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जंतर-मंतर पर ट्रोल हुए एनडीटीवी के रवीश रंजन के लिए यशवंत सिंह, रवीश कुमार और कादंबिनी शर्मा ने क्या कहा? पढ़ें

यशवंत सिंह-

एनडीटीवी में कुछ ऐसे अच्छे पत्रकार भी हैं जो निजाम चेंज होने के बाद बने हुए हैं।

प्रणय रॉय से अदानी ने जब चैनल छीना तो बहुत लोग छोड़ गए और कुछ क्रमशः रिटायर होते गए। रवीश रंजन शुक्ला अब भी बने हुए हैं। मैनेजमेंट ने उन्हें जंतर मंतर कवर करने भेज दिया।

Man with gray hair and glasses sits on the ground outdoors during an interview, a red news microphone resting near his chest.

एनडीटीवी अब सरकारी चैनल है। प्रदर्शनकारियों को ये पता है। इसलिए एनडीटीवी की माइक आईडी देखते ही रवीश रंजन को घेर लिया गया और उनके साथ बदतमीजी की गई।

सच्चे और ईमानदार पत्रकारों से अपील है वे गोदी चैनलों में काम करते हैं तो चैनल की माइक आईडी लेकर कवरेज करने न जायें। लोग मीडिया के गोदी होने से बहुत गुस्से में हैं।


यस। आप विरोध करें मगर रिपोर्टर के पास न जाएँ और पता होना चाहिए कि कौन रिपोर्टर कैसा है। रवीश रंजन का पूरा जीवन जनता की स्टोरी के साथ गुज़रा है। आपका विरोध हुड़दंग में नहीं बदलना चाहिए।
-रवीश कुमार


मेरे पूर्व सहयोगी रविश रंजन शुक्ल मीडिया में मिले सबसे संवेदनशील रिपोर्टरों में से एक हैं। केवल इस वजह से कि उनके हाथ में किसी खास चैनल का माइक है, उन्हें निशाना बनाना न सिर्फ गलत है, बल्कि इससे किसी का भी भला नहीं होगा।
-कादंबिनी शर्मा

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