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उत्तर प्रदेश

उन्नाव रेप कांड में CBI गवाह बने पत्रकार वीरेंद्र यादव ने आईपीएस दीपक भूकर पर लगाये गंभीर आरोप!

यूपी के उन्नाव (माखी) रेपकाण्ड में सजायाफ्ता विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा निलंबित किये जाने के मामले नया मोड़ आ गया है। पीड़िता के पक्ष से CBI गवाह को तोड़ने, बयान व (गवाही) बदलने को लेकर गवाह पर फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने का मामला सामने आया है।

फैसला आने से कुछ दिनों पहले 50 दिन जेल काट कर छूटे CBI गवाह वीरेंद्र यादव ने उन्नाव पुलिस के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आईपीएस दीपक भूकर पर गंभीर आरोप लगाये हैं, CBI ने पीड़िता के पिता की मौत के मामले में वीरेंद्र यादव (पत्रकार) को CBI का गवाह बनाकर पुलिस सुरक्षा दी थी। पीड़ित ने उन्नाव पुलिस पर कुलदीप सिंह सेंगर के मामले में बयान बदलने का दबाव बनाकर उसे फर्जी मुकदमे में जेल भेजने का आरोप पुलिस पर लगाया है।

आईपीएस दीपक भूकर

साथ ही इस मामले में चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया व सीबीआई निदेशक को पत्र भेज कर CBI जाँच करा कर न्याय की गुहार लगाई है।

इस मामले में पीड़ित गवाह वीरेंद्र यादव ने शिकायती पत्र लिखकर अपने व परिवार को दी गयी यातनाओं और उत्पीड़न करने का उन्नाव पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया है। वहीं मुख्य रुप से इस मामले की साजिश रचने में उन्नाव के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आईपीएस दीपक भूकर पर शामिल होने का आरोप लगाया है व कुलदीप सिंह सेंगर से खिलाफ गवाही न बदलने पर झूठे मुकदमो में जेल भेज पुलिस हिरासत में कोतवाली में पिटाई करने, थर्ड डिग्री देने व आईपीएस दीपक भूकर के इशारे पर जेल भेजने का गंभीर आरोप लगाया है।

CBI गवाह ने शिकायती पत्र में लिखा है- पुलिस सुरक्षा हटने के चार दिन बाद ही उस पर गुंडा एक्ट की कार्यवाही की जाती है और उसके बाद गवाह वीरेंद्र यादव को बयान बदलने के लिए उन्नाव के तत्कालीन आईपीएस दीपक भूकर के इशारे पर शहर कोतवाल अजय सिंह, सब इंस्पेक्टर रवि मिश्रा ने उसे रास्ते से उठाकर उन्नाव कोतवाली ले आये। जहाँ कुलदीप सेंगर के मामले में गवाही बदलने के लिए थाने में कई घंटे थर्ड डिग्री दी गयी। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि उसकी हालत बिगड़ने पर पुलिस ने उसे फर्जी मामले में जेल भेज दिया। थर्ड डिग्री के दौरान गवाह को पिटाई की आवाजें सुनाने के लिए उसे आईपीएस दीपक भूकर, पीड़ित को पीट रहे पुलिस कर्मियों को कई बार फोन करते रहे हैं।

सीबीआई गवाह वीरेंद्र यादव को जेल भेजने के बाद पुलिस पत्रकार के घर पर देर रात दबिश देने भी पहुंची, जहाँ घर में अकेली पत्नी व बच्ची मौजूद थे। पुलिस ने मासूम बच्ची को पिस्टल की नोक पर माँ को डराया धमकाया। इस घटना से घबराया गवाह का परिवार कई दिन घर से बाहर पुलिस से जान बचा कर छुपता रहा..

हालांकि कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा निलंबित का फैसला होने के बाद गवाह ने अब न्याय की गुहार देश की सर्वोच्च अदालत और सीबीआई निदेशक को पत्र भेज कर की है। गवाह ने सीबीआई के निदेशक से पूछा है- सीबीआई उसकी और उसके परिवार को सुरक्षा नहीं दे सकती थी तो फिर उसे गवाह क्यों बनाया गया?

बहरहाल, इस मामले में कई सामाजिक संगठन न्यायालय के आदेश पर खिलाफत की आवाज उठा रहे हैं व पीड़िता के पक्ष में न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

सीजेआई को भेजे गए पत्र की प्रति..

(उपरोक्त पत्र सीबीआई निदेशक को भी भेजा गया है)

इस मामले में पुलिस अधिकारी दीपक भूकर का कहना है कि उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद है। ये जानबूझकर इमेज खराब करने की साजिश है।

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