यूपी में कानून व्यवस्था तो चौपट है ही, प्रशासन में भी भर्राशाही मची हुई है। औरैया जिले में पदस्थ डीएम के स्टेनो राजकुमार ने पद का नाजायज लाभ उठाते हुए पत्नी गीता देवी के नाम गांव की पंचायत की जमीन का ही पट्टा जारी करवा दिया और वह भी उस गांव में, जहां वह कभी रहा ही नहीं। इस भ्रष्टाचार का भी खुलासा नहीं होता, यदि इस संबंध में आरटीआई दाखिल नहीं की जाती। अब जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश जरूर दिए हैं, लेकिन आरोपी पद पर बना हुआ है।
नियम के मुताबिक़ सरकारी जमीन का कृषि अथवा आवासीय पट्टा सरकारी अधिकारी या कर्मचारी अथवा उसके परिवार को किसी भी दशा में नहीं मिल सकता। लेकिन स्टेनो राजकुमार ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए जिले के औद्योगिक क्षेत्र दिबियापुर के समीप ग्राम सेहुद की बेशकीमती सरकारी जमीन के कुछ हिस्से का पट्टा अपनी पत्नी गीता देवी के नाम करने के लिए ग्राम प्रधान को प्रस्ताव भेजने के लिए दबाव डाला। प्रधान ने गैरकानूनी कार्य करने से मना कर दिया। इसके बाद आरोपी ने नया खेल खेलकर पटवारी और उप-जिलाधिकारी के जरिये लगभग 1000 वर्ग फीट का पट्टा पत्नी के नाम करवा लिया। हालांकि जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दे दिए हैं लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बाबजूद आरोपी पद पर बना हुआ है और जांच प्रभावित कर सकता है।
इन परिस्थितियों में सवाल है की इस मामले की जांच महज औपचारिकता रह जाएगी या फिर कोई ठोस कार्रवाई होगी। यह सवाल इसलिए भी खड़ा हो रहा है कि 2012 में तत्कालीन जिलाधीश एस राजलिंगम के दौरान भी स्टेनो के खिलाफ ठोस सबूतों सहत शिकायत की गई थी, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। साये की तरह उनके साथ लगा रहने वाला नाक के नीचे भ्रष्टाचार करता रहा, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सुरेश मिश्रा
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शमीम इकबाल
August 26, 2014 at 8:55 am
सिर्फ वाही नहीं और कई जगह इस तरह का गोरख धंधा चल रहा है /भ्रष्टकर्मी यही कर रहे है /