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सुख-दुख

हिंदुस्तान अखबार के सीनियर क्राइम रिपोर्टर विधि सिंह का दिल की बीमारी से निधन!

Senior Correspondent of Hindustan Hindi Newspaper Vidhi Singh is no more.


डॉ अतुल मोहन सिंह-

पत्रकारिता जगत के लिए दुःखद समाचार

वरिष्ठ पत्रकार श्री विधि सिंह Vidhi Singh जी का हृदयाघात से अचानक निधन हो गया है। श्री सिंह वर्तमान में दैनिक हिंदुस्तान में कार्यरत थे। सीतापुर जनपद के कसमंडा के मूलनिवासी श्री विधि सिंह लखनऊ के त्रिवेणीनगर में रहते थे। उनके असामयिक निधन से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है। आपके विचार और सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता हमेशा स्मरण की जाती रहेगी। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को सद्गति तथा शोकाकुल परिवार एवं साथियों को इस असीम दुःख को सहने का साहस दें। साथी श्री विधि सिंह जी को भावभीनी श्रद्धांजलि, नमन


मनीष मिश्रा-

हृदय अत्यंत विषाद से भरा है। सगे भाई से बढ़कर प्यार देने वाला अनुज पत्रकार विधि हमारी आंखों के सामने लारी अस्पताल में अंतिम सांस ले रहा था और मैं असहाय सा खड़ा देखता रह गया। कुछ नहीं कर पाया। आशा और प्रार्थना के बीच मैं मौन खड़ा उसे निहारते रह गया। उस समय शब्द भी असहाय थे, प्रयास भी असमर्थ थे। मानो समय स्वयं ठहर गया हो और हम केवल ईश्वर की इच्छा के साक्षी बनकर रह गए। संभवतः परमात्मा को उसकी निर्मल आत्मा अधिक प्रिय हो गई। इसलिए उन्होंने उसे अपने समीप बुला लिया।

प्रभु से प्रार्थना है कि वे पावन आत्मा को शाश्वत शांति प्रदान करें और हमें इस वियोग को स्वीकार करने की शक्ति दें। ॐ शांति


सुधीर मिश्रा-

छोटे भाई जैसे विधि सिंह नहीं रहे। हिंदुस्तान अखबार में क्राइम रिपोर्टर थे। बेहद शालीन, सज्जन, सात्विक, मृदु भाषी शाकाहारी और कोई नशा नहीं करने वाले। करीब दस साल साथ में काम किया। उनके शादी ब्याह में शामिल हुआ था। बहुत कष्ट हो रहा है उनकी असामयिक मृत्यु से। मन में सवाल भी है कि विधि जैसे व्यक्ति को इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक। शायद पहले भी उन्हें हार्ट की प्रॉब्लम हुई थी। स्टंट भी पड़ा था। एक जवाब मन में आ रहा है। अपना घर चलाने और लिविंग स्टैंडर्ड को बेहतर रखने के हम में से ज्यादातर लोग कितना संघर्ष करते हैं। कितनी तरह के दबाव सहते हैं।

विधि रिपोर्टिंग के अलावा कोचिंग भी चलाते थे। उनके पास ख़ुद के लिए वक्त शायद नहीं था। सेहत ने इसकी क़ीमत चुकाई। इसीलिए मेरा मानना है सब मेहनत करें, आगे बढ़ें लेकिन एक मी टाइम होना चाहिए। ख़ुद को ख़ुश रखना बहुत जरूरी है। वरना फिर एक दिन अचानक आप सबको दुखी करके चले जाते हो। ईश्वर विधि की आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार मित्रों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें ॐ शांति


जीशान कदीर-

तस्वीर धुंधली है लेकिन यादें आज भी जिंदा और तरोताजा हैं… हिन्दुस्तान में पहले क्राइम रिपोर्टिंग और फिर ब्यूरो चीफ के पद पर रहकर मुझे एक लंबा समय बिताने का मौका मिला।

विधि सिंह यानि हिन्दुस्तान, या यूं कहें कि क्राइम रिपोर्टिंग से गुजरना है तो विधि भाई की सीख के बीच ही कुछ कर गुजरा जा सकता है। सो मुझे भी ऐसे मौके भर-भर मिले। उन अनुभवों का ही असर रहा कि क्राइम रिपोर्टिंग में मेरी ऊर्जा और जिज्ञासा बढ़ती चली गई।

