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दिल्ली

आउटलुक के पत्रकार को दिल्ली प्रदर्शन की कवरेज में लगे पैलेट गन के छर्रे!

Arm with many small dark marks next to a whiteboard filled with hand-drawn diagrams and notes.

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई की कवरेज कर रहे आउटलुक इंडिया के एक रिपोर्टर को पैलेट जैसे घाव लगने का दावा किया गया है। रिपोर्टर के मुताबिक, जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के दौरान जब सुरक्षा बलों की ओर से आंसू गैस छोड़ी जा रही थी, तभी उनकी ओर भी कथित तौर पर बंदूक जैसी दिखने वाली एक वस्तु तानी गई।

रिपोर्टर ने बताया कि उन्होंने जैसे ही हथियार अपनी ओर तना देखा, वह तुरंत मुड़कर भागे। इसी दौरान उनकी पीठ पर टंगे बैग और बांह पर कुछ आकर लगा। उनका कहना है कि यदि वह समय रहते नहीं मुड़ते, तो चोट उनके सीने या चेहरे पर लग सकती थी।

घटना के बाद तैयार मेडिकल रिकॉर्ड में उनकी बांह पर कई छोटे-छोटे छिद्रनुमा घाव दर्ज किए गए हैं। आउटलुक इंडिया के अनुसार, उपलब्ध तस्वीरों में ये चोटें पैलेट जैसे घावों से मिलती-जुलती दिखाई देती हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान पहले आंसू गैस के गोले हवा में दागे गए, लेकिन बाद में कुछ गोले कथित तौर पर सीधे प्रदर्शनकारियों की ओर छोड़े गए। रिपोर्टर का दावा है कि उन्होंने एक प्रदर्शनकारी को माथे पर आंसू गैस का गोला लगते हुए देखा, जिससे उसके सिर से खून बहने लगा।

इसी बीच प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन के इस्तेमाल के दावे पूरी तरह झूठे और भ्रामक हैं।

उधर, बुधवार को इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट से पुलिस कार्रवाई के वीडियो देखने और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इस पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, “हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।” इसके बाद अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।


पिछले दो दिनों से जिस व्यापक आरोप की चर्चा सुन रहा था, उसका यह पहला दस्तावेजी सबूत सामने आया है कि सोमवार को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
यह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है!
-योगेंद्र यादव, राजनीतिक कार्यकर्ता

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