संजय शर्मा-
कभी-कभी मैं खुद सोचता हूँ कि मैं इतना मस्तमौला कैसे हो सकता हूँ!
आज बॉम्बे हाईकोर्ट में हमारी फिल्म सहिया के मुकदमे की सुनवाई है. जिस फिल्म में इतना समय, मेहनत और दिल लगा हो, उसकी सुनवाई से पहले बेचैनी होना स्वाभाविक है. लेकिन मेरा मन शायद कुछ अलग ही तरह से बना है. मुश्किल कितनी भी बड़ी हो, दोस्तों के बीच बैठकर हँसने की वजह तलाश ही लेता हूँ.
हैदर भाई इन दिनों लखनऊ में बहुत व्यस्त हैं. फिर भी मेरा मुकदमा हो तो अपने कामों के बीच मेरे लिए वक्त निकालकर पहुँच ही जाते हैं. कल शाम मुंबई आए और आते ही किताबों और इंटरनेट पर मुकदमे से जुड़ी चीजें पढ़ने लगे.
मैंने पूछा, भाई, कितनी देर लगेगी?
उन्होंने कहा, दो-तीन घंटे तो लगेंगे.
मैंने कहा, अरे छोड़िए, मुकदमे तो होते रहते हैं. आज पहले दोस्तों के साथ बैठते हैं. पार्टी करते हैं!
पार्टी का इंतजाम मैं पहले ही कर चुका था. फिर महफिल सजी. उद्भव ओझा भाई, अश्वनी भाई, वैष्णवी शर्मा, फैसल मलिक, परितोष भाई और बाकी दोस्तों ने खूब रंग जमाया. फिजा और अम्बिका तो घर की हैं ही.

हैदर भाई ने इतना बढ़िया गाना सुनाया कि शाम और खूबसूरत हो गई. गाने, बातचीत और ठहाकों के बीच कब रात के तीन बज गए, पता ही नहीं चला.
फ़िज़ा भी गायिका हो गयी है ये सभी को कल पता चला…
हैदर भाई मुझे देखकर कहने लगे, कैसे इंसान हो तुम! सुबह हाईकोर्ट में मुकदमा है और तुम रात के तीन बजे तक पार्टी कर रहे हो. कोई और होता तो टेंशन में बैठा होता. तुम्हें किसी चीज की चिंता नहीं होती?
मैंने हँसकर कहा, भाई, यही तो मेरे साथ समस्या है. चिंता मेरे सिर पर चढ़ती ही नहीं!
सच कहूँ तो ऐसे वक्त में जब कोई अपना सारे काम छोड़कर आपके पास आ जाता है, तो मन का बहुत-सा बोझ अपने आप हल्का हो जाता है. कल हैदर भाई को देखकर भी यही लगा. मुकदमे की तैयारी अपनी जगह थी, लेकिन उनका साथ होना मेरे लिए उससे भी बड़ी तसल्ली थी.
और फिर इतने अपने लोग एक साथ मिल जाएँ तो उस शाम को चिंता के हवाले कैसे कर दूँ? मैं चाहता हूँ कि मेरे घर आने वाले दोस्त अपने साथ कुछ हँसी, कुछ गीत और कुछ अच्छी यादें लेकर जाएँ.
रात तीन-चार बजे सोए, सुबह सात बजे उठे और अब बॉम्बे हाईकोर्ट की तरफ रवानगी.
अदालत में आज क्या होगा, वहाँ जाकर पता चलेगा. लेकिन कल की रात ने एक बार फिर एहसास दिलाया कि मेरे साथ खड़े होने वाले लोग कितने प्यारे हैं.
शायद मेरी मस्ती की वजह भी यही है. इतना अपनापन मिल जाए तो मुश्किलों के बीच भी मुस्कुराने की हिम्मत बनी रहती है.