मुझे मेरे जीवन की वो विषम परिस्थितियां याद हैं जब विधि जी का आना हुआ। उनकी मुस्कुराहट और सादगी के साथ किये गए प्रयास से मुझे जो संबल मिला उसने पीछे मुड़कर देखने का कभी मौका ही नहीं दिया।

सुबह रोजा रखने के लिए आंख खुली तो हिन्दुस्तान से जुड़े पुराने साथी भाई रजनीश रस्तोगी जी की वाल पर नजर पड़ी। देखकर असहज हुआ, फिर तमाम से सवाल उठते चले गए। कुछ अच्छा न लगा।

अनुभवी और क्राइम रिपोर्टिंग की दुनिया के महारथी विधि जी की बातें अमर उजाला सीतापुर के कर्मठ और जिंदादिल ब्यूरो चीफ भाई सुधांशु सक्सेना जी से हुई। कई और साथियों के टेलीफोन और मैसेज आए।

ईश्वर पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें, यही कामना करता हूं… आप यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे….


दिनेश पाठक-

बहुत याद आओगे प्यारे विधि.. मैं नोएडा में हूँ और अपने बहुत प्यारे साथी विधि सिंह के असमय दुनिया से जाने की दुखद सूचना साथी मनीष मिश्र की वाल पर पढ़ते हुए अवाक हूँ।

मनीष को कॉल लगाई तब पूरी कहानी पता चली। दिल के किसी हिस्से में ब्लॉकेज के चलते दो तीन महीने पहले स्टेंट पड़ा था। रात फिर से तकलीफ हुई। सब लेकर लारी अस्पताल पहुँचे। रास्ते में बात करते हुए गए विधि ने वहाँ पहुँचकर मौन साध लिया और मनीष समेत अनेक साथियों के सामने अनंत यात्रा पर निकल पड़ा। ऐसी यात्रा पर जहाँ से कोई नहीं आता लेकिन स्मृतियां हमारे मन में हमेशा रहती हैं।

विधि से मेरा रिश्ता करीब 20 साल से ऊपर का है। विनम्र, व्यवहारकुशल, रिश्तों को सहेजकर चलने वाला, छोटों के लिए बड़ा और बड़ो के लिए छोटे भाई जैसा स्नेहिल व्यवहार। मुझे अखबार छोड़े भी करीब 11 साल होने को है लेकिन विधि ठीक वैसे ही दिखे, मिले, बातें की, जैसे एक युवा के रूप में मिले थे। तब हिंदुस्तान अखबार का दफ्तर अशोक मार्ग पर हुआ करता था।

विधि में मुझे कभी सहयोगी नहीं दिखा। हमेशा छोटे भाई की तरह पेश आता। विधि को अपराध कवर करने की जिम्मेदारी मिली। जब भी किसी घटना की सूचना उसके पास आती, जूते स्लिप करते हुए तेज रफ्तार चीफ रिपोर्टर के रूप में मुझे बताता। न्यूज़ एडिटर, एडिटर को बताता। डेस्क से कहता जगह बनाकर रखना। घटना बड़ी है। मैं आकर लिखता हूँ। इतना सब करते हुए चेहरे पर तनाव नहीं होता।

लोग कहते हैं कि शराब-सिगरेट पीने से, मांसाहारी भोजन से दिल के रोग होते हैं। ठाकुर विधि सिंह का इस इलाके से कोई लेना-देना ही नहीं था। उम्र भी कुछ खास नहीं थी। हिंदुस्तान छोड़ने के वर्षों बाद तक हर छोटी से छोटी खुशी शेयर करता। कोई त्योहार नहीं, जिस पर विधि काल करना भूल जाएं।

चूँकि, लखनऊ छोड़ने के बाद मैं हिन्दुस्तान में रहा तो भी और अब नहीं हूँ तो भी, उसके व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं देखा। लगातार बाहर रहने की वजह से मिलना कम होता था लेकिन लगातार बातचीत होते रहने से कभी कमी नहीं महसूस हुई।

प्यारी सी बेटी, पत्नी, परिवार के बाकी सदस्यों को बिलखता छोड़ इस नौजवान को प्रभु अपने श्रीचरणों में स्थान दें। बच्चों को इस असीम दुख को सहन करने की क्षमता प्रदान करें। यह प्रार्थना है।


राजीव तिवारी बाबा-

विधि के विधान से हार गए विधि……..!!!

