नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन की कवरेज के दौरान Times Now के पत्रकार देव कोटक पर कथित हमले का मामला सामने आया है। पत्रकार का आरोप है कि रिपोर्टिंग के दौरान 100 से अधिक लोगों की भीड़ ने उन्हें घेर लिया, उनके साथ मारपीट की, कपड़े फाड़ दिए और उनकी घड़ी व मोबाइल फोन छीन लिया।
घटना के बाद सामने आए वीडियो में देव कोटक की फटी हुई शर्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि भीड़ “गोदी मीडिया” के नारे लगा रही थी और लगातार उनके साथ धक्का-मुक्की व मारपीट करती रही। उनका दावा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने बीच-बचाव करते हुए मानव श्रृंखला बनाई, जिसके बाद वह वहां से सुरक्षित निकल सके।
देव कोटक ने यह भी कहा कि उन्होंने इससे पहले सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, प्रवक्ता सौरव दास और अभिषेक रांका का इंटरव्यू भी किया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें भीड़ के गुस्से का सामना करना पड़ा।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले, 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान Times Now Navbharat की पत्रकार ज्योति मिश्रा के साथ भी कथित अभद्रता और हमले की घटना सामने आई थी। उन्होंने भी कैमरे के सामने पूरी घटना का विवरण साझा किया था।
पिछले डेढ़ दशक में न्यूज़ चैनलों ने चाटुकारिता और बेशर्मी की जो इंतेहा की, उसका नतीजा सामने है। सत्ता के पक्ष में दिन-रात नैरेटिव गढ़ने वाले एंकर जनता के बीच मुंह दिखाने लायक नहीं बचे। इसका खामियाजा रिपोर्टरों को भुगतना पड़ रहा है, जबकि उनकी कोई गलती नहीं है। वे सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। रिपोर्टरों को इस तरह निशाना बनाना गलत है। निंदनीय है।
-अजीत सिंह

टीवी चैनलों में सर्कुलर जारी ,कोई भी सत्ता के खिलाफ कोई वीडियो नहीं डालेंगे न ही यूथ की सपोर्ट वाले कोई आर्टिकल या पिक्चर , नहीं तो नौकरी जाएगी, मैं फिर कह रहा हूँ टीवी मीडिया से,सुधर जाओ अभी वक्त है जनता की आवाज बनो, वरना अब पिटने से कोई नहीं बचा पाएगा, स्टूडियो में बैठे चरण चुंबकों की सजा फील्ड का रिपोर्टर उठा रहा है, अगला नंबर स्टूडियो का होगा लिख लीजिए।
-कविंद्र सचान



जंतर मंतर पे Times Now के रिपोर्टर की पिटाई हो गई। अमूमन सभी टीवी चैनल के रिपोर्टर्स के साथ पब्लिक वहां इसी तरह पेश आ रही है। कारण है उनका गुस्सा कि चैनल वाले उनके आंदोलन को तरह तरह से बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस खबर पे पब्लिक के जो कमेंट आए हैं, उनका स्क्रीनशॉट लगा रहा हूं। देखिए जनता इनके बारे में क्या सोच रही है। इन न्यूज चैनल्स के मालिकों और संपादकों को अब जाग जाना चाहिए। एडिटोरियल पॉलिसी उनकी है, खदेड़ा जा रहा है रिपोर्टर्स को।
-डॉ नदीम अख्तर


