कल छत्तीसगढ़ में आई तेज़ आंधी ने न केवल पेड़-पौधों और छतों को उड़ाया, बल्कि पत्रकारिता के पन्नों को भी एक-दूसरे से उलझा दिया। प्रदेश के चार प्रमुख अख़बार — दैनिक भास्कर, हरिभूमि, पत्रिका और नवभारत — सबने आंधी की रफ्तार नापी, लेकिन ऐसा लगा जैसे सबने अपनी-अपनी जेब में रखे पर्सनल पवन-मापी यंत्रों का इस्तेमाल किया हो।
दैनिक भास्कर के मुताबिक़, आंधी की रफ्तार थी “74 किलोमीटर प्रति घंटा” — इतनी तेज़ कि रिपोर्टर की टोपी भी उड़ गई और उसे बाद में 2 किलोमीटर दूर जाकर मिली।
पत्रिका ने कुछ और ही दावा कर दिया — “60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी ने इतिहास रच दिया”। अब यह पता नहीं चल पाया कि यह इतिहास किसने पढ़ा, पर अख़बार ने उसे पहले ही लिख दिया।
हरिभूमि ने लिखा — “70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली आंधी ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया”। यानि उनके हिसाब से आंधी थोड़ी व्यस्त थी लेकिन अस्त नहीं।
वहीं नवभारत ने सबसे विकराल रवैया अपनाया: “95 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली, मौसम खतरनाक हुआ” — और आंधी ने एक रिकॉर्ड तोड़ दिया।
इस बीच मौसम विभाग, जो हमेशा खबरों के बाद खबर में आता है, उसने कहा: “हमें तो 80 किलोमीटर की रफ्तार दर्ज हुई है, बाकियों को अपने मीटर की बैटरी बदलवानी चाहिए।”
प्रदेश की जनता असमंजस में है। एक वृद्ध ने कहा, “हम तो समझे बिजली गुल हुई है, पर ये तो अख़बारों की रिपोर्टिंग है जो रोशनी बुझा रही है।”
राजनीतिक विश्लेषकों ने इस पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि “यदि यही हाल रहा, तो अगली बार बारिश की बूँदों की गिनती भी अख़बार अलग-अलग बताएंगे।”
फिलहाल, छत्तीसगढ़ की जनता यही सोच रही है — आंधी आई कितनी? और चली किसके हिसाब से?
आलोक पुतुल-
सबके संजय अलग-अलग हों तो ऐसा ही होता है.
कल शाम रायपुर समेत छत्तीसगढ़ में तेज़ आंधी चली. एक ही शहर के, अलग-अलग अखबारों में इसकी अलग-अलग रफ़्तार देखिए…