तीन दशक पुराने साथी हिंदुस्तान अखबार के क्राइम रिपोर्टर विधि सिंह का आकस्मिक निधन से मीडिया जगत में शोक…

जीवन की इस भागदौड़ में अक्सर हम भूल जाते हैं कि हर सांस एक उपहार है, हर पल एक अनमोल तोहफा। और जब यह तोहफा अचानक छिन जाता है, तो दिल टूट जाता है, आंसू रुकने का नाम नहीं लेते। हिंदुस्तान अखबार के निडर, जुझारू क्राइम रिपोर्टर विधि सिंह का अचानक चले जाना… यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक गहरा दर्द है, उनके लिए जो विधि के करीब थे। विधि हमारे कुबेर टाइम्स के दिनों के साथी थे।

विधि, नाम ही जिसका मतलब है नियति, भाग्य… और देखिए नियति की क्रूर लीला, विधि सिंह खुद विधि के विधान से हार गए। यह सोचकर सीने में एक टीस उठती है, आंखें नम हो जाती हैं। उनकी कलम, जो अपराधियों के दिलों में खौफ पैदा करती थी, समाज की रक्षा करती थी, अब हमेशा के लिए शांत हो गई। हृदयाघात ने उन्हें छीन लिया। कुछ दिन पहले ही उन्होंने स्टन डलवाया था, ये सोचकर कि आगे सबकुछ ठीक रहेगा मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था।

उनके परिवार का दर्द, उनके सहकर्मियों की उदासी, और उन अनगिनत पाठकों का शोक अकल्पनीय है जिनके लिए विधि सिंह की खबरें न्याय की उम्मीद थीं। यह नुकसान कितना बड़ा है! एक पिता, एक पति, एक भाई, एक दोस्त… चला गया।

“नैनं छिन्दंति शस्त्राणि, नैनं दहति पावकः…” आत्मा अमर है, शरीर तो बस एक वस्त्र है जो बदल जाता है। लेकिन यह ज्ञान भी आज दिल को सुकून नहीं दे पा रहा। उपनिषद बताते हैं कि आत्मा की यात्रा अनंत है, जन्म-मृत्यु का चक्र चलता रहता है, मोक्ष की ओर। फिर भी, विधि सिंह का यूं अचानक जाना हमें रोने पर मजबूर कर देता है। क्यों? क्योंकि हम इंसान हैं, भावनाओं से बने हुए। रामचरितमानस में तुलसीदास जी की वह पंक्ति याद आती है: “काल करम बस जीव जड़, माया बस गुण मूल।” जीव काल और कर्म के वश में है, लेकिन यह सच्चाई कितनी कड़वी लगती है जब कोई अपना चला जाता है। विधि सिंह ने क्राइम रिपोर्टिंग की दुनिया में डटकर लड़ाई लड़ी, लेकिन जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई – ‘मृत्यु’ – से वे हार गए। यह सोचकर दिल भर आता है।

उनकी यादें अब हमारी ताकत बनें। उनके सहकर्मी जब कोई नई स्टोरी कवर करेंगे, तो विधि सिंह की कमी महसूस करेंगे। उनकी सलाहें याद आएंगी। समाज में अपराध के खिलाफ उनकी आवाज अब हम सबकी आवाज बने। आइए, इस शोक को शक्ति में बदलें। आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनें – ध्यान करें, योग करें, सद्कर्म करें। क्योंकि विधि का विधान अटल है, लेकिन हमारा प्यार, हमारी यादें अमर हैं। विधि सिंह, तुम्हारी आत्मा को शांति मिले, तुम हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहोगे। अलविदा नहीं, क्योंकि कहीं गए नहीं हो तुम, बस रूप बदल लिया है।

ओम शांति… और आंसुओं के बीच एक प्रार्थना….”विधि सिंह, जहां भी हो, खुश रहो।”

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