यह फोटो विश्व गुरु की पूरी हकीकत बयान कर देता है. शर्म नहीं आती इस निजाम को देश की इज़्ज़त के साथ खिलवाड़ करने में. 140 करोड़ आबादी वाले देश को विदेशी धरती पर घुटनों के बल खड़ा कर दिया. -महेंद्र मिश्र (वरिष्ठ पत्रकार)
कनुप्रिया-
“He was keen to brief you, his visit to Ukraine” (वह आपको यूक्रेन की अपनी यात्रा के बारे में जानकारी देने के इच्छुक थे)
ये शब्द एक देश के राष्ट्रपति को दूसरे देश का प्रतिनिधि कह रहा है.. क्या हैं हम? रशिया की कालोनी हैं?
ऐसा लगा जैसे किसी रियासत के राजा, अंग्रेज़ गवर्नर को अपने क्रिया कलापों की कैफ़ियत दे रहा हो.
विदेश में देश के सम्मान और अपमान की बात करने वाले, दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्षों के आगे हाथ बाँधे खड़े हों, उन्हें अपने actions & policies की ब्रीफिंग दे, इससे अधिक देश का अपमान क्या हो सकता है?
बाक़ी अंग्रेज के दया, रहमों करम पर गद्दी पर बने वाले राजा भी भले उनके दरबार में चूहे रहे हों अपने घर और अपने दरबार में तो शेर ही हुआ करते थे. उनके चारण भाट भी उनकी वीरता के किस्से गाते होंगे. जनता यही समझती होगी माई बाप ही अन्नदाता हैं.
भक्तगणों का कहना है कि ऐसी बातें करना विदेश नीति की नासमझी दर्शाता है.
सम्भवतः विदेशी माई बापों को किसी तरह झुककर, तोहफ़े देने, उनके दरबार में हाज़िरी देने, महँगे दामों पर उनके हथियार खरीदने, उनके सीमा उल्लंघन पर चुप रहने और देश के संसाधनों को बिना चूँ किये सौंपने को ही वे विदेश नीति समझते हैं. हम शर्म निरपेक्ष हैं.
अमित चतुर्वेदी-
भक्क नहीं मानेंगे लेकिन ये क़तई विश्व गुरु की भाषा नहीं, एनएसए अजित डोभाल जिस तरह समर्पित भाव से पुतिन से कह रहे हैं, “प्रधानमंत्री जी ने जैसा कि फ़ोन पर कहा, वो आपको अपनी यूक्रेन की यात्रा के बारे में एवं प्रेसिडेंट जेलेंस्की से मुलाक़ात के बारे में बताने के लिए उत्सुक थे। वो चाहते थे कि मैं उनकी मुलाक़ात का ब्यौरा आपसे व्यक्तिगत रूप से मिलकर दूँ। प्रेसिडेंट से उनकी मुलाक़ात एक क्लोज फ़ॉर्मेट में हुई। मुलाक़ात में दो नेता मौजूद थे साथ में उनके दो लोग और थे और प्रधानमंत्री की तरफ़ से मैं मौजूद था।”
ये वीडियो रुस की आधिकारिक मीडिया एजेंसी स्पुतनिक ने जारी किया है। सवाल ये उठता है कि दो देशों के बीच हुई आधिकारिक यात्रा का विवरण तीसरे देश को क्यों देना चाहिए, वो भी इतना समर्पित भाव के साथ?
नीचे देखें फ्रांस के चैनल स्पुतनिक टीवी में भारतीय एनएसए और पुतिन की मुलाकात की चली फुटेज..
प्रशांत टंडन-
जिसके अंदर भी ज़रा भी आत्म सम्मान है और वो डरा हुआ नहीं है वो इस तरह कभी नहीं बैठेगा जैसे अजीत डोभाल पुतिन से सामने कुर्सी के कोने में बैठे हैं.
ये मोदी की विदेश नीति की तस्वीर है जिसमे राष्ट्रहित और संप्रभुता के सिद्धांत नदारत हैं.




