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उत्तर प्रदेश

‘सुपर-5’ में ग़ाज़ीपुर के पुलिस कप्तान डॉ इरज राजा भी!

फेम इंडिया–एशिया पोस्ट के ‘सुपर-5’ की लिस्ट जारी

Police officer in khaki uniform with beret, seated at a desk in an office.

अपराध नियंत्रण से साइबर क्राइम तक प्रभावी पुलिसिंग की पहचान बने डॉ. इरज राजा

नई दिल्ली। फेम इंडिया–एशिया पोस्ट ने देश के चुनिंदा पुलिस अधिकारियों के काम और नेतृत्व का आकलन करते हुए पांच अधिकारियों को विशेष ‘सुपर-5’ श्रेणी में जगह दी है। इस सूची में उत्तर प्रदेश से गाजीपुर के पुलिस कप्तान डॉ. इरज राजा का भी नाम शामिल है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में विशिष्ट पुलिसिंग के लिए पहचान बनाने वाले पांच अधिकारियों में डॉ. इरज राजा के साथ आंध्र प्रदेश सीआईडी एवं साइबर क्राइम के अधिराज सिंह राणा, केरल के पथनमथिट्टा के आर. आनंद, हिमाचल प्रदेश के शिमला के गौरव सिंह और हरियाणा के चरखी दादरी के लोगेश कुमार पी. शामिल हैं।

डॉ. इरज राजा का चयन खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गाजीपुर जैसे जिले में पुलिसिंग के दौरान उन्हें अपराध नियंत्रण के साथ-साथ संगठित अपराध, साइबर अपराध, कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा जैसी अलग-अलग चुनौतियों से जूझना पड़ा है। फेम इंडिया–एशिया पोस्ट की पिछली 100 सर्वश्रेष्ठ पुलिस कप्तानों की सूची में भी उनका नाम शामिल किया गया था।

MBBS डॉक्टर से IPS तक का सफर

डॉ. इरज राजा 2017 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उनका जन्म आगरा में हुआ और उन्होंने MBBS तथा MDPM की शिक्षा हासिल की है। 18 दिसंबर 2017 को IPS में भर्ती होने के बाद उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं और 13 जुलाई 2024 से गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं।

उनके सेवा रिकॉर्ड में तीन DGP Commendation Disc भी दर्ज हैं—अगस्त 2020 में सिल्वर, मार्च 2023 में गोल्ड और जनवरी 2025 में प्लेटिनम।

गाजीपुर में शुरुआत से दिखे कड़े तेवर

गाजीपुर की कमान संभालने के बाद डॉ. इरज राजा ने अपराधियों को लेकर सख्त संदेश दिया था। उन्होंने ऐसे अपराधियों को चिह्नित करने की बात कही थी जिनके खिलाफ दो या उससे अधिक मुकदमे दर्ज हैं। सक्रिय अपराधियों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ हिस्ट्रीशीट, गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई पर जोर दिया गया।

उनकी पुलिसिंग में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ अपराध के नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर चिह्नित करने पर भी जोर दिखाई देता है। जून 2026 में ‘ऑपरेशन वज्रपात’ के तहत गाजीपुर पुलिस ने 50 आपराधिक गिरोह और उनके 401 सदस्यों को चिह्नित किए जाने की जानकारी दी थी। इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य नए आपराधिक नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर पहचानकर उन पर शिकंजा कसना रहा।

साइबर अपराध पर भी फोकस

डॉ. इरज राजा के कार्यकाल में गाजीपुर पुलिस की चुनौती केवल पारंपरिक अपराधों तक सीमित नहीं रही। साइबर अपराध के मामलों में भी पुलिस ने कार्रवाई की। अप्रैल 2026 में गाजीपुर साइबर क्राइम सेल ने एक अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े तीन कथित आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक मामला करीब 67 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड से जुड़ा था और जांच में कई राज्यों में दर्ज मामलों तथा बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों का पता चला था।

यानी डॉ. इरज राजा की पुलिसिंग में एक तरफ अपराधियों पर सीधी कार्रवाई दिखाई देती है तो दूसरी तरफ अपराध के बदलते तौर-तरीकों के अनुरूप साइबर अपराध पर भी जोर है।

