश की खबर है। इसका शीर्षक है, सोनम का अस्पताल बदलने की अपील पर हाईकोर्ट ने हाथ झाड़ा। आज की दूसरी बड़ी और दिलचस्प खबर तृण मूल कांग्रेस के बागी सांसदों को अलग से मान्यता देने और उससे संबंधित खबरें हैं। आप जानते हैं कि ‘सरकार’ ने कितने और किन मामलों में मुंह नहीं खोला है। अयोध्या के मंदिर में चंदा चोरी इनमें प्रमुख है। शिक्षा मंत्री के खिलाफ कार्रवाई दूसरा प्रमुख मामला है। जैसा मैंने शुरू में बताया, यह सब खबर नहीं है। हालांकि, इससे और मानसून सत्र से संबंधित सर्वदलीय बैठक की खबर दि एशियन एज, नवोदय टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया में है। आज से संसद का सत्र शुरू होने की खबर सिर्फ टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडियन एक्सप्रेस में लीड है। हिन्दी अखबारों में नवोदय टाइम्स की लीड का फ्लैग शीर्षक है, संसद का मानसून सत्र आज से। मुख्य शीर्षक है, विपक्ष की मांग अयोध्या, पेपर लीक पर चर्चा, सरकार ने मांगा सहयोग। अंग्रेजी अखबारों में आज ऐसी खबर इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया में ही है। इंडियन एक्सप्रेस का फ्लैग शीर्षक है, नीट पेपर लीक, चढ़ावा चोरी मानसून सत्र में हावी रहेगा। मुख्य शीर्षक है, विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक से वाकआउट किया। इंडियन एक्सप्रेस में इंट्रो है, तृणमूल के बागियों को निमंत्रण से विपक्ष नाराज, रिजिजू ने कहा, सरकार की जिम्मेदारी है कि सबको आमंत्रित करे।
द टेलीग्राफ की खबर का शीर्षक है, टीएमसी के ‘बागियों’ को लेकर विपक्ष का वॉक आउट। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, बागियों को बुलाने पर भड़का विपक्ष। दैनिक भास्कर की सवा दो कॉलम की खबर का फ्लैग शीर्षक है, हंगामा – मानसून सत्र आज से, उससे पहले बुलाई थी मीटिंग। मुख्य शीर्षक है, सर्वदलीय बैठक; टीएमसी के बागी सांसद पहुंचे, विपक्ष का वॉकआउट। उपशीर्षक है – कुछ देर में वापस लौटे कहा – विरोध प्रतीकात्मक था। टाइम्स ऑफ इंडिया में कुमार राकेश की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने अपने फ़ैसले का बचाव करते हुए कहा कि वह उन 20 सांसदों के गुट को जगह देने से इनकार नहीं कर सकती, जिन्होंने एनसीपीआई के साथ अपने विलय को मान्यता दिलाने के लिए स्पीकर ओम बिरला से संपर्क किया है और जिन्हें लोकसभा में अलग सीटें दी गई हैं। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “हर गुट को आमंत्रित करना सरकार का कर्तव्य है।” सदन से वॉकआउट (बाहर जाने) की घटना को ज़्यादा तूल न देते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ कुछ समय के लिए था। मामला यह है कि लोकसभा में एक पार्टी के दो गुट हो गए हैं। बैठने की अलग व्यवस्था हो गई है। रिजिजू ने दोनों को मान्यता दी है जबकि दूसरे गुट का नई पार्टी में विलय अभी नहीं हुआ है या इसपर लोकसभा अध्यक्ष का फैसला नहीं हुआ है। तृणमूल कांग्रेस ने इसपर आपत्ति की है। आज की अन्य प्रमुख खबरें 1) जम्मू और कश्मीर में भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ से 11 लोगों की मौत। पुंछ में नौ और राजौरी में दो लोगों की मौत की खबर है; शुरुआती अनुमान के मुताबिक, बाढ़ में 100 से ज़्यादा घर और लगभग दो दर्जन स्कूल की इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं हैं। (द हिन्दू की लीड है) 2) हिन्दुस्तान टाइम्स की एक खबर के अनुसार उत्तर प्रदेश में हिरासत में मौत के एक मामले में हाईकोर्ट ने न्यायपालिका, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दोष गिनाए तो सुप्रीम कोर्ट आगे आया और कार्रवाई पर रोक लगा दी। 3) बंगाल में अराजकता का माहौल अभिषेक 4) चढ़ावा चोरी पर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती सरकार (देशबन्धु) 5) दिल्ली के न्यू उस्मानपुर में डकैती। कारोबारी के घर वालों को बांधकर लाखों लूट ले गए।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



