यशवंत सिंह-
पत्रकारिता के हत्यारे : संजय पुगलिया कभी वरिष्ठ और सम्मानित पत्रकार हुआ करते थे। संजय पुगलिया की छवि एक साफ़-सुथरे और ठीकठाक पत्रकार की रही है। पुगलिया ने दशकों की मेहनत से अपनी साख बनाई। लेकिन बुढ़ापा आते आते इतने पतित हुए कि जनता की आवाज़ उठाने की बजाय अदानी के नौकर बन गए। वही अदानी जो आज विविध तरीकों से जल जंगल जमीन निगलता जा रहा है। वही अदानी जो सत्ता के संरक्षण में महा दैत्याकार कॉर्पोरेट बन गया है।

संजय पुगलिया का करियर प्रिंट, ब्रॉडकास्ट और डिजिटल मीडिया तीनों ही माध्यमों में रहा है। वे मुख्य रूप से हिन्दी पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं, लेकिन अंग्रेजी में भी काम किया है। 
उन्होंने अपना पत्रकारिता करियर 1982 में Navbharat Times (The Times Group) से शुरू किया। वहाँ वे लगभग 10 साल तक संवाददाता रहे। इसके बाद उन्होंने इंग्लिश अखबार Business Standard में डिप्टी ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। बाद में उन्होंने ब्रॉडकास्ट मीडिया को अपनाया — उन्होंने कई नामी समाचार चैनलों और मीडिया आउटलेट्स के साथ काम किया है, जैसे कि Aaj Tak, Star News, Zee News, और CNBC Awaaz। विशेष रूप से, उन्होंने CNBC Awaaz में एडिटर-इन-चीफ और सीनियर एंकर की भूमिका निभाई थी। डिजिटल मीडिया में भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी। वे कुछ समय के लिए The Quint के एडिटोरियल डायरेक्टर थे।
2021 में, Adani Enterprises (अडानी ग्रुप) ने घोषणा की कि संजय पुगलिया उनकी मीडिया वेंचर (Media Initiatives) का नेतृत्व करेंगे। उन्हें CEO और Editor-in-Chief के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके बाद, दिसंबर 2022 में, जब NDTV (New Delhi Television Ltd.) के बोर्ड में बदलाव हुआ, तो संजय पुगलिया को अतिरिक्त निदेशक (Additional Director) नियुक्त किया गया।
संजय पुगलिया का काम अब पत्रकारिता करना नहीं रह गया है। वे अदानी के साम्राज्य के चौकीदार बन गए हैं। दिन भर वे यही देखते हैं कि अदानी के ख़िलाफ़ किसने पब्लिश किया, क्यों पब्लिश किया। अदानी जी के बारे में अच्छा अच्छा पब्लिश हो जाए, अदानी जी पर किसी किस्म की आँच न आए, यही सब काम पुगलिया जी करते हैं। इसके एवज में भारी भरकम पगार पाते हैं।
ये कोई बुरा काम नहीं है। बहुत से लोग पीआर करते हैं। कंपनियों के छवि निर्माण के धंधे में रहते हैं। दुख तब होता है जब एक सरोकारी पत्रकार, जनता का पत्रकार पाला बदल ले और आम आदमी की बात करने की बजाय आम आदमी को कुचलने वालों का प्रतिनिधि बन जाये। संजय पुगलिया का बतौर पत्रकार जब जब विश्लेषण होगा, उनके महापतन की गाथाएँ लिखी जायेंगी।
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जल्द पढ़िए – एनडीटीवी की मुख्यधारा से क्यों साइड किए गए पुगलिया!
( संजय पुगलिया के बारे में आपके क्या विचार हैं, भड़ास तक पहुंचाएं, मेल करें : [email protected] )


