बेशर्म पत्रिका वालों ने पंद्रह हजार रुपये पाने वालों की सेलरी पर भी कैंची चला दी है

राजस्थान पत्रिका ग्रुप के नोएडा वाले दफ्तर में कार्यरत मीडिया कर्मियों की सेलरी में से पिछले दो महीने से कटौती की जा रही है। जिनकी सैलरी पहले से 15-18 हजार थी, बेशर्मों ने उस पर भी कैंची चला दी है। जिनकी 30 से नीचे और 20 से ज्यादा है, उन्हें 15 हजार थमाया।

इस बार तो कोठारी साहब अति ही कर दिए। जो सैलरी हमेशा से हर हाल में 7 को आ जाती थी, वह सैलरी नहीं आई।

पूछने पर कि आगे कब मिलेगी, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। मीडियाकर्मियों का वर्क फ्रोम होम के नाम पर अलग से शोषण किया जा रहा है। 15 स्टोरी टारगेट देकर बंदूक के नोक पर पब्लिश करवाया जा रहा है। आफिस की तरफ से ना इंटरनेट के लिए कोई खर्चा दिया गया, न बहुत से कर्मियों को लैपटाप ही मिला है।

जिनके पास अपना जैसा तैसा लैपटाप था, रो धोकर उसी से सारंगी बजा रहे हैं। इसी में डिजिटल के नोएडा संपादक सबको हांकते-हूंफते रहते हैं।

लगता है सबसे ज्यादा अकाल कोठारी साहब के यहां पड़ा है! तभी इस‌ महीने का अभी तक कुछ अता पता नहीं है।

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One comment on “बेशर्म पत्रिका वालों ने पंद्रह हजार रुपये पाने वालों की सेलरी पर भी कैंची चला दी है”

  • Dinesh Tomar says:

    जयपुर, जोधपुर और दिल्ली से प्रकाशित ” दैनिक विराट वैभव ” के जयपुर के सभी कर्मचारियों को भी इस संकट की घड़ी में 31 मार्च को केन्द्र और राज्य सरकार के आदेश के बावजूद नौकरी से बिना अग्रिम वेतन के निकाल दिया गया है।
    सीएमओ, पीएमओ, सीएम, पीएम, डीपीआर, श्रम विभाग को भी ट्विटर पर लिखा गया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है।
    अखबार मालिक घाटे की दुहाई देते हैं, जबकि उनके लिए सब्जी, फल और राशन जयपुर से दिल्ली कार से जाता है।
    टैक्स से बचने के लिए इनके पास चैरिटी के लिए पैसा है लेकिन न्यूनतम वेतन वाले कर्मचारियों ( मजदूरों ) की सेलरी के लिए पैसा नहीं है।
    इनको अगर कर्मचारियों को निकालना था तो दो- तीन महीने पहले आगाह करना चाहिए था या तीन महीने का अग्रिम वेतन देना था, जो नहीं दिया गया।
    तीन साल से बिना अवकाश वृद्धि, बिना वेतन वृद्धि, बिना पीफ और बिना ईएसआई के काम कर रहे कर्मचारियों को अचानक बिना नोटिस के निकाल देना कहां तक उचित है।

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