जनता से जुड़ी पुलिसिंग पर भी जोर

डॉ. इरज राजा की कार्यशैली का एक पहलू पुलिस की जवाबदेही और जनता तक उसकी पहुंच को मजबूत करना भी रहा है। अलग-अलग तैनातियों के दौरान उन्होंने पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और आम लोगों की शिकायतों के समाधान पर जोर दिया है। गाजीपुर में भी अपराध नियंत्रण के साथ जनसुरक्षा और पुलिस की सक्रिय मौजूदगी को प्राथमिकता दी गई है।

इसलिए महत्वपूर्ण है ‘सुपर-5’ में जगह

फेम इंडिया–एशिया पोस्ट के मुताबिक इस चयन में केवल पद या वरिष्ठता को आधार नहीं बनाया गया, बल्कि फील्ड अनुभव, नेतृत्व क्षमता, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता, अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था प्रबंधन, नागरिक सेवाओं, पुलिस आधुनिकीकरण, नवाचार और जनता के बीच पुलिस की विश्वसनीयता जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया है।

इसी व्यापक कसौटी पर डॉ. इरज राजा को ‘सुपर-5’ में जगह मिलना गाजीपुर की पुलिसिंग के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। एक ऐसे समय में जब पुलिस के सामने पारंपरिक अपराधों के साथ साइबर क्राइम, संगठित अपराध, मादक पदार्थ, महिला एवं बाल सुरक्षा और तकनीकी अपराध जैसी नई चुनौतियां हैं, डॉ. इरज राजा की कार्यशैली इन बदलती चुनौतियों के बीच पुलिस नेतृत्व की एक अलग तस्वीर पेश करती है।

फेम इंडिया के संपादक धीरज कुमार के अनुसार ‘सुपर-5’ में शामिल अधिकारियों ने पुलिसिंग के अलग-अलग महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य और नेतृत्व क्षमता के कारण अपनी पहचान बनाई है।

फेम इंडिया के प्रबंध संपादक अनिल सिंह का कहना है कि बदलते अपराध परिदृश्य में पुलिस नेतृत्व से नई दक्षताओं की मांग हो रही है। फेम इंडिया–एशिया पोस्ट का यह चयन ऐसे अधिकारियों को सामने लाने का प्रयास है, जो पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, तकनीक-सक्षम, उत्तरदायी और जनकेंद्रित बनाने में भूमिका निभा रहे हैं।

‘सुपर-5’ में शामिल पांच अधिकारी

डॉ. इरज राजा — गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

अधिराज सिंह राणा — सीआईडी एवं साइबर क्राइम, आंध्र प्रदेश

आर. आनंद — पथनमथिट्टा, केरल

गौरव सिंह — शिमला, हिमाचल प्रदेश

लोगेश कुमार पी. — चरखी दादरी, हरियाणा

देश के 25 प्रमुख पुलिस अधिकारी

अदिति सिंह — पंचकूला, हरियाणा
आकाश पटेल — चंदौली, उत्तर प्रदेश
अनंत मित्तल — दक्षिण दिल्ली, दिल्ली
अनुराग आर्य — बरेली, उत्तर प्रदेश
अपर्णा रजत कौशिक — मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश
इलामारन जी — एटा, उत्तर प्रदेश
कृषिकेश रावले — पुणे, महाराष्ट्र
कंवरदीप कौर — चंडीगढ़, पंजाब
गुंडाला रेड्डी राघवेंद्र — झारसुगुड़ा, ओडिशा
गौरव राय — दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़ (अब बलोदाबाजार)
चंद्रशेखर घोड़के — अल्मोड़ा, उत्तराखंड
डॉ. अमृता दुहन — उदयपुर, राजस्थान
जी.वी. संदीप चक्रवर्ती — श्रीनगर, कश्मीर
नुमल महट्टा — बोगईगांव, असम
नवजोत सिमी — अरवल, बिहार
पापिया सुल्ताना — पश्चिम मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल
प्रभात कुमार — धनबाद, झारखंड
बलबीर सिंह — हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश
मनिंदर सिंह — रूपनगर (रोपड़), पंजाब
मुथुराजू एम. — चामराजनगर, कर्नाटक
विजय पटेल — खेड़ा, गुजरात
विवेक सायम — ईस्ट खासी हिल्स, मेघालय
शशांक जायसवाल — दिल्ली ट्रैफिक (अब रोहिणी), दिल्ली
सुशील कुमार — गयाजी, बिहार
श्रद्धा तिवारी — भोपाल, मध्य प्रदेश

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