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सुल्तानपुर से छपने वाले 51 पत्र-पत्रिकाओं का वजूद खतरे में!

मोदी युग छोटे मझोले पत्र पत्रिकाओं के लिए अभिशाप साबित हुआ है. भांति भांति के कानूनों के जरिए छोटे पत्र पत्रिकाओं की हत्या कर दी गई और की जा रही है. हालांकि बहुत सारे छोटे पत्र पत्रिका बस नाम के होते थे. वे केवल विज्ञापन लेकर कमाने के लिए निकलते थे. पत्रकारिता से उनका कोई सरोकार नहीं था. पर बहुत से ऐसे भी छोटे अखबार पत्रिकाएं बंद हो गईं जो अपने जन सरोकार के लिए चर्चित थे.

इसी क्रम में ताजा सूचना है कि सूचना प्रसारण मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए पांच साल से सालाना विवरण ने देने वाले अखबारों पत्रिकाओं के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है. इस बारे में एक आदेश जारी कर दिया गया है. इस आदेश के अनुपालन के लिए संबंधित जिलों के अधिकारियों ने कार्रवाई की शुरुआत कर दी है. इसी सिलसिल में यूपी के सुल्तानपुर जिले में कई पत्र पत्रिकाओं को नोटिस जारी किया गया है. देखें आदेश और सुल्तानपुर के उन पत्र पत्रिकाओं की लिस्ट जिन पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है.

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